मुजफ्फराबाद/नई दिल्ली : पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में महंगाई, राजनीतिक उपेक्षा और प्रशासनिक नीतियों के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। क्षेत्र में सक्रिय ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के नेतृत्व वाले आंदोलन पर प्रशासन की सख्ती तेज हो गई है। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों और खुफिया आकलनों में दावा किया गया है कि आंदोलन के शीर्ष नेताओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंकाएं हैं।
जेएएसी आंदोलन के केंद्र में
जेएएसी पिछले कई महीनों से क्षेत्र में बढ़ती महंगाई, बिजली दरों, संसाधनों के वितरण और स्थानीय लोगों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रही है। संगठन का कहना है कि उसकी मांगें पूरी तरह शांतिपूर्ण और जनहित से जुड़ी हैं। दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, हालिया कार्रवाई के दौरान कई प्रदर्शनकारियों की मौत हुई है और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। विभिन्न स्रोतों में मृतकों की संख्या अलग-अलग बताई गई है, जबकि आधिकारिक आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।
नेतृत्व ने आंदोलन जारी रखने की अपील की
रिपोर्टों के मुताबिक, आंदोलन से जुड़े नेताओं ने समर्थकों से अपील की है कि किसी भी परिस्थिति में आंदोलन को शांतिपूर्ण ढंग से जारी रखा जाए। कुछ नेताओं ने सार्वजनिक संदेशों में कहा है कि यदि उन्हें निशाना बनाया जाता है, तब भी लोगों को अपने अधिकारों की मांग लोकतांत्रिक तरीके से जारी रखनी चाहिए। इन बयानों को आंदोलनकारियों के मनोबल बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
मुजफ्फराबाद मार्च की तैयारी
जेएएसी ने मुजफ्फराबाद की ओर बड़े प्रदर्शन मार्च का आह्वान किया है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, कई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाओं और युवाओं के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि कई क्षेत्रों में आवाजाही पर प्रतिबंध लगाए गए हैं और कुछ स्थानों पर इंटरनेट सेवाओं में भी व्यवधान की सूचना है। हालांकि, इन प्रतिबंधों के संबंध में आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।
भारत ने जताई चिंता
भारत ने पीओके की स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि क्षेत्र में आम नागरिकों की वैध मांगों पर ध्यान देने के बजाय कठोर प्रशासनिक उपाय अपनाए जाने की खबरें चिंताजनक हैं। उन्होंने कहा कि नागरिकों के अधिकारों और मानवीय जरूरतों का सम्मान किया जाना चाहिए। भारत लंबे समय से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में रहने वाले लोगों के अधिकारों और वहां की परिस्थितियों को लेकर अपनी चिंता व्यक्त करता रहा है।
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने उठाए मानवाधिकार के मुद्दे
मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी पाकिस्तान में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पत्रकारों की गिरफ्तारी पर सवाल उठाए हैं। संगठन ने आरोप लगाया है कि शांतिपूर्ण विरोध से जुड़े लोगों के खिलाफ प्रशासनिक कानूनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। एमनेस्टी ने पश्तून तहफ्फुज मूवमेंट (पीटीएम) के नेता जुबैर शाह आगा, बलूच कार्यकर्ता सैयद बीबी बलूच और पत्रकार अहमद फरहाद की रिहाई की मांग की है। संगठन के अनुसार, इन लोगों को सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने से जुड़े कानूनों के तहत हिरासत में रखा गया है। एमनेस्टी का कहना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए।
क्षेत्रीय स्थिति पर बनी हुई है नजर
पीओके में जारी घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार संगठनों की नजर बनी हुई है। एक ओर प्रदर्शनकारी अपनी सामाजिक और आर्थिक मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दे रहा है। स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है और आने वाले दिनों में मुजफ्फराबाद में प्रस्तावित प्रदर्शन के मद्देनजर तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल स्वतंत्र स्रोतों से सभी दावों की पुष्टि नहीं हो सकी है और घटनाक्रम पर विभिन्न पक्षों के आधिकारिक बयानों का इंतजार किया जा रहा है।