उमर अब्दुल्ला और पायल का 32 साल पुराना रिश्ता खत्म, सुप्रीम कोर्ट ने आपसी सहमति से तलाक को दी मंजूरी
सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी पत्नी पायल अब्दुल्ला के आपसी सहमति से तलाक को मंजूरी दे दी। 17 साल से अलग रह रहे दोनों ने सभी कानूनी मामले वापस लेने पर भी सहमति जताई।;
नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी पत्नी पायल अब्दुल्ला के बीच वर्षों से चल रहा वैवाहिक विवाद आखिरकार समाप्त हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों की आपसी सहमति से तलाक की याचिका स्वीकार करते हुए विवाह संबंध समाप्त करने की मंजूरी दे दी। इसके साथ ही दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ दर्ज सभी कानूनी मामलों को वापस लेने पर भी सहमति जताई है। दोनों पिछले करीब 17 वर्षों से अलग रह रहे थे।
अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट ने किया विवाद का निपटारा
मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि दोनों पक्ष अब आपसी सहमति से अलग होने का फैसला कर चुके हैं और अपने जीवन में आगे बढ़ना चाहते हैं। इसके बाद न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेष अधिकारों का उपयोग करते हुए तलाक को मंजूरी दे दी।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के साथ दोनों के बीच वर्षों से चल रही कानूनी लड़ाई का भी अंत हो गया। अदालत में यह भी सहमति बनी कि दोनों पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ लंबित सभी मामलों को वापस लेंगे।
1994 में हुई थी शादी, 2009 से रह रहे थे अलग
उमर अब्दुल्ला और पायल की मुलाकात दिल्ली के एक होटल में काम करने के दौरान हुई थी। दोनों के बीच दोस्ती धीरे-धीरे रिश्ते में बदली और सितंबर 1994 में उन्होंने विवाह कर लिया। इस दंपति के दो बेटे हैं।
समय के साथ रिश्तों में तनाव बढ़ा और वर्ष 2009 से दोनों अलग रहने लगे। बाद में 2011 में उमर अब्दुल्ला ने सार्वजनिक रूप से अलग रहने की पुष्टि भी की थी।
फैमिली कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक चली कानूनी लड़ाई
उमर अब्दुल्ला ने शुरुआत में क्रूरता के आधार पर तलाक की मांग करते हुए अदालत का रुख किया था। हालांकि फैमिली कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी और कहा कि लगाए गए आरोप पर्याप्त रूप से साबित नहीं हो सके।
इसके बाद उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील दायर की, लेकिन दिसंबर 2023 में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने भी फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। हाईकोर्ट ने पायल अब्दुल्ला को प्रति माह 1.5 लाख रुपये गुजारा भत्ता और बेटे की शिक्षा के लिए हर महीने 60 हजार रुपये देने का निर्देश भी दिया था।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद उमर अब्दुल्ला ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। अंततः दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति बनने के बाद सर्वोच्च अदालत ने विवाह समाप्त करने की मंजूरी दे दी। इस फैसले के साथ वर्षों से लंबित पारिवारिक विवाद का कानूनी समाधान हो गया।