मुंबई। हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता जैकी श्रॉफ का मानना है कि एक कलाकार का काम किसी एक खास दर्शक वर्ग तक सीमित नहीं होना चाहिए। उनका कहना है कि उन्होंने अपने लंबे फिल्मी करियर में हमेशा ऐसी फिल्मों का चुनाव करने की कोशिश की, जिन्हें अलग-अलग उम्र और पसंद के लोग देख सकें। जैकी के मुताबिक, उन्होंने कभी यह सोचकर फिल्में नहीं चुनीं कि उनका काम केवल युवाओं, परिवारों या किसी विशेष वर्ग को पसंद आएगा। उनके लिए हर दर्शक समान रूप से महत्वपूर्ण रहा है।
'मैं हमेशा एक खुली किताब रहा हूं'
अपने करियर और व्यक्तित्व पर बात करते हुए जैकी श्रॉफ कहते हैं कि उन्होंने जीवन में कभी बनावटी छवि बनाने की कोशिश नहीं की। उनके शब्दों में, "मैं हमेशा एक खुली किताब रहा हूं। मेरी जिंदगी लोगों के सामने रही है। मैंने कभी किसी से कुछ छिपाने की कोशिश नहीं की। जब फिल्मों का चुनाव किया, तब भी मेरा नजरिया खुला रहा।" उनका मानना है कि ईमानदारी और सहजता केवल निजी जीवन में ही नहीं, बल्कि पेशेवर फैसलों में भी झलकनी चाहिए।
बच्चों के लिए फिल्म करने की इच्छा भी पूरी की
जैकी श्रॉफ ने बताया कि अपने करियर में उन्होंने हर तरह के किरदार निभाए, लेकिन उन्हें एक समय महसूस हुआ कि उन्होंने बच्चों के लिए कोई खास फिल्म नहीं की है। इसी सोच के साथ उन्होंने हाल के वर्षों में बच्चों को ध्यान में रखकर बनी फिल्म 'द ग्रेट ग्रैंड सुपरहीरो' का हिस्सा बनने का फैसला किया। उनका कहना है कि बच्चों के लिए काम करना उनके लिए एक नया और संतोषजनक अनुभव रहा। वह मानते हैं कि अगर किसी कलाकार को अलग-अलग पीढ़ियों से जुड़ना है, तो उसे विविध विषयों और दर्शकों के लिए काम करना चाहिए।
फिल्मों का चुनाव सीमित सोच से नहीं किया
बॉलीवुड में कई कलाकार अपनी खास छवि या विशेष दर्शक वर्ग के अनुरूप फिल्में चुनते हैं। लेकिन जैकी श्रॉफ का कहना है कि उन्होंने कभी खुद को किसी एक शैली या दर्शक वर्ग तक सीमित नहीं रखा। उनके अनुसार, कलाकार की सबसे बड़ी पहचान उसकी बहुमुखी प्रतिभा होती है। यही कारण है कि उन्होंने अपने करियर में एक्शन, ड्रामा, पारिवारिक, सामाजिक और बच्चों की फिल्मों सहित कई तरह की परियोजनाओं में काम किया।
मां की सीख आज भी जीवन का आधार
जैकी श्रॉफ ने अपनी सफलता और सोच का श्रेय अपनी मां से मिले संस्कारों को दिया। उन्होंने कहा कि बचपन में मिली सीख आज भी उनके जीवन और व्यवहार का आधार है। उन्होंने बताया कि उनकी मां हमेशा कहती थीं कि अपने काम से कभी पीछे नहीं हटना चाहिए और जहां संभव हो, दूसरों की मदद करनी चाहिए। यही मूल्य उन्होंने जीवनभर अपनाने की कोशिश की।
'गिरे हुए इंसान पर मत हंसो, उसे उठाओ'
अपनी मां की सीख को याद करते हुए जैकी श्रॉफ ने एक भावुक उदाहरण भी साझा किया। उन्होंने कहा कि उनकी मां समझाती थीं कि यदि कोई व्यक्ति केले के छिलके पर फिसलकर गिर जाए, तो उस पर हंसना नहीं चाहिए, बल्कि उसका हाथ पकड़कर उसे उठाना चाहिए। उनका मानना है कि इंसान की पहचान केवल उसकी उपलब्धियों से नहीं, बल्कि दूसरों के प्रति उसके व्यवहार और संवेदनशीलता से भी होती है। जैकी ने यह भी कहा कि किसी की आलोचना करके खुद को बुद्धिमान साबित करने की कोशिश करना सही नहीं है। इसके बजाय लोगों की मदद करना और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना अधिक महत्वपूर्ण है।
सादगी और संवेदनशीलता से बनी अलग पहचान
करीब चार दशक लंबे फिल्मी सफर में जैकी श्रॉफ ने केवल अपने अभिनय से ही नहीं, बल्कि अपने सहज और जमीन से जुड़े व्यक्तित्व से भी दर्शकों का दिल जीता है। उनकी बातचीत में अक्सर जीवन के अनुभव, मानवीय मूल्य और सकारात्मक सोच की झलक दिखाई देती है। आज भी वह मानते हैं कि अभिनय केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज से जुड़ने और अलग-अलग पीढ़ियों तक सकारात्मक संदेश पहुंचाने का भी एक जरिया है। यही वजह है कि वह अपने करियर में नए विषयों और विविध दर्शकों के लिए काम करने को हमेशा तैयार रहते हैं।