अनुराग कश्यप के साथ काम करने पर बोले राहुल भट्ट, 'उनसे असहमत होना नामुमकिन है'

अनुराग कश्यप की बहुप्रतीक्षित डार्क नॉयर थ्रिलर फिल्म 'केनेडी' में मुख्य भूमिका में राहुल भट्ट हैं, जो एक पूर्व पुलिस अधिकारी का किरदार निभा रहे हैं। कहानी में इस अधिकारी को मृत मान लिया जाता है, लेकिन वह कॉन्ट्रैक्ट किलर बनकर वापस आता है और सिस्टम के खिलाफ लड़ाई लड़ता है।

Update: 2026-02-11 19:16 GMT

मुंबई। अनुराग कश्यप की बहुप्रतीक्षित डार्क नॉयर थ्रिलर फिल्म 'केनेडी' में मुख्य भूमिका में राहुल भट्ट हैं, जो एक पूर्व पुलिस अधिकारी का किरदार निभा रहे हैं। कहानी में इस अधिकारी को मृत मान लिया जाता है, लेकिन वह कॉन्ट्रैक्ट किलर बनकर वापस आता है और सिस्टम के खिलाफ लड़ाई लड़ता है।

राहुल भट्टे ने आईएएनएस से फिल्म को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने अनुराग कश्यप के साथ काम करने का अनुभव शेयर किया। उन्होंने बताया कि उनके किरदार ज्यादातर चुप्पी और कम शब्दों से अपनी बात रखते हैं।

आईएएनएस ने उनसे सवाल पूछा, "क्या खुलकर बोलने की बजाय चुप रहकर और रोक-टोक के साथ एक्टिंग करना ज्यादा मुश्किल था?" इस सवाल का जवाब देते हुए राहुल ने कहा, "मैंने फिल्म में शूटिंग से पहले कई वर्कशॉप ली थीं। अनुराग ने मुझे कहानियां और रिसर्च मटेरियल शेयर किए थे। सेट पर मैं पूरी तरह निर्देशक के भरोसे था।"

राहुल ने बताया कि अनुराग सेट के साथ काम करना काफी अच्छा होता है। वे आपको हर चीज की सही गाइडेंस देते हैं। फिर चाहे डायलॉग हो या चुप्पी। उनके साथ काम करना बहुत शानदार अनुभव था।

राहुल ने अनुराग की क्रिएटिव चॉइस पर असहमति पर कहा कि उनसे असहमत होना लगभग नामुमकिन है। राहुल ने कहा, "अनुराग एक्टर्स को ज्यादा निर्देश नहीं देते। वे सेट पर कम बोलते हैं और एक्टर्स को एक्सप्लोर करने की पूरी आजादी देते हैं। वे ऐसा माहौल बनाते हैं, जहां परफॉर्मेंस खुद-ब-खुद बाहर निकल कर आती है। अगर कोई थोड़ा भटक जाए तो वे धीरे से वापस लाइन पर ला देते हैं। यही उनका डायरेक्शन का सबसे अच्छा तरीका है।"

आईएनएस ने सवाल पूछा, "क्या आप कैरेक्ट से कोई आदत या इमोशन असल जिंदगी में ले आए?, इस सवाल का जवाब देते हुए राहुल ने कहा, "कुछ समय तक मैंने चार्ली की हंसी अपने साथ रखी। इसे परफॉर्म करने में मुझे बहुत मजा आया। अब मेरी हंसी फीकी पड़ गई है, लेकिन कुछ दिनों तक मेरे साथ रही।

अनुराग कश्यप की फिल्मों को लेकर अक्सर लोग उन्हें असलियत और क्रूरता से जोड़ते हैं। इस पर राहुल का नजरिया अलग है। उन्होंने कहा कि अनुराग की फिल्में सिर्फ ऊपरी क्रूरता या हिंसा के बारे में नहीं होतीं। उनका सिनेमा सच्चाई दिखाता है। जो हिंसा दिखती है, वह समाज और इंसान के अंदर पहले से मौजूद होती है।

उन्होंने कहा, "उनकी फिल्मों में हिंसा ज्यादातर स्क्रीन पर सीधे नहीं दिखाई जाती। ज्यादातर हिस्सा दर्शक के दिमाग में बनता है। यही उनकी कहानी कहने की खासियत है। वे असली घटनाओं और असली किरदार दिखाते हैं, जिससे समाज को आईना दिखता है। उनकी फिल्मों में गुस्सा होता है, लेकिन वह गुस्सा हम सबका होता है। उनका सिनेमा बताता है कि समाज असल में कैसा है।"

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