नेपाल में फिर मच सकती है तबाही, बैरियर लेक से बाढ़ का खतरा; चीन ने बचावकर्मियों को हटाया

तिब्बत-नेपाल सीमा पर बैरियर लेक के ओवरफ्लो के खतरे के बीच चीन ने रेस्क्यू ऑपरेशन रोक दिया है। बचावकर्मियों को एक किलोमीटर पीछे हटने का आदेश दिया गया है।;

Update: 2026-08-28 06:42 GMT
बीजिंग। तिब्बत-नेपाल सीमा पर आई भीषण बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान के बीच एक और खतरा पैदा हो गया है। चीन ने शुक्रवार को क्षेत्र में चलाए जा रहे रेस्क्यू ऑपरेशन को अस्थायी रूप से रोक दिया। सरकारी मीडिया के मुताबिक, भोटे कोशी नदी के एक हिस्से में बनी बैरियर लेक के ओवरफ्लो होने से दोबारा अचानक बाढ़ आने की आशंका है। खतरे को देखते हुए बचाव दलों को प्रभावित क्षेत्र से पीछे हटने के निर्देश दिए गए हैं।

बचावकर्मियों को एक किलोमीटर पीछे हटने का आदेश

चीनी सरकारी चैनल सीसीटीवी के अनुसार, अधिकारियों ने फिलहाल रेस्क्यू ऑपरेशन निलंबित कर सभी टीमों को अपनी निर्धारित जगह पर रहने और अगले निर्देशों का इंतजार करने को कहा है। जो बचावकर्मी पहले ही प्रभावित क्षेत्र में पहुंच चुके थे, उन्हें करीब एक किलोमीटर पीछे हटने का आदेश दिया गया है।

अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में बचावकर्मियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। नई बाढ़ की आशंका के कारण नदी के आसपास के इलाकों में जोखिम बढ़ गया है।

72 घंटे में फिर आ सकती है बाढ़

चीन ने गुरुवार को चेतावनी दी थी कि बुधवार को आई अचानक बाढ़ के बाद भोटे कोशी नदी के रास्ते में मलबे के कारण एक बैरियर लेक बन गई है। इसमें पानी लगातार जमा हो रहा है और झील के ओवरफ्लो होने की स्थिति में अचानक पानी नीचे की ओर आने का खतरा है।

चीनी अधिकारियों के अनुसार, अगले 72 घंटे बेहद अहम हैं। यदि बैरियर लेक का पानी अचानक बाहर निकलता है तो नेपाल के निचले इलाकों में दोबारा बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है।

बाढ़ में भारी तबाही, सैकड़ों लोगों की तलाश

दिए गए ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस आपदा में कम से कम 469 लोगों की मौत की सूचना है, जबकि 667 लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 127 नेपाली नागरिक भी शामिल हैं। तिब्बत की ओर भी बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है।

बुधवार को तिब्बत से उफनती भोटे कोशी नदी नेपाल के रसुवा जिले में दाखिल हुई थी। तेज बहाव में कई इमारतें, पुल और तटबंध क्षतिग्रस्त हो गए। नदी के किनारे बसे कई गांव और कस्बे मलबे और कीचड़ की चपेट में आ गए।

मलबे से बनी बैरियर लेक बनी नई चुनौती

बाढ़ के बाद नदी में जमा मलबे ने पानी के प्राकृतिक प्रवाह को बाधित कर दिया, जिससे बैरियर लेक बनने की स्थिति पैदा हुई। ऐसी झील तब बनती है जब भूस्खलन, चट्टानों या मलबे जैसी प्राकृतिक रुकावट नदी का रास्ता रोक देती है और उसके पीछे पानी जमा होने लगता है।

चीन के मुताबिक, गुरुवार सुबह तक इस झील में करीब 20 लाख घन मीटर पानी जमा था। अगले तीन दिनों में इसमें करीब 30 लाख घन मीटर अतिरिक्त पानी आने की आशंका जताई गई थी। स्पेस एनालिटिक्स कंपनी सुहोरा टेक्नोलॉजीज के आकलन के अनुसार, नेपाल के ऊंचाई वाले ल्हेंडे खोला क्षेत्र में बनी यह झील करीब 20.25 हेक्टेयर में फैली है।

रेस्क्यू टीमों के सामने दोहरी चुनौती

बाढ़ के तीसरे दिन भी भोटे कोशी, त्रिशूली और नारायणी नदी तंत्र के किनारे फंसे लोगों की तलाश जारी थी। हालांकि, दूसरी संभावित बाढ़ ने बचाव अभियान को बेहद जोखिम भरा बना दिया है। चीन और नेपाल के अधिकारी हालात पर नजर बनाए हुए हैं और आगे की कार्रवाई बैरियर लेक के जलस्तर तथा खतरे के आकलन के आधार पर तय की जाएगी।

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