भारत ने रक्षा खर्च में बनाया नया रिकॉर्ड, दुनिया में पांचवें स्थान पर पहुंचा

SIPRI Yearbook 2026 के अनुसार भारत ने 2025 में रक्षा क्षेत्र पर 92.1 अरब डॉलर खर्च किए। भारत दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा सैन्य खर्च करने वाला देश बन गया है। रिपोर्ट में भारत-पाक तनाव और परमाणु हथियारों पर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है।;

Update: 2026-06-10 03:10 GMT

नई दिल्ली। बढ़ती वैश्विक चुनौतियों, सीमा सुरक्षा की जरूरतों और सैन्य आधुनिकीकरण की दिशा में भारत ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। स्वीडन स्थित अंतरराष्ट्रीय शोध संस्था SIPRI (स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट) की इयरबुक 2026 के अनुसार भारत ने वर्ष 2025 में रक्षा और सैन्य तैयारियों पर 92.1 अरब डॉलर खर्च किए। इसके साथ ही भारत दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा सैन्य खर्च करने वाला देश बन गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक भारत का रक्षा बजट वर्ष 2024 की तुलना में 8.9 प्रतिशत अधिक रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह वृद्धि भारतीय सेना के आधुनिकीकरण, स्वदेशी रक्षा उत्पादन और सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है।

वैश्विक सैन्य खर्च लगातार 11वें वर्ष बढ़ा

SIPRI की रिपोर्ट बताती है कि दुनिया भर में बढ़ते युद्धों, क्षेत्रीय संघर्षों और भू-राजनीतिक तनावों के कारण वैश्विक सैन्य खर्च लगातार 11वें वर्ष बढ़ा है। वर्ष 2025 में दुनिया के देशों ने मिलकर लगभग 2.9 ट्रिलियन डॉलर रक्षा क्षेत्र पर खर्च किए, जो वैश्विक जीडीपी का करीब 2.5 प्रतिशत है।

रिपोर्ट के अनुसार यह अब तक का सबसे बड़ा वैश्विक सैन्य खर्च है। गाजा संघर्ष, यूक्रेन युद्ध और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते तनावों ने कई देशों को अपने रक्षा बजट में बढ़ोतरी करने के लिए प्रेरित किया है।

सैन्य खर्च में शीर्ष पांच देश

SIPRI के आंकड़ों के अनुसार सैन्य खर्च के मामले में अमेरिका अब भी दुनिया में पहले स्थान पर बना हुआ है। शीर्ष पांच देशों की सूची इस प्रकार है:

अमेरिका – 954 अरब डॉलर

चीन – 336 अरब डॉलर

रूस – 190 अरब डॉलर

जर्मनी – चौथा स्थान

भारत – 92.1 अरब डॉलर

रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक सैन्य खर्च का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा केवल शीर्ष 15 देशों द्वारा किया गया।

भारत-पाकिस्तान तनाव पर विशेष टिप्पणी

रिपोर्ट में मई 2025 के भारत-पाकिस्तान सैन्य तनाव को वर्ष की सबसे गंभीर घटनाओं में शामिल किया गया है। SIPRI के अनुसार 7 से 10 मई के बीच दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव काफी बढ़ गया था।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि संघर्ष के दौरान दोनों देशों ने पहली बार खुले तौर पर साइबर हमलों का उपयोग किया। विश्लेषकों के मुताबिक आधुनिक युद्ध में साइबर क्षमताओं की बढ़ती भूमिका भविष्य के संघर्षों की दिशा तय कर सकती है।

परमाणु क्षमता में भी बढ़ोतरी

SIPRI के अनुसार जनवरी 2026 तक भारत के पास लगभग 190 परमाणु वॉरहेड्स मौजूद थे, जबकि पाकिस्तान के पास यह संख्या करीब 170 रही। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत लंबी दूरी की मिसाइल प्रणालियों के विकास पर तेजी से काम कर रहा है, जिससे उसकी सामरिक क्षमता और मजबूत हो रही है।

दुनिया के नौ परमाणु संपन्न देशों के पास कुल मिलाकर लगभग 12,187 परमाणु हथियार हैं। हालांकि कुल संख्या में मामूली गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन अधिकांश देश अपने परमाणु शस्त्रागार के आधुनिकीकरण पर लगातार निवेश कर रहे हैं।

हथियार आयात में भी भारत शीर्ष देशों में शामिल

रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2021 से 2025 के बीच भारत दुनिया के पांच सबसे बड़े हथियार आयातकों में शामिल रहा। इस सूची में यूक्रेन, सऊदी अरब, कतर और पाकिस्तान भी शामिल हैं। वैश्विक हथियार आयात का लगभग 35 प्रतिशत हिस्सा इन पांच देशों के खाते में रहा।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का बढ़ता रक्षा बजट केवल सैन्य ताकत का संकेत नहीं है, बल्कि बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल में देश की रणनीतिक तैयारी और आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता को भी दर्शाता है। आने वाले वर्षों में रक्षा क्षेत्र में निवेश और स्वदेशी तकनीक के विस्तार से भारत की सैन्य स्थिति और मजबूत होने की संभावना है।

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