पहलगाम आतंकी हमले में ड्रोन से पहुंचे थे हथियार, एनआईए चार्जशीट में बड़ा खुलासा; 26 लोगों की गई थी जान

पहलगाम आतंकी हमले की एनआईए चार्जशीट में खुलासा हुआ है कि आतंकियों तक हथियार ड्रोन के जरिए पहुंचाए गए थे। जांच में स्थानीय नेटवर्क, ह्यूमन इंटेलिजेंस की कमी और पाकिस्तान समर्थित नई रणनीति पर भी सवाल उठे हैं।;

Update: 2026-06-22 02:30 GMT
कश्मीर। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए चर्चित आतंकी हमले को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की चार्जशीट में कई अहम खुलासे सामने आए हैं। जांच में पता चला है कि हमले में इस्तेमाल किए गए हथियार नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पार से ड्रोन के जरिए भारतीय सीमा में पहुंचाए गए थे। इसी हथियारों के जखीरे का इस्तेमाल कर आतंकियों ने 26 लोगों की हत्या को अंजाम दिया था।

ड्रोन के जरिए पहुंचाए गए हथियार और नकदी

एनआईए की जांच रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 में बारामुला जिले के गोगल डोरा जंगल क्षेत्र में ड्रोन के माध्यम से हथियार, नकदी और अन्य सामग्री गिराई गई थी। चार्जशीट में दावा किया गया है कि ड्रोन से 20 चीनी पिस्तौल, करीब 15 लाख रुपये नकद और एक चीनी ड्रोन आतंकियों के स्थानीय नेटवर्क तक पहुंचाया गया था।

जांच एजेंसी के मुताबिक यह पूरा ऑपरेशन सुरक्षा व्यवस्था को चकमा देकर अंजाम दिया गया और हथियार सीधे आतंकियों के सहयोगियों तक पहुंच गए। इसके बाद इन हथियारों का इस्तेमाल पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले में किया गया।

आतंकी लंबे समय तक स्थानीय लोगों के बीच रहे सक्रिय

चार्जशीट में यह भी बताया गया है कि हमले को अंजाम देने से पहले आतंकी काफी समय तक स्थानीय आबादी के बीच रहकर गतिविधियां संचालित करते रहे। वे विभिन्न पहाड़ी और शहरी इलाकों से गुजरते रहे, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों की नजर में नहीं आए।

जांच में सामने आया है कि आतंकियों ने स्थानीय स्तर पर समर्थन और लॉजिस्टिक नेटवर्क तैयार किया था, जिससे उन्हें आवाजाही और छिपने में मदद मिली। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यही वजह रही कि उनकी गतिविधियों की समय रहते जानकारी नहीं मिल सकी।

ह्यूमन इंटेलिजेंस की कमी पर उठे सवाल

सुरक्षा मामलों के जानकारों ने इस मामले को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि वर्ष 2022 से 2024 के बीच मानव खुफिया तंत्र (ह्यूमन इंटेलिजेंस) कमजोर पड़ने के कारण आतंकी गतिविधियों की जानकारी समय पर नहीं मिल पाई।

विशेषज्ञों के अनुसार सुरक्षा एजेंसियां तकनीकी निगरानी और इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस पर अधिक निर्भर हो गईं, जबकि जमीनी स्तर पर सूचना जुटाने की व्यवस्था अपेक्षाकृत कमजोर रही। इसका फायदा उठाकर आतंकी संगठन घाटी में अपनी गतिविधियां बढ़ाने में सफल रहे।

आतंक फैलाने की रणनीति में बदलाव

जांच और सुरक्षा विश्लेषण से यह भी स्पष्ट हुआ है कि पाकिस्तान समर्थित आतंकी नेटवर्क ने हथियार पहुंचाने के तरीकों में बदलाव किया है। पहले जहां घुसपैठियों के जरिए हथियार भेजे जाते थे, वहीं अब ड्रोन तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि एलओसी पर कड़ी निगरानी और सुरक्षा बलों की बढ़ती सतर्कता के कारण आतंकियों ने ड्रोन आधारित सप्लाई नेटवर्क को प्राथमिकता दी है। इससे सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

ग्राउंड नेटवर्क मजबूत करने की जरूरत

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में स्थानीय सूचना तंत्र को फिर से मजबूत करना होगा। पहले गुज्जर-बक्करवाल समुदाय सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण सूचना स्रोत माना जाता था, लेकिन हाल के वर्षों में इस नेटवर्क में कमी देखी गई है। यही कारण है कि पीर पंजाल और आसपास के क्षेत्रों में आतंकी गतिविधियों में बढ़ोतरी दर्ज की गई।

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