‘धुराक्सिक’ पर राम गोपाल वर्मा की टिप्पणी, धुरंधर 2 बनाम टॉक्सिक टकराव पर छिड़ी नई बहस

फिल्मकार राम गोपाल वर्मा ने भी इस विषय पर खुलकर अपनी राय रखी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर किए गए एक विस्तृत पोस्ट में वर्मा ने इस बॉक्स ऑफिस टकराव को भारतीय सिनेमा में “पहले कभी न देखे गए अनुभव” की तरह बताया।

Update: 2026-02-23 08:40 GMT

मुंबई। 19 मार्च को बॉक्स ऑफिस पर दो बहुप्रतीक्षित फिल्मों आदित्य धर निर्देशित धुरंधर : द रिवेंज और केजीएफ फेम यश अभिनीत टाक्सिक का आमना-सामना होने जा रहा है। इस बड़े टकराव को लेकर सिनेमा जगत में पहले से ही चर्चाओं का दौर जारी है। अब फिल्मकार राम गोपाल वर्मा ने भी इस विषय पर खुलकर अपनी राय रखी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर किए गए एक विस्तृत पोस्ट में वर्मा ने इस बॉक्स ऑफिस टकराव को भारतीय सिनेमा में “पहले कभी न देखे गए अनुभव” की तरह बताया। उन्होंने इसे ‘धुराक्सिक’ नाम देते हुए दोनों फिल्मों के बीच नौ अलग-अलग बिंदुओं के जरिए तुलना प्रस्तुत की।

‘यह उत्तर बनाम दक्षिण की लड़ाई नहीं’

राम गोपाल वर्मा ने अपने पोस्ट की शुरुआत इस स्पष्ट टिप्पणी से की कि यह टकराव किसी क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा का प्रतिनिधित्व नहीं करता। उन्होंने लिखा, “मुझे पक्का यकीन है कि धुराक्सिक उत्तर बनाम दक्षिण या बॉलीवुड बनाम सैंडलवुड की लड़ाई नहीं है।” उनके अनुसार, यह दो अलग-अलग सिनेमाई सोच और दृष्टिकोण का टकराव है। वर्मा ने इसे “दो संस्कृतियों के बीच क्षेत्रीय नहीं, बल्कि सिनेमा का एक जबरदस्त टकराव” बताया। हाल के वर्षों में हिंदी और दक्षिण भारतीय फिल्मों के बीच तुलना और प्रतिस्पर्धा को लेकर जो विमर्श चलता रहा है, वर्मा का बयान उस बहस को एक अलग दिशा देता है।


दर्शकों की बुद्धिमत्ता पर टिप्पणी

अपने पोस्ट में वर्मा ने दोनों फिल्मों के लक्षित दर्शकों को लेकर भी स्पष्ट राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि धुरंधर : द रिवेंज दर्शकों की बुद्धिमत्ता का सम्मान करती है, जबकि टाक्सिक “नासमझी का जश्न मनाती है।” उन्होंने आगे लिखा कि केजीएफ 2 जैसी फिल्में मुख्य रूप से ऐसे आम दर्शकों को लक्ष्य बनाती हैं जो ज्यादा सोच-विचार नहीं करना चाहते, जबकि धुरंधर जैसी फिल्में “समझदार आम दर्शकों” को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं। वर्मा के इस कथन ने सोशल मीडिया पर नई बहस को जन्म दे दिया है, क्योंकि यह टिप्पणी सीधे तौर पर दर्शकों की पसंद और सिनेमा की शैली पर सवाल खड़ा करती है।

‘वैश्विक अपील’ बनाम ‘मास एंटरटेनमेंट’

राम गोपाल वर्मा ने अपने पोस्ट में यह भी कहा कि धुरंधर का दृष्टिकोण उसे वैश्विक स्तर पर प्रासंगिक बनाता है। उनके अनुसार, जब कोई फिल्म दर्शकों की बौद्धिक भागीदारी को महत्व देती है, तो उसका प्रभाव व्यापक हो सकता है। वहीं उन्होंने टाक्सिक को एक बड़े पैमाने पर बनाई गई ‘मास एंटरटेनमेंट’ फिल्म के रूप में चित्रित किया, जो भव्यता और शैली पर अधिक निर्भर है। हालांकि, वर्मा ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनकी टिप्पणियां फिल्म के ट्रेलर, विषयवस्तु या निर्देशक-कलाकार की पूर्ववर्ती फिल्मों के आधार पर हैं।

बजट और संसाधनों के उपयोग पर भी टिप्पणी

वर्मा ने दोनों फिल्मों के निर्माण दृष्टिकोण पर भी सवाल उठाए। उन्होंने लिखा कि टाक्सिक में “पैसे को पानी की तरह बहाया गया है,” जबकि धुरंधर 2 को “पैसे का सही प्रयोग” बताते हुए संतुलित निर्माण का उदाहरण कहा। फिल्म उद्योग में अक्सर बड़े बजट और नियंत्रित बजट की फिल्मों के बीच तुलना की जाती रही है। वर्मा की यह टिप्पणी उसी बहस को आगे बढ़ाती है कि क्या ज्यादा खर्च का मतलब बेहतर सिनेमा होता है या विचार और पटकथा अधिक महत्वपूर्ण हैं।

‘व्यक्तिगत पसंद नहीं, सिनेमा पर दृष्टिकोण’

राम गोपाल वर्मा ने अपने पोस्ट में यह भी स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी किसी व्यक्तिगत रिश्ते या पक्षपात से प्रेरित नहीं है। उन्होंने लिखा कि यह लेख उन्होंने आदित्य धर के प्रति किसी विशेष प्रेम के कारण नहीं लिखा है, बल्कि सिनेमा के प्रति अपने दृष्टिकोण के आधार पर राय रखी है। वर्मा के इस स्पष्टीकरण को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सोशल मीडिया पर अक्सर फिल्मकारों के बीच संबंधों को लेकर अटकलें लगाई जाती हैं।

बॉक्स ऑफिस पर संभावित असर

दोनों फिल्में 19 मार्च को ईद के अवसर पर रिलीज हो रही हैं। त्योहार के मौके पर रिलीज को आमतौर पर लाभकारी माना जाता है, लेकिन एक ही दिन दो बड़ी फिल्मों के आने से कमाई पर असर पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। सिनेमा विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे टकराव में दर्शकों का बंटवारा तय है। हालांकि, यदि दोनों फिल्मों की विषयवस्तु और शैली अलग-अलग दर्शक वर्ग को आकर्षित करती है, तो दोनों को समानांतर सफलता भी मिल सकती है।

सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं

राम गोपाल वर्मा के पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर समर्थकों और आलोचकों की प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। कुछ यूजर्स ने उनके विश्लेषण को “निर्भीक और स्पष्ट” बताया, तो कुछ ने इसे “अनावश्यक तुलना” करार दिया। फिल्म समीक्षकों का कहना है कि किसी भी फिल्म का अंतिम मूल्यांकन उसके प्रदर्शन और दर्शकों की प्रतिक्रिया के बाद ही किया जा सकता है। रिलीज से पहले की बहसें अक्सर अनुमान पर आधारित होती हैं।

बड़े विमर्श का रूप

धुरंधर : द रिवेंज और टाक्सिक का टकराव पहले ही चर्चा में था, लेकिन राम गोपाल वर्मा की टिप्पणियों ने इसे नई धार दे दी है। उन्होंने इसे क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा से अलग बताते हुए दो अलग सिनेमाई विचारधाराओं का संघर्ष बताया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि 19 मार्च को दर्शक किस फिल्म को प्राथमिकता देते हैं और बॉक्स ऑफिस पर किसका पलड़ा भारी रहता है। फिलहाल, ‘धुराक्सिक’ शब्द के साथ यह टकराव सिनेमा जगत में एक बड़े विमर्श का रूप ले चुका है।

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