काठमांडू/नई दिल्ली: नेपाल में बुधवार को आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी। कई इलाकों में सड़कें और पुल बह गए, घरों और वाहनों को नुकसान पहुंचा और बिजली परियोजनाओं पर भी असर पड़ा। बड़ी संख्या में लोगों की मौत की खबर है, जबकि कई लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। संचार और परिवहन व्यवस्था बाधित होने के कारण राहत एजेंसियों के सामने प्रभावित लोगों की सही संख्या का पता लगाने की चुनौती बनी हुई है। इसी बीच नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, केरल और कर्नाटक समेत कई राज्यों के पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के फंसे होने की जानकारी सामने आई है। राज्य सरकारों ने हेल्पलाइन और कंट्रोल रूम सक्रिय कर दिए हैं।
भूकंप के कुछ मिनट बाद आई बाढ़
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद को बताया कि बुधवार सुबह स्थानीय समयानुसार 8:37 बजे तिब्बत क्षेत्र में भूकंप आया था। इसके करीब तीन मिनट बाद बाढ़ की सूचना मिली। इस घटनाक्रम के आधार पर आशंका जताई जा रही है कि भूकंप के झटकों के कारण ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी हिमनद झील से अचानक पानी निकलने की स्थिति बनी हो। एक रिपोर्ट में सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण के हवाले से बताया गया है कि करीब 17 हजार फीट की ऊंचाई पर ग्लेशियर का लगभग 2,000 फीट चौड़ा हिस्सा टूटकर करीब 4,000 फीट नीचे गिरा। इसके बाद ल्हेंडे खोला नदी में अचानक भारी पानी आया, जो आगे भोटेकोशी नदी में पहुंचा और निचले इलाकों में तेज बाढ़ का कारण बना।
‘पानी की विशाल दीवार’ ने मचाई तबाही
काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, रसुवा के मुख्य सीमा शुल्क अधिकारी राजेंद्र ढुंगाना ने बाढ़ के दौरान बेहद भयावह दृश्य देखने की बात कही। उनके अनुसार, ऊपर की तरफ से धुएं जैसे गुबार के साथ पानी तेजी से बाजार की ओर बढ़ता दिखाई दिया। उन्होंने इसे करीब 100 मीटर ऊंची पानी की लहर जैसा बताया, जिसने कुछ ही समय में तिमुरे बाजार को अपनी चपेट में ले लिया। बाढ़ के तेज बहाव से रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग समेत कई जिले प्रभावित हुए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक 22 कंक्रीट पुल और पांच बेली पुल बह गए, जबकि करीब 42 किलोमीटर सड़क को नुकसान पहुंचा है। करीब एक दर्जन पनबिजली परियोजनाओं पर भी असर पड़ा है।
तीन जिलों को आपदा प्रभावित घोषित किया गया
नेपाल सरकार ने रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग को तीन महीने के लिए आपदा प्रभावित क्षेत्र घोषित किया है। इन इलाकों में राहत, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य जरूरी सुविधाओं को प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है। बाढ़ का पानी नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी ईस्ट जैसे इलाकों तक फैलने की जानकारी है। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और क्षतिग्रस्त सड़कों के कारण राहत टीमों के लिए कई स्थानों तक पहुंचना मुश्किल बना हुआ है।
महाराष्ट्र के करीब 80 पर्यटक फंसे
महाराष्ट्र सरकार के अनुसार, नेपाल में राज्य के करीब 80 पर्यटकों के फंसे होने का प्रारंभिक अनुमान है। इनमें 57 लोग एक टूर एजेंसी के माध्यम से नेपाल गए थे, जबकि अन्य लोग अलग-अलग यात्रा पर थे। अधिकारियों ने बताया कि कुछ नामों के दोहराव की जानकारी मिली है और आंकड़ों का सत्यापन किया जा रहा है। राज्य सरकार ने फंसे लोगों और उनके परिजनों की सहायता के लिए हेल्पलाइन शुरू की है। नई दिल्ली स्थित केंद्रीय गृह मंत्रालय के इमरजेंसी रिस्पॉन्स कंट्रोल रूम के साथ भी समन्वय किया जा रहा है।
केरल के 37 पर्यटक सुरक्षित
केरल के कन्नूर जिले के पय्यानूर क्षेत्र के 37 पर्यटकों के नेपाल में फंसे होने की जानकारी सामने आई है। विधायक वी. कुन्हीकृष्णन के अनुसार, सभी लोग सुरक्षित हैं, लेकिन बाढ़ के कारण उनकी यात्रा आगे नहीं बढ़ पा रही है। पर्यटकों के संपर्क नंबर और मौजूदा स्थान की जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय को दी गई है। केरल सरकार ने भी प्रभावित यात्रियों और उनके परिजनों की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं।
कोलकाता का 32 सदस्यीय कैलाश-मानसरोवर दल लापता
कोलकाता से कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर गया 32 सदस्यीय दल भी बाढ़ के बाद संपर्क से बाहर है। दल में 30 यात्री और दो टूर मैनेजर शामिल हैं। यह समूह 21 अगस्त को कोलकाता से रवाना हुआ था और अगले दिन नेपाल पहुंचा था। अधिकारियों के अनुसार, दल बुधवार सुबह करीब 8:30 बजे रसुवागढ़ी पहुंचा था। नेपाल-तिब्बत सीमा पार करने की प्रक्रिया के दौरान अचानक बाढ़ आ गई। इसके बाद दल के किसी सदस्य से संपर्क नहीं हो पाया। प्रभावित क्षेत्र में मोबाइल और अन्य संचार सेवाएं बाधित होने से तलाश अभियान में मुश्किल आ रही है।
कई राज्यों ने शुरू की हेल्पलाइन
नेपाल में फंसे भारतीयों की मदद के लिए कई राज्यों ने कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन सक्रिय की हैं। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, राजस्थान, ओडिशा और सिक्किम ने अपने नागरिकों के लिए संपर्क नंबर जारी किए हैं। नेपाल स्थित भारतीय दूतावास ने भी प्रभावित भारतीय नागरिकों के लिए +977 985 131 6807, +977 970 910 7500 और +977 981 032 6117 नंबर जारी किए हैं। ये नंबर व्हाट्सऐप पर भी उपलब्ध हैं।
भारत ने राहत सहायता बढ़ाई
नेपाल में आपदा के बीच भारत ने मानवीय सहायता अभियान भी तेज किया है। भारतीय वायुसेना के विमानों से राहत सामग्री, दवाइयां और अन्य जरूरी सामान नेपाल भेजा गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बातचीत कर हरसंभव सहायता देने का भरोसा जताया है। भारत सरकार प्रभावित भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए नेपाल के अधिकारियों और भारतीय दूतावास के साथ समन्वय कर रही है। राहत और बचाव अभियान जारी है और स्थिति स्पष्ट होने के साथ प्रभावित लोगों की संख्या और नुकसान का विस्तृत आकलन सामने आने की उम्मीद है।