जनगणना 2027 के सवालों पर क्यों भड़की कांग्रेस? जाति से लेकर धर्म और जन्मस्थान तक पर उठाए सवाल

जनगणना 2027 में जाति, धर्म और माता-पिता की जानकारी जुटाने के तरीके पर कांग्रेस ने सवाल उठाए। जयराम रमेश ने 2021 के सुप्रीम कोर्ट हलफनामे का हवाला देकर सरकार को घेरा।;

Update: 2026-08-19 06:55 GMT
नई दिल्ली। जनगणना 2027 को लेकर कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस ने जाति, धर्म, जन्मतिथि और माता-पिता से जुड़ी जानकारी जुटाने के तरीके पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार की मंशा पर गंभीर संदेह जताया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि जनगणना में जाति से संबंधित सवालों की संरचना सही तरीके से तैयार नहीं की गई है।

कांग्रेस का सबसे बड़ा सवाल जाति संबंधी जानकारी दर्ज करने के तरीके को लेकर है। पार्टी ने 2021 में सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे का हवाला देते हुए पूछा है कि जब उस समय जातियों की पहचान के लिए ड्रॉप-डाउन मेनू को उपयोगी बताया गया था, तो जनगणना 2027 में इसे शामिल क्यों नहीं किया गया।

धर्म और माता-पिता की जानकारी पर भी कांग्रेस के सवाल

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक मीडिया रिपोर्ट साझा करते हुए जनगणना के संभावित सवालों पर आपत्ति जताई। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जनगणना 2027 के दौरान माता-पिता दोनों के धर्म, जन्मतिथि और जन्मस्थान से संबंधित जानकारी जुटाई जा सकती है।

कांग्रेस ने विशेष रूप से इस बात पर सवाल उठाया है कि इतनी विस्तृत व्यक्तिगत जानकारी किस उद्देश्य से दर्ज की जाएगी और इसे किस स्तर तक संकलित किया जाएगा। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि जानकारी गांव के स्तर तक दर्ज किए जाने की व्यवस्था होगी।

जाति के लिए खुला विकल्प, कांग्रेस ने उठाई आपत्ति

रिपोर्ट के मुताबिक, जनगणना के फॉर्म में जाति बताने के लिए खुला विकल्प रखा गया है। इसके अलावा व्यक्ति के पास “जाति नहीं बताना चाहते” और “कोई जाति नहीं” जैसे विकल्प भी उपलब्ध होने की बात कही गई है।

जयराम रमेश ने इसी व्यवस्था को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि जाति संबंधी सवाल पूछने का तरीका गलत है। उन्होंने यह भी कहा कि जनगणना की प्रक्रिया गोपनीय होती है, इसलिए सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इतनी विस्तृत जानकारी जुटाने के पीछे उद्देश्य क्या है।

2021 के हलफनामे का हवाला देकर सरकार को घेरा

कांग्रेस ने अपने आरोपों को मजबूत करने के लिए 21 सितंबर 2021 को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल केंद्र के हलफनामे का हवाला दिया है। जयराम रमेश के मुताबिक, हलफनामे में जातियों का रजिस्टर तैयार करने के लिए ड्रॉप-डाउन मेनू की उपयोगिता का उल्लेख किया गया था।

कांग्रेस का तर्क है कि ऐसा विकल्प जातियों से जुड़ा अधिक व्यवस्थित और तुलनीय डेटा तैयार करने में मदद कर सकता था। पार्टी अब सवाल उठा रही है कि सरकार ने उस समय जिस व्यवस्था को उपयोगी बताया था, उसे जनगणना 2027 में क्यों नहीं अपनाया।

जाति जनगणना पर पहले भी आमने-सामने आ चुके हैं कांग्रेस और सरकार

जाति जनगणना का मुद्दा पिछले कुछ समय से कांग्रेस और केंद्र के बीच राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बना हुआ है। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार जाति आधारित आंकड़े जुटाने को लेकर स्पष्ट नीति नहीं अपना रही है। पार्टी का दावा है कि जाति जनगणना की घोषणा के बावजूद उसकी प्रक्रिया में ऐसे सवाल और विकल्प शामिल किए जा रहे हैं, जिनसे आंकड़ों की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।

वहीं, जनगणना की वास्तविक प्रश्नावली और उसके अंतिम स्वरूप को लेकर आधिकारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट होगी। फिलहाल कांग्रेस के सवालों ने Census 2027, caste census और data collection को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।

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