खरगे की टिप्पणी के खिलाफ दिल्ली में भाजपा का प्रदर्शन, हर्ष मल्होत्रा समेत कई नेता हिरासत में
मल्लिकार्जुन खरगे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कथित टिप्पणी के विरोध में दिल्ली भाजपा ने प्रदर्शन किया। हर्ष मल्होत्रा समेत कई नेताओं को हिरासत में लेकर मंदिर मार्ग थाने ले जाया गया।;
नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कथित टिप्पणी को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। इस बयान के विरोध में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की दिल्ली इकाई ने राजधानी में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा समेत कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए गए नेताओं को मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन ले जाया गया।
सेना भवन सर्किल के पास भाजपा का प्रदर्शन
दिल्ली भाजपा ने सेना भवन सर्किल और राजा जी मार्ग के आसपास खरगे की टिप्पणी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन आयोजित किया। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ प्रदर्शन का नेतृत्व किया।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कार्रवाई करते हुए हर्ष मल्होत्रा को हिरासत में लिया। उनके साथ दिल्ली भाजपा के उपाध्यक्ष राजेश भाटिया और महासचिव मोहन लाल गिहारा को भी हिरासत में लिया गया। इसके अलावा कई अन्य नेताओं को भी पुलिस अपने साथ ले गई।
भाजपा नेताओं की हिरासत के बाद यह मामला राजनीतिक रूप से और गरमा गया। पार्टी ने खरगे की टिप्पणी को लेकर आपत्ति जताई है और नेताओं की सार्वजनिक भाषा में मर्यादा बनाए रखने की मांग की है।
पटना के कार्यक्रम में दिए गए बयान से शुरू हुआ विवाद
विवाद की शुरुआत बिहार के पहले मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह की जयंती पर पटना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान हुई। कार्यक्रम में भाषण देते समय मल्लिकार्जुन खरगे के सामने कथित तौर पर एक व्यक्ति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहीं नहीं जाने वाले हैं।
इसके जवाब में खरगे ने कहा, ‘मोदी के बाप भी चले जाएंगे।’ इस टिप्पणी को भाजपा ने प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता के प्रति अपमानजनक बताया। इसके बाद पार्टी नेताओं ने बयान की आलोचना शुरू कर दी और विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया।
देशभर में विरोध प्रदर्शन
भाजपा ने खरगे की टिप्पणी के खिलाफ देशभर में पार्टी कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन करने का फैसला किया है। पार्टी की राज्य इकाइयों से शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने को कहा गया है।
भाजपा नेताओं का कहना है कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद सार्वजनिक मंचों पर भाषा की मर्यादा बनाए रखना जरूरी है। वहीं, इस विवाद ने भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी को एक बार फिर तेज कर दिया है।