अनंत सिंह को फिर जाना होगा जेल, सुप्रीम कोर्ट ने 1 दिसंबर तक सरेंडर करने का दिया आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने मोकामा विधायक अनंत सिंह को दुलारचंद यादव हत्याकांड में 1 दिसंबर तक सरेंडर कर जेल जाने का आदेश दिया। बिहार सरकार को चार महीने में जांच पूरी करने का निर्देश।;

Update: 2026-10-30 06:05 GMT

नई दिल्ली।बिहार के मोकामा से विधायक और बाहुबली नेता अनंत सिंह की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने दुलारचंद यादव हत्याकांड में मिली जमानत के मामले में उन्हें 1 दिसंबर तक आत्मसमर्पण कर दोबारा जेल जाने का आदेश दिया है। हालांकि, परिवार में शादी समारोह होने की दलील पर अदालत ने उन्हें कुछ दिनों की मोहलत दी है। साथ ही बिहार सरकार को मामले की जांच चार महीने के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया गया है।

बेटी की शादी के लिए मांगी मोहलत, कोर्ट ने दी समय सीमा

सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की पीठ के सामने मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान अनंत सिंह के वकील ने अदालत को बताया कि उनके परिवार में 25 नवंबर को शादी समारोह आयोजित होना है। इसलिए उन्हें कुछ समय दिया जाए।

इस दलील पर अदालत ने अनंत सिंह को 1 दिसंबर तक आत्मसमर्पण करने और जेल लौटने का निर्देश दिया। इस आदेश के बाद उनकी जमानत पर रिहाई फिलहाल समाप्त होने की स्थिति बन गई है।

दुलारचंद यादव के पोते ने सुप्रीम कोर्ट में दी थी चुनौती

दरअसल, दुलारचंद यादव हत्याकांड में पटना हाईकोर्ट ने 19 मार्च को अनंत सिंह को जमानत दी थी। इस फैसले को दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। उन्होंने अपनी याचिका में कहा कि हाईकोर्ट ने अनंत सिंह के आपराधिक इतिहास को पर्याप्त महत्व दिए बिना जमानत दे दी।

याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की थी कि अनंत सिंह की जमानत रद्द की जाए और उन्हें दोबारा जेल भेजा जाए। इसी मामले में अब सुप्रीम कोर्ट ने आत्मसमर्पण का आदेश दिया है।

बिहार सरकार ने हलफनामे में बताई 62 मुकदमों की जानकारी

सुनवाई के दौरान बिहार सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में अनंत सिंह के आपराधिक इतिहास का उल्लेख किया गया है। सरकार के मुताबिक, उनके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण और आर्म्स एक्ट जैसी गंभीर धाराओं में कुल 62 मुकदमे दर्ज हैं।

सरकार ने उनके आपराधिक रिकॉर्ड को गंभीर बताते हुए अदालत के सामने अपना पक्ष रखा है। राज्य सरकार ने 24 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में अपना हलफनामा दाखिल किया था।

इससे पहले 29 सितंबर को हुई सुनवाई में अदालत ने स्पष्ट किया था कि 30 अक्टूबर की अगली तारीख पर सुनवाई टाली नहीं जाएगी। अब कोर्ट ने बिहार सरकार को चार महीने में जांच पूरी करने का निर्देश दिया है। इसके बाद मामले में आगे की सुनवाई होगी।

जेडीयू से निष्कासन के बाद भी बढ़ी अनंत सिंह की मुश्किलें

अनंत सिंह की राजनीतिक मुश्किलें भी हाल के दिनों में बढ़ी हैं। उन्होंने विधान परिषद चुनाव में जेडीयू उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ प्रचार करते हुए जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी अनुज सिंह का समर्थन किया था।

इसके बाद 24 अक्टूबर को जेडीयू ने अनंत सिंह और उनकी पत्नी पूर्व विधायक नीलम देवी को पार्टी से निष्कासित कर दिया। अगले दिन राज्य सरकार ने नीलम देवी को राज्यस्तरीय 20 सूत्री कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति से भी हटा दिया।

सरकारी बंगला खाली करने के लिए भी एक महीने का समय दिया गया है। अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश ने अनंत सिंह की कानूनी और राजनीतिक मुश्किलों को और बढ़ा दिया है।

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