‘द केरल स्टोरी-2’ पर लगी रोक हटी, निर्माता विपुल अमृतलाल शाह ने कही यह बात

फिल्म ‘द केरल स्टोरी-2 : गोज बियांड’ की रिलीज को लेकर कुछ पक्षों ने आपत्ति जताई थी। उनका तर्क था कि फिल्म की विषयवस्तु और शीर्षक से केरल राज्य और उसके लोगों की छवि प्रभावित हो सकती है। इसी आधार पर फिल्म के केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) द्वारा दिए गए प्रमाणपत्र को चुनौती दी गई।

Update: 2026-02-28 05:17 GMT

कोच्चि/ मुंबई : केरल हाई कोर्ट की एक खंडपीठ ने शुक्रवार को फिल्म ‘द केरल स्टोरी-2 : गोज बियांड The (Kerala Story 2 Goes Beyond)’ की रिलीज पर लगी अंतरिम रोक हटा दी। इस फैसले के साथ ही फिल्म की स्क्रीनिंग का रास्ता साफ हो गया। इससे पहले हाई कोर्ट की एकल पीठ ने फिल्म की रिलीज पर 15 दिनों के लिए अंतरिम रोक लगाई थी। जस्टिस सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और जस्टिस पी.वी. बालकृष्णन की खंडपीठ ने जस्टिस बेचू कुरियन थामस की एकल पीठ के आदेश को निरस्त करते हुए कहा कि जिस प्रकार की दलीलें फिल्म के प्रमाणन के खिलाफ दी गई थीं, वे जनहित याचिका (पीआईएल) की प्रकृति की प्रतीत होती हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि एकल पीठ इस पर कैसे सुनवाई कर सकती थी।

यह फैसला गुरुवार देर रात तक चली विस्तृत बहस के बाद सुनाया गया। निर्माताओं ने एकल पीठ के अंतरिम आदेश के कुछ ही घंटों के भीतर खंडपीठ में अपील दायर कर दी थी, यह कहते हुए कि रिलीज से ठीक एक दिन पहले रोक लगने से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान होगा।

क्या था विवाद और कैसे पहुंचा मामला कोर्ट?

फिल्म ‘द केरल स्टोरी-2 : गोज बियांड’ की रिलीज को लेकर कुछ पक्षों ने आपत्ति जताई थी। उनका तर्क था कि फिल्म की विषयवस्तु और शीर्षक से केरल राज्य और उसके लोगों की छवि प्रभावित हो सकती है। इसी आधार पर फिल्म के केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) द्वारा दिए गए प्रमाणपत्र को चुनौती दी गई। एकल पीठ ने इन आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए फिल्म की रिलीज पर 15 दिनों की रोक लगा दी थी। हालांकि, निर्माताओं ने इसे अनुचित बताते हुए तत्काल खंडपीठ में अपील की।

खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान यह माना कि प्रमाणन को चुनौती देने वाली दलीलें व्यापक जनहित के सवाल उठाती हैं और इस प्रकृति के मामले पर सुनवाई का दायरा अलग होता है। अदालत ने कहा कि जब फिल्म को विधिवत प्रमाणन मिल चुका है, तो केवल आशंकाओं के आधार पर रोक उचित नहीं ठहराई जा सकती।

‘फिल्म केरल के खिलाफ नहीं’ : विपुल अमृतलाल शाह

फैसले के बाद फिल्म के निर्माता विपुल अमृतलाल शाह ने प्रेसवार्ता में कहा कि उनकी फिल्म केरल या वहां के लोगों के विरुद्ध नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फिल्म कुछ अपराधियों की कहानी पर आधारित है, जिनमें से कुछ केरल से हैं, जबकि कुछ मध्य प्रदेश और राजस्थान से भी संबंधित हैं। उन्होंने कहा, “हमारे शीर्षक से कुछ लोगों को यह भ्रम हुआ कि हम केरल को बदनाम करना चाहते हैं। लेकिन फिल्म देखने के बाद स्पष्ट होगा कि हम किसी राज्य या समुदाय को नकारात्मक रूप में प्रस्तुत नहीं कर रहे। यह कहानी अपराध से जुड़ी है, न कि किसी क्षेत्र विशेष के खिलाफ।” शाह ने यह भी कहा कि फिल्म की सच्चाई का सबसे बड़ा प्रमाण यही है कि केरल हाई कोर्ट की खंडपीठ ने रोक हटा दी है। उनके अनुसार, यह कोई काल्पनिक कथा नहीं, बल्कि वास्तविक घटनाओं पर आधारित कहानी है।

सेंसर प्रमाणन पर निर्माताओं का पक्ष

फिल्म के प्रमाणन को लेकर उठे सवालों पर विपुल शाह ने कहा कि आमतौर पर स्क्रीनिंग कमेटी में चार या पांच सदस्य होते हैं, लेकिन इस फिल्म के मामले में आठ सदस्यों की समिति गठित की गई थी। उन्होंने बताया कि इस समिति में केरल के दो सामाजिक कार्यकर्ता शामिल थे। इसके अलावा दिल्ली से सामाजिक-राजनीतिक विषयों के विशेषज्ञ एक प्रोफेसर को भी बुलाया गया था। इन विशेषज्ञों ने फिल्म का अवलोकन कर प्रमाणन दिया। शाह के मुताबिक, पहली पीठ ने इस पहलू को पर्याप्त महत्व नहीं दिया, जबकि खंडपीठ ने माना कि जब विशेषज्ञों की विस्तृत समिति फिल्म को देख चुकी है और प्रमाणन दे चुकी है, तो उसे चुनौती देने के लिए ठोस आधार आवश्यक है।

आर्थिक नुकसान का मुद्दा

निर्माताओं ने अदालत में यह भी तर्क दिया कि रिलीज से ठीक एक दिन पहले रोक लगाना व्यावसायिक रूप से गंभीर प्रभाव डाल सकता है। प्रचार, वितरण और सिनेमाघरों के साथ हुए समझौतों के मद्देनजर फिल्म की रिलीज टलने से भारी आर्थिक क्षति हो सकती थी। खंडपीठ ने इस पहलू को भी ध्यान में रखा और कहा कि प्रमाणित फिल्म पर अंतिम क्षण में रोक लगाने के लिए मजबूत कानूनी आधार होना चाहिए।

तीसरे भाग को लेकर संकेत

प्रेसवार्ता के दौरान विपुल शाह से फिल्म के संभावित तीसरे भाग के बारे में भी सवाल किया गया। उन्होंने कहा कि ‘द केरल स्टोरी’ फ्रेंचाइजी का तीसरा भाग तभी बनाया जाएगा, जब उनके पास बताने के लिए कोई सशक्त और नई कहानी होगी। उन्होंने दोहराया कि उनकी प्राथमिकता तथ्यात्मक और जिम्मेदार कहानी कहना है, न कि अनावश्यक विवाद खड़ा करना।

कोई कानूनी बाधा नहीं


खंडपीठ के फैसले के बाद अब फिल्म की रिलीज में कोई कानूनी बाधा नहीं है। हालांकि, यह देखना होगा कि विरोध करने वाले पक्ष आगे उच्चतर न्यायालय का रुख करते हैं या नहीं। फिलहाल, 24 घंटे के भीतर हुए इस घटनाक्रम ने फिल्म उद्योग और कानूनी हलकों में व्यापक चर्चा को जन्म दिया है। एकल पीठ द्वारा लगाई गई रोक और खंडपीठ द्वारा उसे हटाने के फैसले ने प्रमाणन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और न्यायिक दायरे के सवालों को फिर केंद्र में ला दिया है। ‘द केरल स्टोरी-2 : गोज बियांड’ अब सिनेमाघरों में रिलीज के लिए तैयार है, और दर्शकों की प्रतिक्रिया पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

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