मुंबई: Pakeezah Movie: भारतीय सिनेमा की यादगार फिल्मों में शामिल ‘पाकीजा’ अब नए रूप में दर्शकों के सामने आने जा रही है। मीना कुमारी और राजकुमार अभिनीत कमाल अमरोही की यह क्लासिक फिल्म 4K रिस्टोर्ड वर्जन में पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित होगी। फिल्म का वर्ल्ड प्रीमियर फ्रांस के ल्योन में आयोजित होने वाले फेस्टिवल ल्यूमेर (Lumière Festival) में होगा। इसके बाद इसकी स्क्रीनिंग बीएफआई लंदन फिल्म फेस्टिवल में भी की जाएगी। फिल्म को उसके मूल स्वरूप के करीब लाने का काम गैर-लाभकारी संस्था फिल्म हेरिटेज फाउंडेशन (FHF) ने किया है। इस पूरी प्रक्रिया में करीब दो साल का समय लगा। ल्योन में होने वाले प्रीमियर का नेतृत्व कान और ल्यूमेर फेस्टिवल के प्रमुख थिएरी फ्रेमाक्स करेंगे।
शिवेंद्र सिंह डुंगरपुर के लिए था खास सपना
फिल्म हेरिटेज फाउंडेशन के निदेशक शिवेंद्र सिंह डुंगरपुर ने बताया कि ‘पाकीजा’ को रिस्टोर करना उनका लंबे समय से सपना था। उनके मुताबिक यह अब तक किए गए सबसे चुनौतीपूर्ण रिस्टोरेशन प्रोजेक्ट्स में से एक रहा। डुंगरपुर ने बताया कि उन्होंने बचपन में बिहार के डुमरांव के एक सिनेमाघर में अपनी दादी के साथ यह फिल्म देखी थी। रिस्टोरेशन के दौरान टीम को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। फिल्म का मूल कैमरा नेगेटिव बेहद खराब हालत में था। रंग फीके पड़ चुके थे और फिल्म पर खरोंच तथा फफूंदी के निशान भी थे। ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती निर्देशक कमाल अमरोही की मूल दृश्यात्मक कल्पना को दोबारा पर्दे पर उतारना थी।
पुरानी तस्वीरों ने की रंगों को समझने में मदद
रिस्टोरेशन के दौरान फिल्म से जुड़ी कुछ मूल तस्वीरें भी मिलीं। इन तस्वीरों ने टीम को फिल्म के मूल रंगों और दृश्यात्मक शैली को समझने में महत्वपूर्ण मदद की। डुंगरपुर ने कमाल अमरोही के बच्चों ताजदार अमरोही और रुखसार अमरोही से भी सलाह ली। उनके पास फिल्म के निर्माण और शूटिंग से जुड़ी कई यादें थीं। लंदन में होने वाली स्क्रीनिंग में कमाल अमरोही के बच्चे और उनके पोते बिलाल अमरोही भी मौजूद रहेंगे। फिल्म को बीएफआई आईमैक्स में प्रदर्शित किया जाएगा।
‘पाकीजा’ कमाल अमरोही के लिए था जीवन का मिशन
ताजदार अमरोही ने फिल्म के पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि 1972 में इसके प्रीमियर के समय फिल्म के प्रिंट वाले डिब्बे को पालकी में रखकर मराठा मंदिर ले जाया गया था। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि 54 साल बाद वह अपने परिवार के साथ लंदन में फिल्म के रिस्टोर किए गए वर्जन के गाला प्रीमियर में शामिल होंगे। ताजदार के अनुसार, उनके पिता कमाल अमरोही ने इस फिल्म में अपना सब कुछ लगा दिया था। परिवार के लिए ‘पाकीजा’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि उनके पिता के जीवन का मिशन थी।
15 साल में पूरी हुई थी फिल्म
‘पाकीजा’ की कहानी की कल्पना कमाल अमरोही ने 1950 के दशक के मध्य में की थी। फिल्म को अपनी पत्नी मीना कुमारी की खूबसूरती और अभिनय क्षमता को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था। इसके निर्माण में करीब 15 साल लगे। फिल्म की शूटिंग 1956 में ब्लैक एंड व्हाइट में शुरू हुई थी। बाद में 1958 में इसे रंगीन फिल्म के रूप में बनाने का फैसला किया गया। कहानी लखनऊ में नवाबों के दौर के अंतिम समय की पृष्ठभूमि पर आधारित थी। मीना कुमारी ने इसमें तवायफ नरगिस और उसकी बेटी साहिबजान की दोहरी भूमिका निभाई थी।
रिलीज के कुछ ही समय बाद हुआ मीना कुमारी का निधन
फिल्म के निर्माण के दौरान कई मुश्किलें आईं। एक स्टूडियो में लगी आग से फिल्म के मूल ब्लैक एंड व्हाइट निगेटिव का कुछ हिस्सा नष्ट हो गया। 1964 तक फिल्म का काम पूरी तरह रुक गया था। इसी दौरान कमाल अमरोही और मीना कुमारी के बीच निजी मतभेद भी हुए। बाद में मीना कुमारी की तबीयत खराब रहने लगी। अभिनेता सुनील दत्त और अभिनेत्री नरगिस ने फिल्म की फुटेज देखकर उन्हें प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए प्रेरित किया। आखिरकार ‘पाकीजा’ 4 फरवरी 1972 को रिलीज हुई। फिल्म की रिलीज के कुछ ही सप्ताह बाद, 31 मार्च 1972 को मीना कुमारी का निधन हो गया। अब 54 साल बाद ‘पाकीजा’ का 4K रिस्टोर्ड वर्जन अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के सामने कमाल अमरोही और मीना कुमारी की इस सिनेमाई विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की कोशिश करेगा।