रणवीर सिंह और FWICE विवाद में नया मोड़, एक्‍टर के लीगल नोटिस के बाद FWICE ने वापस लिया फैसला

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार रणवीर सिंह ने 2 जून 2026 को FWICE को कानूनी नोटिस भेजा था। इसके बाद संगठन ने एक बयान जारी कर कहा कि वह नोटिस का कानूनी तरीके से जवाब देगा। साथ ही संगठन ने अभिनेता को बातचीत के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि दोनों पक्ष बैठकर इस मुद्दे का सौहार्दपूर्ण समाधान निकाल सकते हैं।;

Update: 2026-06-03 08:23 GMT

मुंबई: Don 3 Controversy: बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह और फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) के बीच चल रहे विवाद में नया मोड़ आ गया है। हाल ही में FWICE ने रणवीर सिंह के खिलाफ नॉन-कोऑपरेशन निर्देश जारी किया था, जिसके तहत संगठन के सदस्यों से अभिनेता के किसी भी प्रोजेक्ट में काम न करने की अपील की गई थी। हालांकि अब रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि रणवीर द्वारा भेजे गए लीगल नोटिस के बाद संगठन ने अपना यह फैसला वापस ले लिया है और मामले को बातचीत के जरिए सुलझाने की इच्छा जताई है।

लीगल नोटिस के बाद बदला रुख 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार रणवीर सिंह ने 2 जून 2026 को FWICE को कानूनी नोटिस भेजा था। इसके बाद संगठन ने एक बयान जारी कर कहा कि वह नोटिस का कानूनी तरीके से जवाब देगा। साथ ही संगठन ने अभिनेता को बातचीत के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि दोनों पक्ष बैठकर इस मुद्दे का सौहार्दपूर्ण समाधान निकाल सकते हैं। FWICE ने अपने बयान में यह भी कहा कि उसका उद्देश्य फिल्म उद्योग के हितों की रक्षा करना है और वह चाहता है कि विवाद को आपसी समझ और संवाद के माध्यम से खत्म किया जाए।

क्या था पूरा विवाद?

यह पूरा मामला फिल्म ‘डॉन 3’ से जुड़ा हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक रणवीर सिंह इस फिल्म का हिस्सा थे, लेकिन शूटिंग शुरू होने से लगभग 10 दिन पहले उन्होंने परियोजना छोड़ने का फैसला कर लिया। दावा किया गया कि अभिनेता के अचानक बाहर होने से फिल्म निर्माता और निर्देशक फरहान अख्तर को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। खबरों के अनुसार फरहान अख्तर ने रणवीर सिंह से कथित रूप से करीब 40 करोड़ रुपये के नुकसान की भरपाई की मांग की थी। जब यह मामला आपसी स्तर पर नहीं सुलझ पाया, तो इसकी शिकायत FWICE के पास पहुंची।

FWICE ने जारी किया था निर्देश

फरहान अख्तर की शिकायत मिलने के बाद FWICE ने 25 मई 2026 को रणवीर सिंह के खिलाफ नॉन-कोऑपरेशन डायरेक्टिव जारी कर दिया। इस निर्देश में संगठन से जुड़े सभी सदस्यों और तकनीशियनों से अभिनेता के किसी भी मौजूदा या आगामी प्रोजेक्ट में काम न करने की अपील की गई थी।इस फैसले ने फिल्म उद्योग में काफी चर्चा पैदा कर दी थी। कई लोगों का मानना था कि इस तरह का कदम किसी कलाकार के पेशेवर करियर पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है।

रणवीर ने कानूनी रास्ता चुना

FWICE के फैसले का विरोध करते हुए रणवीर सिंह ने कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपनाया और संगठन को लीगल नोटिस भेजा। अभिनेता की ओर से इस कदम को उनके पेशेवर अधिकारों की रक्षा के प्रयास के रूप में देखा गया। नोटिस मिलने के बाद संगठन ने अपने नॉन-कोऑपरेशन निर्देश को वापस लेने का निर्णय लिया और बातचीत के लिए सकारात्मक संकेत दिए। इससे दोनों पक्षों के बीच समझौते की संभावनाएं बढ़ गई हैं।

कंगना रनोट ने किया रणवीर का समर्थन

इस पूरे विवाद के बीच अभिनेत्री और सांसद कंगना रनोट भी रणवीर सिंह के समर्थन में सामने आईं। अपनी आगामी फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ के ट्रेलर लॉन्च कार्यक्रम के दौरान उन्होंने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। कंगना ने कहा कि किसी भी व्यक्ति के जीवन और करियर में सफलता के साथ चुनौतियां भी बढ़ती हैं। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्हें भी अतीत में कई बार विरोध और प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा है, लेकिन इससे उनके काम पर कोई असर नहीं पड़ा।

‘जितनी हैसियत बढ़ती है, उतने दुश्मन बढ़ते हैं’

रणवीर सिंह को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में कंगना ने कहा कि जब किसी व्यक्ति की पहचान और प्रभाव बढ़ता है तो उसके आलोचक और विरोधी भी बढ़ जाते हैं। उनके अनुसार यह सफलता का एक स्वाभाविक हिस्सा है। कंगना ने कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के दौरान कई तरह की मुश्किलें और बाधाएं सामने आती हैं, लेकिन समय के साथ परिस्थितियां बदल जाती हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि उनके साथ भी कई विवाद जुड़े रहे, लेकिन उन्होंने लगातार काम करना जारी रखा और आगे बढ़ती रहीं।

अब बातचीत से समाधान की उम्मीद

FWICE द्वारा नॉन-कोऑपरेशन निर्देश वापस लेने और रणवीर सिंह को बातचीत के लिए आमंत्रित करने के बाद अब इस विवाद के शांतिपूर्ण समाधान की उम्मीद बढ़ गई है। फिल्म उद्योग से जुड़े लोग भी चाहते हैं कि मामला कानूनी लड़ाई की बजाय आपसी संवाद के जरिए सुलझे।

फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि रणवीर सिंह और FWICE के बीच होने वाली संभावित बातचीत का क्या परिणाम निकलता है और क्या दोनों पक्ष किसी साझा समाधान पर पहुंच पाते हैं। इससे न केवल विवाद समाप्त होगा, बल्कि फिल्म उद्योग में भविष्य के लिए भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण स्थापित हो सकता है।

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