अमिताभ बच्चन ने पुरानी परंपराओं पर उठाए सवाल
मुंबई, मेगास्टार अमिताभ बच्चन अक्सर अपने ब्लॉग के जरिए अपने ख्यालों को बयां करते हैं। अभिनेता ने अपने ब्लॉग के जरिए पुरानी परंपराओं और अंधविश्वासों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लोग बिना मतलब समझे ही मान्यताओं को मानते चले जा रहे हैं।;
मुंबई, मेगास्टार अमिताभ बच्चन अक्सर अपने ब्लॉग के जरिए अपने ख्यालों को बयां करते हैं। अभिनेता ने अपने ब्लॉग के जरिए पुरानी परंपराओं और अंधविश्वासों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लोग बिना मतलब समझे ही मान्यताओं को मानते चले जा रहे हैं। अमिताभ ने अपने ब्लॉग में लिखा कि कैसे समय के साथ इंसान की इच्छाएं और जिंदगी को देखने का नजरिया बदल जाता है।
अभिनेता ने अपने ब्लॉग में लिखा, "कभी-कभी मन की करना, कुछ चीजों से दूर रहना। लेकिन जिंदगी में एक ऐसा वक्त भी आता है, जब आप वो सब करना चाहते हैं, जिसे करने से आपको रोका गया है। वही अपनाया हुआ रास्ता, अलमारी में रखा वो रैक, एक जैकेट जिसे अक्सर पहना है, लेकिन अब उसे बदलने की इच्छा। वो देखना जो पहले कभी नहीं देखा और जिसे पहले नहीं चाहा था, लेकिन अब चाहत है, अजीब है, जिंदगी आपको जिस तरफ धकेलती है।"
उन्होंने आगे लिखा, "पहले के समय में बेफिक्र थे और अब फिर से बेफिक्र हो गए, जिंदगी का चक्र पूरा हो गया? दिमाग ये सब क्यों तय करता है? मैं सोचता हूं थोड़ा अजीब लगता है, लेकिन करता तो है, यह कई बार सुकून देने वाले काम भी तो करता है, है ना?"
उन्होंने शनिवार को नाखून न काटने और हरे पत्थर की जगह हरी शॉल रखने जैसी मान्यताओं का उदाहरण देते हुए इनके पीछे के तर्क पर सवाल उठाया।अमिताभ ने लिखा, "शनिवार को नाखून मत काटो, अशुभ होता है। प्रथा चली आ रही है और हमारा डर, एक आज्ञाकारी इंसान के तौर पर उसे मान्यता देता रहता है। हरा पत्थर मत पहनो, एक हरे रंग की शॉल बगल में रख लो।"
उन्होंने आगे लिखा, "उस बेचारे पत्थर ने क्या बिगाड़ा है आपका और ये हरे रंग की शॉल कैसे लाभदायक हो जाएगी?"
मेगास्टार ने आगे इस बात पर भी जोर दिया कि कैसे आधुनिक युग में लोग मानसिक शांति और अच्छे स्वास्थ्य के लिए पुरानी प्रथाओं को नए तरीके से अपना रहे हैं। अभिनेता ने यह भी माना कि आज की पीढ़ी आंख बंद करके किसी प्रथा को नहीं मानती है। वह बस उन्हीं प्रथाओं को अपनी जीवनचर्या में शामिल कर रहे हैं जिनका कोई वैज्ञानिक, शारीरिक या मानसिक लाभ हो।