मल्लिकार्जुन खरगे के मंच के ‘शुद्धिकरण’ पर संसद में हंगामा, नड्डा बोले- ‘दुखद है, जांच करेंगे’
हल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद रामलीला मैदान के कथित शुद्धिकरण का मुद्दा राज्यसभा में उठा। जेपी नड्डा ने घटना को दुखद बताते हुए जांच का भरोसा दिया।;
खरगे ने सदन में उठाया मामला
राज्यसभा में बोलते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने हल्द्वानी की 8 अगस्त की रैली का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने रामलीला मैदान में लोगों की समस्याओं को लेकर भाषण दिया था और अपने संबोधन में किसी समाज या धर्म का नाम नहीं लिया।
खरगे के मुताबिक, रैली खत्म होने के बाद कुछ लोगों ने उसी मंच और मैदान में हवन कर कथित तौर पर उसका ‘शुद्धिकरण’ किया। कांग्रेस अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि क्या इस तरह की कार्रवाई लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप है।
नड्डा ने कहा- घटना दुखद, जांच कराएंगे
खरगे के आरोपों का जवाब देते हुए जेपी नड्डा ने कहा कि अगर मैदान में ऐसा कोई कार्यक्रम हुआ है तो यह केवल कांग्रेस के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए दुखद विषय है। उन्होंने कहा कि भाजपा ऐसी घटनाओं को स्वीकार नहीं करती।
नड्डा ने हालांकि खरगे के इस दावे पर आपत्ति जताई कि इसमें भाजपा के लोग शामिल थे। उन्होंने कहा कि बिना जांच के किसी राजनीतिक दल के लोगों पर आरोप लगाना उचित नहीं है। साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि मामले की जांच कराई जाएगी और तथ्य सामने आने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।
राज्यसभा सभापति ने भी जताया खेद
इस मुद्दे पर राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने भी दुख जताया। उन्होंने कहा कि ऐसी घटना पर सभी को चिंता है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि यदि किसी ने इस तरह की घटना को अंजाम दिया है तो उसकी पहचान कर कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाए।
मामले पर सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी भी देखने को मिली।
क्या है हल्द्वानी का पूरा मामला?
कांग्रेस की ओर से आयोजित ‘विजय शंखनाद रैली’ में 8 अगस्त को मल्लिकार्जुन खरगे ने हिस्सा लिया था। रैली समाप्त होने के बाद रामलीला मैदान में कथित तौर पर हवन और शुद्धिकरण अनुष्ठान कराया गया।
स्थानीय धार्मिक संगठन से जुड़े लोगों ने दावा किया कि रैली के दौरान कथित तौर पर ऐसी बातें कही गईं, जिनसे मैदान की धार्मिक मान्यताओं को ठेस पहुंची। इसी वजह से मैदान में शुद्धिकरण यज्ञ कराने की बात कही गई।
वहीं कांग्रेस ने इस कार्रवाई को लेकर आपत्ति जताई है। पार्टी का कहना है कि किसी राजनीतिक कार्यक्रम के बाद मंच या मैदान का कथित ‘शुद्धिकरण’ करना राजनीतिक और सामाजिक रूप से आपत्तिजनक संदेश देता है।
अब यह मामला संसद में उठने के बाद राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। जेपी नड्डा की ओर से जांच का आश्वासन दिए जाने के बाद सभी की नजर इस बात पर है कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और संबंधित लोगों पर कोई कार्रवाई होती है या नहीं।