एनआरसी की मांग पर मणिपुर में 48 घंटे का बंद, घाटी के पांच जिलों में जनजीवन प्रभावित

मणिपुर में जनगणना 2027 से पहले एनआरसी लागू करने की मांग को लेकर 48 घंटे का बंद जारी है। घाटी के पांच जिलों में बाजार, स्कूल और सार्वजनिक परिवहन प्रभावित रहे।;

Update: 2026-08-19 07:05 GMT
इंफाल। मणिपुर में जनगणना से पहले नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस (एनआरसी) लागू करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। एक छात्र संगठन के आह्वान पर 48 घंटे का राज्यव्यापी बंद बुधवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। इसका सबसे ज्यादा असर घाटी के पांच जिलों में देखने को मिला। बाजार, स्कूल-कॉलेज, व्यापारिक प्रतिष्ठान और सार्वजनिक परिवहन सेवाएं बंद रहीं। हालांकि कुछ इलाकों में निजी वाहन चलते दिखाई दिए।

बंद का प्रभाव मुख्य रूप से इंफाल ईस्ट, इंफाल वेस्ट, थौबल, काकचिंग और बिष्णुपुर जिलों में रहा। दूसरी ओर, राज्य के अधिकांश पहाड़ी इलाकों में सामान्य गतिविधियां जारी रहीं।

इंफाल में सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारी

बंद के दौरान इंफाल ईस्ट और इंफाल वेस्ट के कई हिस्सों में प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर बांस के खंभे और बड़े पत्थर रखकर यातायात बाधित किया। कई जगह प्रदर्शनकारियों के हाथों में ‘नो एनआरसी, नो सेंसस’ लिखे पोस्टर दिखाई दिए।

घाटी के अन्य जिलों में भी बंद का असर रहा। सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति कम रही, जबकि शिक्षण संस्थान बंद रहे। सार्वजनिक परिवहन के पहिए थमने से लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ा।

पहाड़ी जिलों में सामान्य रही स्थिति

‘कैंपेन फॉर जस्ट एंड फ्री डिलिमिटेशन’ (जेएफडी) की ओर से बुलाए गए बंद का पहाड़ी जिलों में अपेक्षाकृत कम असर देखने को मिला। चुराचांदपुर समेत कई पहाड़ी क्षेत्रों में बाजार और अन्य गतिविधियां सामान्य रूप से चलती रहीं।

इस बीच राज्य सरकार की ओर से भी इस मांग को केंद्र तक पहुंचाने की बात कही गई है। राज्य सरकार के प्रवक्ता और विधायक सपम रंजन सिंह ने कहा था कि विधायकों का एक प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली जाकर केंद्रीय नेताओं से मुलाकात करेगा। प्रतिनिधिमंडल केंद्र के सामने जनगणना से पहले NRC लागू करने की स्थानीय मांग रखेगा।

जनगणना की प्रक्रिया के बीच बढ़ी मांग

मणिपुर में एनआरसी लागू करने की मांग ऐसे समय तेज हुई है जब सेंसस 2027 की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। जनगणना के तहत सेल्फ-एन्यूमरेशन चरण 17 अगस्त से शुरू होने की समयसीमा तय की गई है। इसके बाद 1 सितंबर से 30 सितंबर तक हाउस-लिस्टिंग का चरण प्रस्तावित है।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जनगणना की प्रक्रिया शुरू होने से पहले एनआरसी लागू किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि इससे राज्य में अवैध प्रवासियों की पहचान करने में मदद मिलेगी।

सेंसस कार्यालय के बाहर भी प्रदर्शन

एनआरसी की मांग को लेकर छात्रों ने रविवार को इंफाल स्थित डायरेक्टरेट ऑफ सेंसस ऑपरेशन्स के बाहर प्रदर्शन किया था। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा था। इससे पहले 16 अगस्त की शाम इंफाल ईस्ट और इंफाल वेस्ट में प्रदर्शनकारियों ने मशाल रैली भी निकाली थी।

मणिपुर में एनआरसी को लेकर मांग लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय रही है। अब जनगणना की प्रक्रिया के साथ यह मुद्दा फिर प्रमुखता से सामने आया है। राज्य में प्रशासन के सामने एक ओर जनगणना की प्रक्रिया को सुचारु रूप से आगे बढ़ाने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर एनआरसी की मांग को लेकर बढ़ते विरोध को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी भी है।

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