पेपर लीक और परीक्षा धांधली पर कसता शिकंजा! राज्यसभा में लोक परीक्षा संशोधन विधेयक पेश, जितेंद्र सिंह ने गिनाए कड़े नियम..बोले- सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को राज्यसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026 विचार एवं पारित कराने के लिए पेश किया। उन्होंने कहा कि यह संशोधन 2024 के कानून को और अधिक कठोर तथा प्रभावी बनाने के उद्देश्य से लाया गया है, ताकि पेपर लीक जैसे अपराधों पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके।;

Update: 2026-07-30 10:37 GMT

नई दिल्ली। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को राज्यसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026 विचार एवं पारित कराने के लिए पेश किया। उन्होंने कहा कि यह संशोधन 2024 के कानून को और अधिक कठोर तथा प्रभावी बनाने के उद्देश्य से लाया गया है, ताकि पेपर लीक जैसे अपराधों पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके।

विधेयक पर चर्चा की शुरुआत करते हुए जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह विधेयक लोकसभा से पारित होकर राज्यसभा में आया है, जहां इस पर लगभग दस घंटे चर्चा हुई थी। उन्होंने राज्यसभा को वरिष्ठों, अनुभवी और अधिक परिपक्व सदस्यों का सदन बताते हुए सभी दलों से रचनात्मक सहयोग की अपील की।

उन्होंने कहा कि लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 स्वतंत्र भारत का अपनी तरह का पहला कानून था और वर्तमान संशोधन उसी का विस्तार है। यह कानून प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विद्यार्थियों और युवाओं के भविष्य के प्रति संवेदनशीलता से प्रेरित है।

जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार किसी भी मुद्दे पर अहम के साथ नहीं चलती और रचनात्मक सुझावों का हमेशा स्वागत करती है। हालांकि पेपर लीक घटनाओं के बाद प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कर दिया था कि देश के बच्चों और युवाओं के भविष्य से कोई खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा तथा पेपर लीक के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाएगी। इसी संकल्प को और मजबूत करने के लिए यह संशोधन विधेयक लाया गया है।

उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि इस कानून को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए और यदि सदन के सदस्यों के पास इसे और बेहतर बनाने के सुझाव हैं तो सरकार उन पर गंभीरता से विचार करेगी। यह विधेयक छात्रों और युवाओं के हितों की रक्षा के प्रति सरकार की सर्वोच्च प्रतिबद्धता का प्रमाण है। पेपर लीक किसी एक राज्य या किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित समस्या नहीं है, बल्कि वर्षों से देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अलग-अलग सरकारों के दौरान ऐसी घटनाएं सामने आती रही हैं।

उन्होंने कहा कि देश में समय-समय पर कई चर्चित पेपर लीक के मामले सामने आए हैं। इनमें 2009 रेलवे भर्ती बोर्ड परीक्षा, 2011 अखिल भारतीय इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा, 2012 एम्स दिल्ली प्रवेश परीक्षा, 2013 महाराष्ट्र उच्च माध्यमिक प्रमाणपत्र परीक्षा तथा 2010 बीएड प्रवेश परीक्षा सहित अनेक मामलों की व्यापक चर्चा हुई थी।

जितेंद्र सिंह ने कहा कि देश में सरकारी भर्ती के लिए चार प्रमुख एजेंसियां संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी), कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी), रेलवे भर्ती बोर्ड और बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान कार्य करती हैं। वहीं उच्च शिक्षा में प्रवेश के लिए अब राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) परीक्षा आयोजित कर रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी बनाने का सुझाव पहली बार 1992 में कांग्रेस सरकार के समय आया था। इसके बाद कई समितियां बनीं और 2010 में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के दौरान भी एक समिति ने एनटीए गठित करने की सिफारिश की थी, लेकिन इसे लागू नहीं किया गया।

उन्होंने कहा कि 33 वर्षों तक अधूरा पड़ा यह काम प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार ने पूरा किया। जितेंद्र सिंह ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि लोक परीक्षा अधिनियम, 2024 को जनवरी 2024 में लाया गया, फरवरी में पारित किया गया और जून 2024 से लागू कर अधिसूचित किया गया। इसका उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में अधिक पारदर्शिता लाना था, ताकि छात्रों की मेहनत कुछ स्वार्थी तत्वों के कारण बर्बाद न हो।

उन्होंने कहा कि देश में यह धारणा भी रही है कि पहले राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी इसलिए नहीं बनाई गई क्योंकि कुछ निहित स्वार्थ पारदर्शिता के पक्ष में नहीं थे। सरकार ने युवाओं को भरोसा दिलाने के लिए यह व्यवस्था लागू की कि उनकी ईमानदार मेहनत का उचित परिणाम मिले और उनका भविष्य सुरक्षित रहे।

पेपर लीक मामले का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मामला सामने आते ही उसे केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया गया। उन्होंने बताया कि दो दिन पहले आरोपपत्र दाखिल किया गया और बुधवार से मुकदमे की सुनवाई भी शुरू हो गई है। उन्होंने कहा कि संशोधित कानून के तहत जांच दो महीने में पूरी करनी होगी और उसके बाद तीन महीने के भीतर मुकदमे का निपटारा किया जाएगा। इस प्रकार अधिकतम पांच महीने में मामले का निर्णय सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने पुराने समय की तरह वर्षों तक मुकदमों को लंबित रहने देने की व्यवस्था समाप्त कर दी है। संशोधन विधेयक के माध्यम से सजा और जुर्माने को काफी कठोर बनाया जा रहा है। पहले 3 से 5 वर्ष की कैद और 10 लाख रुपये तक जुर्माना था। अब इसे बढ़ाकर 5 से 10 वर्ष की कैद और 50 लाख रुपये तक जुर्माना किया गया है।

उन्होंने बताया कि सेवा प्रदाता में परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसियां, संगठन, कंपनियां, साझेदारी फर्म, उप-ठेकेदार, तकनीकी सहायता देने वाली संस्थाएं और अन्य सहयोगी इकाइयां शामिल हैं। पहले 1 करोड़ रुपये तक जुर्माना और 4 वर्ष तक परीक्षा कराने पर रोक का प्रावधान था। अब 5 करोड़ रुपये तक जुर्माना और 8 वर्ष तक परीक्षा कराने पर प्रतिबंध लगाया जा सकेगा। निदेशक और वरिष्ठ प्रबंधन पर पहले 3 से 10 वर्ष की कैद और 1 करोड़ रुपये तक जुर्माना था। अब 5 से 10 वर्ष की कैद और 5 करोड़ रुपये तक जुर्माना होगा।

जितेंद्र सिंह ने कहा कि संशोधन विधेयक में विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों की व्यवस्था की गई है, ताकि मुकदमे दर्ज होने के बाद वर्षों तक लंबित न रहें और पेपर लीक जैसे मामलों में दोषियों को जल्द सजा मिल सके। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल मामला दर्ज करना नहीं, बल्कि तय समय सीमा में जांच और सुनवाई पूरी कर दोषियों को दंडित करना है।


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