सारा अली खान ने शो में सुनाया एक्ट्रेस बनने का सफर

मुंबई, एक्ट्रेस सारा अली खान ने बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाने के लिए काफी मेहनत की है।;

By :  IANS
Update: 2026-10-14 08:34 GMT

मुंबई, एक्ट्रेस सारा अली खान ने बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाने के लिए काफी मेहनत की है। एक समय ऐसा था, जब उनका वजन करीब 100 किलो हुआ करता था। उस वक्त सारा कोलंबिया यूनिवर्सिटी में हिस्ट्री की पढ़ाई कर रही थीं और आगे लॉ की डिग्री लेने का प्लान बना रही थीं। यूनिवर्सिटी में थिएटर कोर्स के दौरान उनके अंदर एक्टिंग को लेकर पुराना जुनून फिर जाग उठा। इसके बाद उन्होंने एक्ट्रेस बनने के लिए मेहनत करने का फैसला किया। सारा ने हाल ही में एक बातचीत के दौरान अपने इसी सफर के बारे में बताया।

सारा अली खान ने यह बात अनिल कपूर के शो 'इंडिया के टॉप 1 पर्सेंट' में बातचीत के दौरान बताई। शो में अनिल ने उनसे पूछा कि उन्होंने एक्ट्रेस बनने का फैसला कब किया था। इस सवाल के जवाब में सारा ने कहा, ''मैं बचपन से ही एक्ट्रेस बनना चाहती थी। लेकिन मुझे पढ़ाई करना भी बहुत पसंद था। मैं कोलंबिया यूनिवर्सिटी गई थी, जहां हिस्ट्री की पढ़ाई की। मैंने सोचा था कि वहीं से लॉ की डिग्री भी ले लूंगी।''

सारा ने कहा, ''यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान मैंने थिएटर का कोर्स किया था। इस कोर्स ने मुझे एक्टिंग के करीब आने का मौका दिया। जब मैं स्टेज पर पहुंचीं और परफॉर्म किया, तो मुझे महसूस हुआ कि एक्ट्रेस बनने का मेरा बचपन का सपना अब भी मेरे अंदर मौजूद है। यही वह समय था, जब मैंने इस दिशा में आगे बढ़ने के बारे में सोचा और खुद से कहा कि कम से कम एक कोशिश तो करनी ही चाहिए। इस तरह यह सब शुरू हुआ। उस समय मेरा वजन करीब 100 किलो था।''

शो में एक्टर आयुष्मान खुराना भी शामिल हुए। वह अपनी आने वाली फिल्म 'उड़ता तीर' के प्रमोशन के लिए पहुंचे थे। बातचीत के दौरान अनिल कपूर ने उनसे भी पूछा कि उन्होंने एक्टर बनने का फैसला कब किया था। इस पर आयुष्मान ने मजाकिया अंदाज में कहा, ''जब मैंने आपको देखा, तभी मुझे एक्टिंग से प्यार हो गया।''

इसके बाद अनिल कपूर ने आयुष्मान से पूछा कि उन्हें सबसे ज्यादा प्रोत्साहन किससे मिला। अभिनेता ने इसका श्रेय अपने पिता को दिया। उन्होंने कहा, ''मेरे पिता मुझे बहुत प्रोत्साहित करते थे। बचपन से ही उन्होंने मेरा हौसला बढ़ाया। मैं मिलेनियल हूं और हमारे समय में लोग फिल्म इंडस्ट्री में आने की कोशिश भी नहीं करते थे। खासकर तब, जब आप छोटे शहर के किसी पारंपरिक परिवार से आते हों।''

उन्होंने आगे कहा, "मैं अपने स्कूल के उन गिने-चुने बच्चों में से था, जिनके माता-पिता आर्ट्स और परफॉर्मिंग आर्ट्स में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते थे। मेरी दादी अपने समय में गुरुद्वारे में गाया करती थीं और मिमिक्री भी करती थीं। मुझे कला का हुनर अपनी दादी से मिला, जबकि इसे करियर बनाने का हौसला मेरे पिता ने दिया।"

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