'देश में कहीं भी बाबरी मस्जिद न बने', याचिका पर आ गया सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर हुई थी। इस याचिका में याचिकाकर्ता ने यह मांग की थी कि बाबर या बाबरी मस्जिद के नाम से देशभर में किसी मस्जिद के निर्माण पर रोक लगाई जानी चाहिए।
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को एक जनहित याचिका दाखिल की गई, जिसके जरिए मस्जिद के बाबरी नाम पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी। शीर्ष न्यायालय ने याचिका को खारिज कर दिया है। याचिका ऐसे समय में दाखिल की गई है, जब पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में बाबरी के नाम पर मस्जिद का निर्माण हो रहा है।
याचिका में बाबर को आक्रमणकारी बताया गया था।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता ने सुनवाई से इनकार कर दिया है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओ से पेश हुए वकील ने कहा कि बाबर के नाम पर किसी भी मस्जिद का निर्माण या नामकरण नहीं होना चाहिए, क्योंकि वह एक 'आक्रमणकारी' था।
अदालत में यह भी कहा गया कि बाबर ने हिंदुओं को 'गुलाम' कहकर संबोधित किया था, इसलिए इस तरह की गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
हुमायूं कबीर करा रहे निर्माण
तृणमूल कांग्रेस के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद बनवाने का ऐलान किया है। इसे लेकर राजनीतिक विवाद उठा और बयानबाजी हो रही है। मस्जिद का निर्माण शुरू हो चुका है। 11 फरवरी को कबीर ने घोषणा की थी कि बेलडांगा के रेजिनगर में इस मस्जिद का निर्माण दो साल के भीतर पूरा हो जाएगा और इसकी लागत लगभग 50-55 करोड़ रुपये आएगी।यह मस्जिद 11 एकड़ जमीन पर बनाई जा रही है और इसमें लगभग 12,000 लोगों के नमाज अदा करने की क्षमता होगी।
कबीर ने कहा कि कई पक्षों के विरोध के बावजूद मस्जिद का निर्माण कार्य निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार चल रहा है। कबीर ने पिछले साल छह दिसंबर को अयोध्या की बाबरी मस्जिद की तर्ज पर एक मस्जिद की नींव रखी थी।
अयोध्या में विवादित बाबरी ढांचे को छह दिसंबर 1992 को कार सेवकों ने ढहा दिया था। उच्चतम न्यायालय ने नौ नवंबर 2019 को इस मामले में निर्णय देते हुए विवादित स्थल पर राम मंदिर बनवाने और मुसलमानों को मस्जिद बनाने के लिये अयोध्या में किसी प्रमुख स्थान पर पांच एकड़ जमीन देने का आदेश दिया था।