वैलेंटाइन्स डे पर शाहिद कपूर का नजरिया: “मुहब्बत में इज्जत और स्वीकारना सबसे जरूरी”
शाहिद कपूर ने कहा कि मुहब्बत में सबसे महत्वपूर्ण है अपने साथी को सम्मान देना और उसे उसी रूप में स्वीकार करना जैसा वह है। उनके मुताबिक, “आप अपने पार्टनर को यह महसूस कराएं कि आप उनकी भावनाओं का सम्मान करते हैं।
मुंबई: अभिनेता शाहिद कपूर और मीरा राजपूत की शादी को दस साल पूरे हो चुके हैं। फिल्मी दुनिया की इस चर्चित जोड़ी ने समय के साथ अपने रिश्ते को मजबूत बनाया है। वैलेंटाइन्स डे के मौके पर शाहिद कपूर ने प्यार, रिश्तों और पार्टनरशिप को लेकर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि उनके लिए प्यार की परिभाषा वर्षों में बदली नहीं है, लेकिन उसे समझने की गहराई जरूर बढ़ी है। शाहिद का मानना है कि सच्चे रिश्ते की नींव दो अहम स्तंभों पर टिकती है- सम्मान और स्वीकार्यता।
“प्यार में इज्जत और स्वीकारना जरूरी”
शाहिद कपूर ने कहा कि मुहब्बत में सबसे महत्वपूर्ण है अपने साथी को सम्मान देना और उसे उसी रूप में स्वीकार करना जैसा वह है।
उनके मुताबिक, “आप अपने पार्टनर को यह महसूस कराएं कि आप उनकी भावनाओं का सम्मान करते हैं। चाहे आप उनसे अलग सोच रखते हों, फिर भी उनके वजूद की इज्जत करें। किसी को बदलने की कोशिश करना प्यार नहीं है।”
शाहिद ने यह भी जोड़ा कि सच्चा प्यार वह है जिसमें व्यक्ति खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करता है। “अगर आप सच में किसी से मोहब्बत करते हैं, तो आप खुद को बदलने के लिए तैयार रहते हैं। दूसरे को बदलना आसान है, लेकिन खुद को बदलना असली चुनौती है,” उन्होंने कहा।
दस साल का अनुभव, बदली सोच
शाहिद और मीरा की शादी को एक दशक हो चुका है। इस दौरान दोनों ने जीवन के कई उतार-चढ़ाव साथ देखे हैं। शाहिद मानते हैं कि युवावस्था में रिश्तों को लेकर उनकी समझ उतनी परिपक्व नहीं थी।
उन्होंने स्वीकार किया, “शायद ये बातें मुझे अपनी जवानी में इतनी गहराई से समझ नहीं आई थीं। लेकिन अब जब शादी को दस साल हो गए हैं, तो समझ में आता है कि स्वीकारना और सम्मान देना सबसे अहम है।”
उनके अनुसार, जब दो लोग एक-दूसरे को स्वीकार करते हैं और सम्मान देते हैं, तभी उनके बीच असली पार्टनरशिप बनती है। यही पार्टनरशिप आगे चलकर रिश्ते को मजबूती देती है और उसे वैसा रूप देती है, जैसा दोनों मिलकर बनाना चाहते हैं।
पार्टनरशिप से बनता है मजबूत रिश्ता
शाहिद का कहना है कि विवाह या किसी भी लंबे रिश्ते में ‘पार्टनरशिप’ का भाव बहुत जरूरी है। यह सिर्फ रोमांस तक सीमित नहीं होता, बल्कि जीवन के हर पहलू में साथ निभाने का वादा होता है।
उन्होंने कहा, “जब आप एक-दूसरे को स्वीकार करते हैं, तो आपके बीच एक बंधन बनता है। फिर आप दोनों मिलकर अपने रिश्ते को उस दिशा में ले जा सकते हैं, जहां आप जाना चाहते हैं।”
शाहिद और मीरा अक्सर सार्वजनिक मंचों पर अपने रिश्ते को लेकर खुलकर बात करते रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी दोनों की तस्वीरें और पोस्ट उनके आपसी समझ और सहजता को दर्शाती हैं।
प्यार जताने का हर किसी का अलग तरीका
प्यार जाहिर करने के तरीकों पर बात करते हुए शाहिद ने कहा कि हर व्यक्ति का अपना तरीका होता है। कुछ लोग शब्दों में अपने जज्बात बयां करते हैं, तो कुछ अपने व्यवहार और कर्मों से।
उन्होंने कहा, “ऐसे कई लोग होते हैं, जिन्हें बहुत अच्छे से बात करना नहीं आता, लेकिन जिस तरह वे प्यार दिखाते हैं, वह शायद कोई बहुत अच्छा बोलने वाला इंसान भी नहीं दिखा पाए।”
शाहिद के मुताबिक, प्यार सिर्फ बड़े-बड़े शब्दों या रोमांटिक इशारों तक सीमित नहीं होता। कभी-कभी छोटी-छोटी बातों में भी गहरा स्नेह छिपा होता है—जैसे किसी का ख्याल रखना, मुश्किल वक्त में साथ खड़ा रहना या बिना कहे समझ जाना।
बदलती प्राथमिकताएं और रिश्ते की परिपक्वता
शादी के दस साल बाद शाहिद का नजरिया यह भी बताता है कि समय के साथ रिश्तों की प्राथमिकताएं बदलती हैं। शुरुआती दौर में जहां रोमांस और आकर्षण प्रमुख होते हैं, वहीं आगे चलकर समझ, धैर्य और सहयोग ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
उन्होंने संकेत दिया कि रिश्ते को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए दोनों पक्षों को मेहनत करनी पड़ती है। सिर्फ भावनाएं ही नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और प्रतिबद्धता भी उतनी ही जरूरी होती है।
शाहिद-मीरा: एक संतुलित जोड़ी
शाहिद कपूर और मीरा राजपूत की जोड़ी को अक्सर संतुलित और स्थिर रिश्ते के उदाहरण के रूप में देखा जाता है। मीरा भले ही फिल्मी दुनिया से दूर हों, लेकिन सार्वजनिक मंचों पर उनकी मौजूदगी और विचारों ने उन्हें अलग पहचान दिलाई है।
दोनों ने अपने निजी जीवन को संतुलन के साथ आगे बढ़ाया है। शाहिद जहां फिल्मों और पेशेवर जीवन में व्यस्त रहते हैं, वहीं मीरा परिवार और अन्य गतिविधियों में सक्रिय रहती हैं।
वैलेंटाइन्स डे पर संदेश
वैलेंटाइन्स डे के मौके पर शाहिद का संदेश यही है कि प्यार को केवल उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में अपनाने की जरूरत है।
उनका मानना है कि अगर रिश्ते में सम्मान और स्वीकार्यता हो, तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती। प्यार में बदलाव जरूरी है, लेकिन वह बदलाव खुद के भीतर होना चाहिए, न कि सामने वाले को बदलने की जिद।