साइबर फ्रॉड पर PM मोदी का बड़ा जोर, टेक्नोलॉजी से मजबूत समाधान विकसित करने की अपील

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ग्लोबल सिस्टम फॉर मोबाइल कम्युनिकेशंस एसोसिएशन (जीएसएमए) के संचालन मंडल के सदस्यों के साथ बातचीत की और मोबाइल संचार उद्योग से साइबर धोखाधड़ी से निपटने के लिए टेक्नोलॉजी आधारित मजबूत समाधानों की आवश्यकता पर बल दिया;

Update: 2026-10-07 01:50 GMT

साइबर धोखाधड़ी रोकने के लिए टेक्नोलॉजी बने हथियार, PM मोदी ने GSMA बोर्ड से कही बड़ी बात

  • AI, डीपफेक और साइबर फ्रॉड पर PM मोदी का फोकस, GSMA बोर्ड के साथ हुई अहम बैठक

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को यहां ग्लोबल सिस्टम फॉर मोबाइल कम्युनिकेशंस एसोसिएशन (जीएसएमए) के संचालन मंडल के सदस्यों के साथ बातचीत की और मोबाइल संचार उद्योग से साइबर धोखाधड़ी से निपटने के लिए टेक्नोलॉजी आधारित मजबूत समाधानों की आवश्यकता पर बल दिया।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने जीएसएमए बोर्ड के सदस्यों से कहा कि प्रौद्याेगिकी समावेशी और स्वस्थ विकास का माध्यम होनी चाहिए। यह मुलाकात राजधानी में बुधवार को शुरू हो रहे इंडिया मोबाइल कांग्रेस की पूर्व संध्या पर प्रधानमंत्री के कार्यालय सेवा तीर्थ में हुई। बैठक में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, संचार राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर, जीएसएमए बोर्ड के सदस्य और भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

जीएसएमए एक वैश्विक संगठन है जो मोबाइल दूरसंचार पारिस्थितिकी तंत्र को एकीकृत करता है और मोबाइल ऑपरेटरों के साथ-साथ संपूर्ण मोबाइल इकोसिस्टम व संबद्ध उद्योगों का प्रतिनिधित्व करता है।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक विज्ञप्ति में बताया कि श्री मोदी ने इस बैठक में बल दिया कि टेक्नोलॉजी को समावेशी और सतत विकास का माध्यम बनना चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि टेक्नोलॉजी की जन-जन तक पहुँच आवश्यक है ताकि समाज का कोई भी वर्ग पीछे न छूटे। उन्होंने विशेष रूप से विकासशील देशों के लिए तकनीक और डिजिटल सेवाओं को किफायती व सुलभ बनाने की आवश्यकता पर बल दिया तथा डिजिटल विभाजन को बढ़ने से रोकने के लिए टेक्नोलॉजी को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने के महत्व को रेखांकित किया।

उन्होंने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) की क्षमता को विशेष रूप से विकासशील देशों के लिए एक क्रांतिकारी शक्ति के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने उल्लेख किया कि कई वैश्विक नेताओं के साथ डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना

(डीपीआई) पर हुई चर्चाओं ने इसकी बढ़ती वैश्विक प्रासंगिकता को सिद्ध किया है और कहा कि ऐसे प्लेटफॉर्म ग्लोबल साउथ के लिए प्रगति का एक सशक्त माध्यम बन सकते हैं।

डिजिटल और साइबर धोखाधड़ी की बढ़ती चुनौती का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए टेक्नोलॉजी पर आधारित समाधानों की आवश्यकता है। उन्होंने उपयोगकर्ताओं को संभावित फर्जी कॉल के प्रति आगाह करने के लिए निरंतर जागरूकता संदेश चलाने का सुझाव दिया।

प्रधानमंत्री ने इमर्जिंग टेक्नोलॉजी के लिए ग्लोबल स्टैंडर्ड और साझा नियमों की आवश्यकता पर भी बल दिया। डीपफेक और एआई-जनरेटेड कंटेंट के बढ़ते खतरे पर चिंता जताते हुए उन्होंने ऐसे तरीके विकसित करने का सुझाव दिया, जिससे उपयोगकर्ता तुरंत इसके स्रोत की पहचान कर सकें।

जीएसएमए बोर्ड के सदस्यों ने डिजिटल और मोबाइल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में भारत के एक वैश्विक अग्रणी देश के रूप में उभरने की सराहना की। उन्होंने 4जी और 5जी के तेजी से विस्तार, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) के व्यापक पैमाने और टेलीकॉम व मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम की वृद्धि को रेखांकित किया। उन्होंने भारत के निवेश-अनुकूल पॉलिसी फ्रेमवर्क की प्रशंसा की और निरंतर डिजिटल विकास को गति देने में सुरक्षित, मजबूत और विश्वसनीय डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की भूमिका पर जोर दिया।

बोर्ड सदस्यों ने 5जी, 6जी, एआई, साइबर सुरक्षा, डिजिटल समावेशन और सैटेलाइट कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में भारत के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बढ़ते अवसरों पर भी प्रकाश डाला।

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