घाटी में फिर कश्मीरी पंडितों को डराने की कोशिश, आतंकी धमकी में नाम-पते और फोन नंबर जारी, बढ़ाई गई सुरक्षा
कश्मीर घाटी में कश्मीरी पंडित सरकारी कर्मचारियों को कथित आतंकी धमकी और उनकी निजी जानकारी सार्वजनिक किए जाने से सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं।;
नई दिल्ली। कश्मीर घाटी में कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास की प्रक्रिया को प्रभावित करने की कथित कोशिश ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। सोशल मीडिया पर सामने आई एक कथित सूची में कश्मीरी पंडित सरकारी कर्मचारियों के नाम, फोन नंबर, कार्यस्थल और उनके घरों से जुड़ी जानकारी साझा किए जाने का दावा किया जा रहा है। मामले के सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई गई है।
लश्कर से जुड़े संगठन पर शक
सामने आई जानकारी को लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े बताए जा रहे संगठन यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल (ULC) से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, सूची और धमकी की प्रामाणिकता तथा इसके पीछे की जिम्मेदारी की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
रिपोर्टों के मुताबिक, कथित संदेशों में प्रधानमंत्री पुनर्वास पैकेज (PMRP) के तहत घाटी में काम कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को निशाना बनाया गया है। सूची में व्यक्तिगत जानकारी साझा किए जाने से सुरक्षा एजेंसियों ने मामले को गंभीरता से लिया है।
घाटी के साथ जम्मू में रहने वाले परिवार भी निशाने पर
बताया जा रहा है कि इस बार सामने आई कथित सूची में केवल घाटी में रह रहे लोगों की जानकारी ही नहीं, बल्कि जम्मू में रहने वाले कुछ कश्मीरी पंडित परिवारों से जुड़ी सूचनाएं भी शामिल हैं। धमकी भरे संदेशों में घाटी लौटकर काम कर रहे कश्मीरी पंडितों के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किए जाने का दावा है।
सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे घटनाक्रम को कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास और घाटी में उनकी वापसी को प्रभावित करने की कोशिश के तौर पर भी जांच रही हैं।
पहले भी मिल चुकी हैं धमकियां
कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को इससे पहले भी आतंकी संगठनों की ओर से धमकियां मिलने के मामले सामने आते रहे हैं। ऐसे मामलों के बाद प्रशासन ने संवेदनशील कर्मचारियों की सुरक्षा बढ़ाने के साथ कुछ स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम किए थे। ट्रांजिट कैंपों और सरकारी कार्यालयों की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया गया था।
इस बार भी सुरक्षा एजेंसियां सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री की जांच कर रही हैं। साथ ही, संभावित खतरे को देखते हुए संवेदनशील सरकारी प्रतिष्ठानों और कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है।
1990 जैसे हालात पैदा करने की कोशिश?
कश्मीरी पंडितों को निशाना बनाकर जारी की गई कथित धमकी ने 1990 के दशक की घटनाओं की यादें ताजा कर दी हैं। हालांकि, मौजूदा स्थिति में सुरक्षा बल और प्रशासन हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
सुरक्षा एजेंसियों का फोकस धमकी जारी करने वालों की पहचान करने, सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री के स्रोत का पता लगाने और संभावित खतरे को रोकने पर है। जम्मू और कश्मीर दोनों क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई है।