राज्यसभा में एनडीए की ताकत बढ़ी, दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंचा गठबंधन; भाजपा को और सीटों की उम्मीद
राज्यसभा चुनाव के बाद एनडीए की ताकत बढ़ी। 27 सीटों में 19 जीतकर गठबंधन 152 सीटों तक पहुंचा। भाजपा को टीएमसी संकट और अन्य समर्थन से और बढ़त मिलने की उम्मीद।;
नई दिल्ली।राज्यसभा की 27 सीटों पर हुए हालिया चुनावों के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की स्थिति और मजबूत हो गई है। उच्च सदन में गठबंधन की संख्या बढ़ने से वह दो-तिहाई बहुमत के और करीब पहुंच गया है। हालांकि अभी यह आंकड़ा हासिल नहीं हुआ है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आने वाले दिनों में कुछ और घटनाक्रम NDA की ताकत को और बढ़ा सकते हैं। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी हलचल पर सभी की नजरें टिकी हैं।
27 सीटों के चुनाव के बाद मजबूत हुआ NDA
राज्यसभा की 27 सीटों के लिए हुए चुनाव में NDA ने 19 सीटों पर जीत दर्ज की। इसके बाद 245 सदस्यीय उच्च सदन में गठबंधन की संख्या बढ़कर 152 तक पहुंच गई है। वर्तमान गणित के अनुसार राज्यसभा में बहुमत के लिए 123 सीटों की जरूरत होती है, जबकि दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा 164 के आसपास माना जाता है। ऐसे में NDA अभी इस लक्ष्य से कुछ दूरी पर है, लेकिन राजनीतिक परिस्थितियां उसके पक्ष में जाती दिख रही हैं।
तृणमूल कांग्रेस में संकट से बदल सकते हैं समीकरण
राज्यसभा के नए समीकरणों में सबसे बड़ी चर्चा तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रही उथल-पुथल को लेकर है। पार्टी के 13 राज्यसभा सदस्यों में से चार सांसदों के इस्तीफे के बाद राजनीतिक अटकलें तेज हो गई हैं। इन सीटों पर भविष्य में होने वाले चुनावों में भाजपा को फायदा मिलने की संभावना जताई जा रही है।
इस्तीफा देने वाले नेताओं में सुखेंदु शेखर रे, सुष्मिता देव, कोयल मलिक और प्रकाश बरिक के नाम चर्चा में हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इन सीटों पर भाजपा या NDA समर्थित उम्मीदवार जीतते हैं, तो गठबंधन की संख्या और बढ़ सकती है। इसके अलावा यह भी कहा जा रहा है कि टीएमसी के कुछ अन्य सांसद भी पार्टी छोड़ सकते हैं, हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
भाजपा बनी सबसे बड़ी पार्टी
राज्यसभा में भाजपा पहले से ही सबसे बड़ी पार्टी बनी हुई है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक भाजपा के पास 115 सदस्य हैं। NDA में सहयोगी दलों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। तेलुगु देशम पार्टी (TDP), जनता दल यूनाइटेड (JDU) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के चार-चार सदस्य हैं। शिवसेना के दो और जनसेना पार्टी का एक सांसद भी गठबंधन के साथ है।
इसके अलावा सदन में सात नामित सदस्य और चार निर्दलीय सांसद भी मौजूद हैं, जिनका समर्थन विभिन्न मुद्दों पर सरकार को मिल सकता है।
AAP सांसदों के आने से भी बढ़ी ताकत
हाल के महीनों में आम आदमी पार्टी (AAP) के कई नेताओं के भाजपा के साथ आने की खबरों ने भी NDA की स्थिति मजबूत की है। राघव चड्ढा, हरभजन सिंह समेत सात राज्यसभा सांसदों के भाजपा समर्थक खेमे में आने की चर्चाओं के बाद गठबंधन की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।
मिजोरम से भी मिला समर्थन का संकेत
मिजोरम से हाल ही में राज्यसभा पहुंचे के. लालतलुआंगकिमा ने संकेत दिया है कि राज्य और जनता के हित से जुड़े मुद्दों पर वह NDA का समर्थन कर सकते हैं। हालांकि उनकी पार्टी ZPM ने खुद को NDA और INDIA दोनों गठबंधनों से अलग बताया है, लेकिन संसद में सहयोग की संभावना से NDA को अतिरिक्त लाभ मिल सकता है।