आईबी अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड: ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को उम्रकैद, दिल्ली दंगा मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला
दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने 2020 दिल्ली दंगों के दौरान IB अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में पूर्व AAP पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। जानें पूरा मामला।;
नई दिल्ली। वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के बहुचर्चित मामले में दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह की अदालत ने पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने ताहिर हुसैन, नजीर, आसिम, जावेद और अनास को हत्या सहित कई गंभीर धाराओं में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा दी।
हत्या समेत कई धाराओं में दोषी, कुछ आरोपों से मिली राहत
अदालत ने ताहिर हुसैन को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 (हत्या), 365, 147, 148, 149, 153ए और 188 समेत कई धाराओं के तहत दोषी माना। हालांकि, उन्हें धारा 120बी (आपराधिक साजिश) और धारा 129 के आरोपों से बरी कर दिया गया। अदालत के फैसले के बाद दोषियों और उनके परिजनों के बीच भावुक माहौल देखने को मिला।
दंगों के दौरान लापता हुए थे अंकित शर्मा
यह मामला दयालपुर थाना क्षेत्र में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। अंकित शर्मा के पिता ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनका बेटा 24 फरवरी 2020 की शाम घर से किराने का सामान लेने निकला था, लेकिन वापस नहीं लौटा। बाद में उसका शव चांद बाग पुलिया के पास एक नाले से बरामद हुआ। शव को तत्काल जीटीबी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अंकित शर्मा के शरीर पर धारदार हथियार और कुंद वस्तु से लगी 51 गंभीर चोटों का उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट ने इस मामले को देश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल कर दिया था।
2020 के दिल्ली दंगों से जुड़ा था मामला
फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के समर्थन और विरोध के बीच उत्तर-पूर्वी दिल्ली में व्यापक हिंसा भड़क गई थी। इन सांप्रदायिक दंगों में कम से कम 53 लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, इसी दौरान अंकित शर्मा लोगों को शांत रहने और कानून हाथ में नहीं लेने की अपील कर रहे थे। आरोप है कि इसी दौरान उन्हें भीड़ ने पकड़ लिया, उनकी हत्या कर दी और शव को नाले में फेंक दिया।
मार्च 2023 में तय हुए थे आरोप
मार्च 2023 में ट्रायल कोर्ट ने ताहिर हुसैन सहित कई आरोपियों के खिलाफ हत्या, दंगा और अन्य गंभीर अपराधों से संबंधित आरोप तय किए थे। जांच और गवाहों के बयान के आधार पर अदालत ने सुनवाई पूरी की, जिसके बाद ताहिर हुसैन, नजीर, आसिम, जावेद और अनास को दोषी करार दिया गया। इस मामले में कुछ अन्य आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है, जबकि ताहिर हुसैन की जमानत याचिका दिल्ली हाईकोर्ट ने सितंबर 2025 में खारिज कर दी थी।
कौन हैं ताहिर हुसैन?
ताहिर हुसैन मूल रूप से उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के पौरारा गांव के निवासी हैं। उन्होंने वर्ष 2017 में आम आदमी पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर पार्षद का पद हासिल किया था। चुनावी हलफनामे में उन्होंने करोड़ों रुपये की संपत्ति घोषित की थी। वर्ष 2020 के दिल्ली दंगों में नाम सामने आने के बाद आम आदमी पार्टी ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था।
कड़कड़डूमा कोर्ट के इस फैसले के साथ दिल्ली दंगों के सबसे चर्चित मामलों में से एक में सजा का चरण पूरा हो गया है। अदालत के आदेश के बाद दोषियों को आजीवन कारावास की सजा भुगतनी होगी।