LPG Rule Change: ईरान युद्ध से एलपीजी पर संकट, एक्शन मोड में सरकार, दनादन ले रही बड़े फैसले
US-Israel Vs Iran War Impact: मिडिल ईस्ट में युद्ध की आग का असर दुनियाभर में एनर्जी सेक्टर पर देखने को मिल रहा है। भारत में एलपीजी को लेकर चिंताएं बढ़ने लगी हैं और लोगों में घबराहट है, हालांकि सरकार की ओर लगातार पर्याप्त रिजर्व होने का भरोसा दिलाने के साथ ही बड़े कदम उठाए जा रहे हैं।
नई दिल्ली। अमेरिका-इजरायल के साथ ईरान की जंग से मिडिल ईस्ट टेंशन चरम पर है. इस बढ़ते युद्ध ने एनर्जी सेक्टर में मुश्किलें खड़ी कर दी हैं, जिनसे पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों में हाहाकार मचा है। वहीं दूसरी ओर भारत में एलपीजी संकट (LPG Crisis) बढ़ता नजर आ रहा है। बीते 7 मार्च को LPG Cylinder Price Hike करते हुए आम लोगों को महंगाई का तगड़ा झटका दिया गया, तो वहीं इसके बाद भी सरकार की ओर से तमाम बड़े फैसले लिए जा रहे हैं। सरकार ने एलपीजी सिलेंडर बुकिंग से जुड़ा एक नियम भी बदला (LPG Booking Rule Change) है।
लोगों में LPG को लेकर घबराहट
सबसे पहले बात करते हैं देश में एलपीजी संकट के हालात के बारे में, तो ईरान युद्ध के बीच तेल-गैस को लेकर दुनिया में परेशानियां बढ़ती हुई दिखाई दी हैं और अब तस्वीर साफ होती जा रही है। भारत की बात करें, तो सरकार पर्याप्त रिजर्व होने का दावा कर रही है, लेकिन इन दावों के बीच देश के तमाम बढ़े शहरों में ईरान युद्ध के बीच LPG Cylinder को लेकर घबराहट का माहौल देखने को मिला है। यूपी, कोलकाता और हैदराबाद समेत कई जगहों पर गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लगी हैं। लेकिन सरकार और एक्सपर्ट का साफ कहना है कि देश में एलपीजी की कमी नहीं है और ये स्थिति सिर्फ घबराहट में की जा रही बुकिंग के चलते बनी है।
सिलेंडर के दाम बढ़े, खरीदने की मची होड़
बता दें कि बीते 7 मार्च को ही आईओसीएल ने एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में संशोधन करते हुए कॉमर्शियल सिलेंडर के साथ ही रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में भी अचानक तगड़ा इजाफा कर दिया था और युद्ध से सप्लाई में रुकावट की चिंताओं के बीच महंगाई का तगड़ा झटका दिया था। LPG Cylinder Price Hike की बात करें, तो देश में 14 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम 60 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर 115 रुपये बढ़ा दिए गए थे। इसके बाद न सिर्फ आम लोगों, बल्कि होटल-रेस्टोरेंट जैसे कारोबारों को भी झटका लगा।
सरकार ने फटाफट लिया ये एक्शन
अमेरिका-इजरायल के साथ ईरान के युद्ध (US-Israel Vs Iran War) से बढ़ी ग्लोबल टेंशन के बीच फ्यूल सप्लाई में मौजूदा जियोपॉलिटिकल रुकावटों को देखते हुए सरकार की ओर से भी फटाफट एक्शन लिए जा रहे हैं। LPG Gas की सप्लाई में रुकावटों को देखते हुए पेट्रोलियम मिनिस्ट्री ने ऑयल रिफाइनरियों को ज्यादा एलपीजी प्रोडक्शन करने का आदेश दिया है, तो वहीं इस एक्स्ट्रा प्रोडक्शन का इस्तेमाल खासतौर पर घरेलू एलपीजी इस्तेमाल के लिए करने के लिए भी निर्देशित किया है।
एलपीजी नियमों में क्या बदलाव?
एलपीजी संकट से निपटने के लिए सरकार के अन्य फैसलों के साथ ही एलपीजी सिलेंडर बुकिंग से जुड़ा नियम भी बदला (LPG Cylinder Booking Rule Change) गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग के लिए मिनिमम टाइम लिमिट को पहले के 21 दिन से बढ़ा दिया है और अब इसे 25 दिन कर दिया गया है। सरकार ने जमाखोरी रोकने के लिए ये फैसला लिया है और इसका साफ मतलब है कि अब 25 दिन बाद ही सिलेंडर बुक किए जा सकेंगे।
घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता क्यों दी गई?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि अंतरराष्ट्रीय संकट के कारण एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित होती है तो सबसे पहले घरेलू उपभोक्ताओं की जरूरत पूरी की जाएगी। इसी उद्देश्य से घरेलू गैस सिलेंडर की बुकिंग के बीच 25 दिनों का अंतर अनिवार्य किया गया है। यह कदम जमाखोरी और घबराहट में ज्यादा सिलेंडर बुक करने की प्रवृत्ति को रोकने के लिए उठाया गया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है अहम?
भारत की बड़ी मात्रा में एलपीजी और कच्चा तेल पश्चिम एशिया से आयात होता है। इन आपूर्तियों का बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है। पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने पर इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा पर भी खतरा बढ़ जाता है, जिससे ऊर्जा आपूर्ति बाधित हो सकती है।
उद्योग और होटल सेक्टर पर क्या असर पड़ सकता है?
सरकार ने गैर-घरेलू एलपीजी आपूर्ति की भी समीक्षा शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार होटल, रेस्तरां और उद्योगों को मिलने वाली गैस की आपूर्ति पर नजर रखी जा रही है। यदि स्थिति और बिगड़ती है तो घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देने के लिए इन क्षेत्रों में आपूर्ति सीमित की जा सकती है। हालांकि अस्पताल और शैक्षणिक संस्थानों जैसे जरूरी क्षेत्रों को गैस की आपूर्ति जारी रखी जाएगी।
सरकार की आगे की रणनीति क्या है?
सरकार फिलहाल एलपीजी उत्पादन बढ़ाने, वितरण व्यवस्था को सख्त करने और घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने की रणनीति पर काम कर रही है। साथ ही वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि रसोई गैस देश के करोड़ों परिवारों के रोजमर्रा के जीवन से जुड़ी है, इसलिए सरकार इस आपूर्ति को किसी भी हालत में प्रभावित नहीं होने देना चाहती।