ईशा सिंह : वक्त के साथ बदली टीवी की कहानियां, मनोरंजन के साथ जागरूकता भी जरुरी

मुंबई, टीवी अभिनेत्री ईशा सिंह इन दिनों अपने नए सीरियल 'जूही मुई' को लेकर चर्चा में हैं। इस सीरियल में वह एक ऐसी लड़की का किरदार निभा रही हैं, जो ऑटिज्म से जुड़ी चुनौतियों के बीच अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश करती है।;

By :  IANS
Update: 2026-07-01 06:32 GMT

मुंबई, टीवी अभिनेत्री ईशा सिंह इन दिनों अपने नए सीरियल 'जूही मुई' को लेकर चर्चा में हैं। इस सीरियल में वह एक ऐसी लड़की का किरदार निभा रही हैं, जो ऑटिज्म से जुड़ी चुनौतियों के बीच अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश करती है। इसी बीच ईशा सिंह ने आईएएनएस से टेलीविजन की बदलती कहानियों, दर्शकों की नई पसंद और समाज से जुड़े विषयों पर अपनी राय पेश की।

उन्होंने कहा कि आज के समय में केवल मनोरंजन करना ही काफी नहीं है, बल्कि शो के जरिए लोगों को जागरूक करना भी उतना ही जरूरी हो गया है।

आईएएनएस से बात करते हुए ईशा सिंह ने कहा, ''समय के साथ टीवी की दुनिया तेजी से बदल रही है। पहले जहां सीरियल्स में केवल पारिवारिक रिश्तों और मनोरंजन पर ज्यादा ध्यान दिया जाता था, वहीं अब ऐसे विषयों को भी जगह मिल रही है जो समाज के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। आज के दर्शक पहले से ज्यादा जागरूक हैं और वे ऐसी कहानियां देखना पसंद करते हैं, जिनसे उन्हें कुछ नया सीखने को मिले। यही वजह है कि निर्माता और लेखक भी अब ऐसे विषय चुन रहे हैं जो लोगों को सोचने पर मजबूर करें और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का काम करें।''

उन्होंने कहा, ''आज की युवा पीढ़ी टेलीविजन की कहानियों को नई दिशा देने में बड़ी भूमिका निभा रही है। अब वही शो ज्यादा पसंद किए जाते हैं, जिनमें मनोरंजन के साथ मैसेज भी हो। आखिरकार टीवी पर वही दिखाया जाता है जिसे दर्शक देखना चाहते हैं। अगर लोगों की पसंद बदलती है तो कार्यक्रमों की कहानियां भी बदलना स्वाभाविक है, इसलिए आज ऐसे विषयों पर काम किया जा रहा है जो समाज के अलग-अलग वर्गों से जुड़े हों और लोगों के बीच जागरूकता बढ़ा सकें।''

ईशा ने कहा, ''टीवी केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज को सही दिशा दिखाने का एक जरिया भी है। अगर किसी शो के जरिए लोगों को किसी सामाजिक विषय के बारे में जानकारी मिलती है, तो उसका असर लाखों परिवारों तक पहुंच सकता है। ऐसे शोज लोगों की सोच बदलने और संवेदनशील विषयों को समझने में मदद करते हैं। इसलिए कलाकारों और कार्यक्रम बनाने वालों की जिम्मेदारी पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है।''

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