पीएम केयर्स फंड में 8,452 करोड़ रुपये का बैलेंस, खर्च को लेकर कांग्रेस ने सरकार से पूछा सवाल
पीएम केयर्स फंड की ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार 31 मार्च 2025 तक 8,452.07 करोड़ रुपये का बैलेंस था। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने फंड के सीमित इस्तेमाल और पारदर्शिता पर सवाल उठाए।;
नई दिल्ली। पीएम केयर्स फंड के वित्त वर्ष 2024-25 के ऑडिट आंकड़े सामने आने के बाद इसके इस्तेमाल और पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक 31 मार्च 2025 तक फंड में कुल 8,452.07 करोड़ रुपये का बैलेंस था। कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने इन आंकड़ों का हवाला देते हुए केंद्र सरकार से पूछा कि देश के विभिन्न हिस्सों में प्राकृतिक आपदाओं के बीच राहत और पुनर्वास की जरूरत होने के बावजूद फंड की इतनी बड़ी राशि का इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया।
पवन खेड़ा ने खर्च को लेकर उठाए सवाल
पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट के जरिए सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि उपलब्ध राशि की तुलना में वित्त वर्ष के दौरान बेहद कम रकम खर्च हुई। कांग्रेस नेता ने कहा कि जब देश के कई हिस्से बाढ़, भारी बारिश और दूसरी प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित होते हैं, तब प्रभावित लोगों को तत्काल राहत की जरूरत होती है। ऐसे में फंड में हजारों करोड़ रुपये की राशि मौजूद रहने को लेकर सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
हालांकि, फंड के उपयोग से जुड़े आंकड़ों को लेकर कांग्रेस और सरकार के बीच राजनीतिक मतभेद हैं। ऑडिट रिपोर्ट में दर्ज आंकड़ों के आधार पर ही खर्च और बैलेंस की स्थिति को समझा जा सकता है।
कैसे बढ़कर 8,452 करोड़ रुपये हुआ फंड?
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 की शुरुआत में पीएम केयर्स फंड में 7,173.03 करोड़ रुपये का शुरुआती बैलेंस था। इस वित्त वर्ष में घरेलू और विदेशी दान, ब्याज से हुई आय तथा रिफंड सहित विभिन्न माध्यमों से कुल 1,279.91 करोड़ रुपये फंड में आए।
इसी अवधि में फंड से करीब 87.85 लाख रुपये खर्च किए गए। खर्च के बाद 31 मार्च 2025 को फंड का क्लोजिंग बैलेंस बढ़कर 8,452.07 करोड़ रुपये हो गया।
एफडी में रखी गई बड़ी रकम
रिपोर्ट के मुताबिक 31 मार्च 2025 तक फंड की कुल राशि में लगभग 7,846 करोड़ रुपये फिक्स्ड डिपॉजिट में थे। वहीं करीब 605 करोड़ रुपये सेविंग्स बैंक अकाउंट में रखे गए थे। इस दौरान घरेलू दान में लगभग 30 प्रतिशत की कमी आई और यह करीब 479 करोड़ रुपये रहा। विदेशी दान भी लगभग 18 प्रतिशत घटकर 92.8 लाख रुपये रह गया।
पीएम केयर्स फंड की पारदर्शिता पर फिर बहस
फंड के ताजा आंकड़े सामने आने के साथ ही इसकी पारदर्शिता को लेकर पुराने सवाल भी दोबारा चर्चा में हैं। आलोचक लंबे समय से फंड के संचालन, प्राप्त धन और खर्च से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक किए जाने की मांग करते रहे हैं।
पीएम केयर्स फंड को सरकार ने एक चैरिटेबल ट्रस्ट बताया है और कहा है कि यह सरकारी फंड नहीं है। सरकार का यह भी रुख रहा है कि यह सीधे आरटीआई एक्ट के दायरे में नहीं आता। फंड का ऑडिट कैग द्वारा नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा किया जाता है।
फंड का उद्देश्य केवल कोविड-19 महामारी तक सीमित नहीं है। इसके तहत मेडिकल इमरजेंसी, प्राकृतिक आपदा और अन्य गंभीर परिस्थितियों में राहत एवं सहायता उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
अब खर्च और उपयोग पर जवाब की मांग
ऑडिट आंकड़ों के सार्वजनिक होने के बाद कांग्रेस ने सरकार से फंड में मौजूद बड़ी राशि और उसके इस्तेमाल को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है। पार्टी का सवाल है कि जब फंड का उद्देश्य गंभीर संकट के समय सहायता पहुंचाना है, तो उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल किस आधार पर किया जाता है। दूसरी ओर, फंड के समर्थक इसके दीर्घकालिक वित्तीय प्रबंधन और आपातकालीन जरूरतों के लिए संसाधन सुरक्षित रखने की बात करते हैं। अब पीएम केयर्स फंड के ताजा आंकड़ों ने फंड के इस्तेमाल, पारदर्शिता और आपदा राहत को लेकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।
आरटीआई के दायरे को लेकर भी विवाद
पीएम केयर्स फंड की पारदर्शिता और सूचना के अधिकार (आरटीआई) के दायरे को लेकर भी समय-समय पर विवाद सामने आते रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि आपदा राहत के लिए बनाए गए इस फंड में बड़ी राशि जमा होने के बावजूद इसके इस्तेमाल और फंड के स्रोतों से जुड़ी पर्याप्त सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।