दिल्ली हिंसा: घायल पुलिसकर्मियों के परिजनों ने सुनाई आपबीती, बोले- 'खून से सनी वर्दी देखकर कांप उठे थे हम'

दिल्ली के 'संसद चलो' मार्च के दौरान घायल पुलिसकर्मियों के परिजनों ने प्रेस वार्ता में अपनी आपबीती सुनाई। परिवारों ने हिंसा की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।;

Update: 2026-07-31 06:02 GMT
नई दिल्ली।राजधानी दिल्ली में 20 जुलाई को 'संसद चलो' मार्च और 'कॉकरोच जनता पार्टी' के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में घायल पुलिसकर्मियों के परिजनों ने प्रेस वार्ता कर अपनी पीड़ा साझा की। परिवारों का कहना है कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर हुए हमले का दर्द केवल जवानों ने ही नहीं, बल्कि उनके पूरे परिवार ने भी झेला है। परिजनों ने संसद और न्याय व्यवस्था से मामले की निष्पक्ष जांच तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

'खून से सनी वर्दी और सिर पर पांच टांके देखकर टूट गया परिवार'

प्रेस वार्ता के दौरान घायल दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी की पत्नी ने बताया कि 20 जुलाई की रात उनके पति गंभीर रूप से घायल अवस्था में घर लौटे। उन्होंने कहा कि वह पल उनके परिवार के लिए बेहद दर्दनाक था। उनके अनुसार, दो साल की बेटी अपने पिता को उस हालत में देखकर सहम गई थी और पूरा परिवार गहरे सदमे में आ गया।

दिल्ली पुलिस में तैनात एक एएसआई की पत्नी सीमा ने बताया कि 20 जुलाई की शाम उन्होंने अपने पति को फोन किया तो पता चला कि वे अस्पताल में इलाज करा रहे हैं। उनके पति ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ शरारती तत्व सक्रिय हो गए थे, जिन्होंने पुलिसकर्मियों पर पत्थरों और अन्य वस्तुओं से हमला किया। इसके बाद उनका फोन बंद हो गया, जिससे परिवार की चिंता और बढ़ गई।

'बैरिकेड तोड़े गए, पुलिस पर हमला हुआ'

सीमा के अनुसार, रात करीब 11 बजे जब उनके पति घर पहुंचे तो उन्होंने बताया कि संसद की सुरक्षा के लिए लगाए गए बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की गई और पुलिस बल पर हमला किया गया। उन्होंने कहा कि ड्यूटी के दौरान मिला हेलमेट पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसे देखकर परिवार भयभीत हो गया।

उन्होंने अपील की कि संसद में उन पुलिसकर्मियों के अधिकारों और सुरक्षा पर भी चर्चा होनी चाहिए, जो अपनी जान जोखिम में डालकर कानून-व्यवस्था बनाए रखने का काम करते हैं।

'मेरे पिता अपराधी नहीं, कर्तव्य निभा रहे थे'

घायल पुलिस जवान की बेटी गुंजन ने भी अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा कि उनके पिता प्रदर्शन स्थल पर फ्रंटलाइन ड्यूटी में तैनात थे। उन्होंने बताया कि पिता अक्सर कहते थे कि प्रदर्शन में कुछ ऐसे लोग शामिल हो गए थे, जिन्होंने माहौल बिगाड़ दिया।

गुंजन ने कहा कि 20 जुलाई की रात उनके पिता के सिर पर पांच टांके लगे थे और उनकी वर्दी खून से लाल हो चुकी थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर पुलिसकर्मियों को निशाना बनाए जाने पर भी चिंता जताई और कहा कि जो लोग पुलिस पर हमला करने के आरोपी हैं, वही पुलिसकर्मियों को दोषी साबित करने की कोशिश कर रहे हैं।

परिजनों ने की निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग

दिल्ली पुलिस के एक एसीपी की पत्नी अवनीत कौर ने कहा कि लोग अक्सर यह भूल जाते हैं कि हर पुलिस अधिकारी के पीछे उसका पूरा परिवार होता है, जो उसकी सुरक्षित वापसी का इंतजार करता है। उन्होंने कहा कि किसी भी हिंसक घटना का सबसे अधिक असर पुलिसकर्मियों के परिवारों पर पड़ता है।

परिजनों का दावा है कि प्रदर्शन में शामिल सभी लोग छात्र नहीं थे और कुछ असामाजिक तत्वों ने हालात को हिंसक बना दिया। उन्होंने मांग की कि घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषियों की पहचान की जाए और कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। वहीं, मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया फिलहाल जारी है।

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