अरविंद केजरीवाल की याचिका पर CBI को नोटिस, दिल्ली हाईकोर्ट में 13 अप्रैल को सुनवाई

दिल्ली हाईकोर्ट में कथित शराब घोटाले की सुनवाई के दौरान अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वह अपना पक्ष खुद रखेंगे। मामले की अगली सुनवाई 13 अप्रैल को होगी।

Update: 2026-04-06 10:24 GMT

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने अदालत में अपना पक्ष खुद रखने की बात कही है। उन्होंने केंद्रीय जांच ब्यूरो की एक याचिका पर सुनवाई कर रहे जज को बदलने की मांग की है। मामले की सुनवाई 13 अप्रैल को होगी। इस संबंध में केजरीवाल ने अदालत में एक नई याचिका दाखिल की।

केजरीवाल की इस याचिका पर अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस जज बदले जाने की मांग से संबंधित है। केजरीवाल ने अदालत में स्पष्ट किया है कि वह अपने मामले की पैरवी स्वयं करेंगे। उन्होंने केंद्रीय जांच ब्यूरो की मूल याचिका पर हो रही सुनवाई के दौरान जज को बदलने की मांग की है।

केजरीवाल का मानना है कि जज का बदला जाना न्याय प्रक्रिया के लिए आवश्यक है। उन्होंने अपनी याचिका में इस बदलाव के पीछे के कारणों का भी उल्लेख किया है। अदालत ने इस संवेदनशील मुद्दे पर केंद्रीय जांच ब्यूरो से जवाब मांगा है। यह घटनाक्रम मामले की न्यायिक कार्यवाही में एक महत्वपूर्ण मोड़ लेकर आया है।

न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा से खुद को अलग करने का आग्रह

केजरीवाल की याचिका पर सोमवार को सुनवाई में जोरदार दलीलें रखी गईं। मामले में अरविंद केजरीवाल ने खुद दलीलें रखनी शुरू की। केजरीवाल ने कहा कि उन्होंने रिक्यूजल याचिका दाखिल की है। इसे रिकॉर्ड में लिया जाए। याचिका में न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा से आग्रह किया गया है कि वह मामले में उन्हें बरी किए जाने के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लें।

सॉलिसिटर जनरल ने केजरीवाल की अपील का विरोध किया

इस पर सीबीआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केजरीवाल की अपील का विरोध किया। उन्होंने कहा कि केजरीवाल के आरोप बेबुनियाद और अपमानजनक हैं। केजरीवाल के आरोप बेबुनियाद और कोर्ट की अवमानना ​​करने वाले हैं। अदालत कोई नौटंकी का मंच नहीं है। यदि अरविंद केजरीवाल खुद रूप से पेश होकर बहस करना चाहते हैं तो उनको अपने वकील को हटा देना चाहिए।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को यह भी बताया कि बरी किए गए 7 अन्य आरोपियों ने भी जज को सुनवाई से हटाने की याचिका दी है। वहीं जस्टिस शर्मा ने कहा कि यदि कोई और भी ऐसी अर्जी देना चाहता है तो दे सकता है ताकि मैं सभी अर्जियों पर एक ही बार में कोई फैसला ले सकूं।

क्या है मामला

यह मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो की उस अपील से संबंधित था। अपील में ट्रायल कोर्ट द्वारा केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत अन्य आरोपियों को दी गई राहत को चुनौती दी गई थी। इससे पहले, केजरीवाल ने मुख्य न्यायाधीश डी.के उपाध्याय के समक्ष मामले को किसी अन्य न्यायाधीश को स्थानांतरित करने की मांग की थी।

इस मांग को यह कहते हुए खारिज कर दिया गया था कि मामले से हटने का निर्णय संबंधित न्यायाधीश को ही लेना होता है। ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में सभी आरोपियों को बरी करते हुए जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। इसके बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

पिछले महीने हुई सुनवाई में न्यायमूर्ति शर्मा ने ट्रायल कोर्ट के कुछ निष्कर्षों पर पुनर्विचार की आवश्यकता जताई थी। उन्होंने जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश पर भी रोक लगा दी थी। यह मामला कथित आबकारी नीति घोटाले से जुड़ा है। केजरीवाल और अन्य पर इस मामले में अनियमितताओं का आरोप है।

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