मुंबई : डिजिटल युग में बच्चों और युवाओं का बढ़ता स्क्रीन टाइम अब समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। मोबाइल फोन और इंटरनेट मीडिया का इस्तेमाल आज लगभग हर उम्र वर्ग के लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। खासतौर पर युवाओं के बीच इसका आकर्षण कई बार लत का रूप लेता दिखाई देता है। इसी मुद्दे पर हिंदी सिनेमा के जाने-माने अभिनेता और ‘मिस्टर परफेक्शनिस्ट’ के नाम से मशहूर आमिर खान ने एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि यदि बच्चों और युवाओं को मोबाइल और इंटरनेट की लत से दूर रखना है, तो स्कूलों के पाठ्यक्रम में खेलों को मुख्य विषय के रूप में शामिल करने पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
मुंबई में कार्यक्रम के दौरान रखी बात
आमिर खान ने यह विचार मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ हुई बातचीत में व्यक्त किए। इस परिचर्चा के दौरान दोनों के बीच युवाओं में घटती किताब पढ़ने की आदत और मोबाइल तथा इंटरनेट मीडिया की बढ़ती लत जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। आमिर खान ने कहा कि आज के समय में बच्चे और युवा अपना काफी समय फोन और इंटरनेट मीडिया पर बिताते हैं, जिससे उनके मानसिक और सामाजिक विकास पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में शिक्षा प्रणाली में ऐसे बदलाव करने की जरूरत है, जो उन्हें अधिक सक्रिय और संतुलित जीवन की ओर प्रेरित करें।
खेलों से सीखे जीवन के महत्वपूर्ण पाठ
अपने अनुभव साझा करते हुए आमिर खान ने कहा कि उनके जीवन पर खेलों का गहरा प्रभाव रहा है। उन्होंने बताया कि बचपन में स्कूल और पढ़ाई से जो सीखा, उससे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण सीख उन्हें खेलों से मिली। आमिर ने कहा, जब मैं बड़ा हो रहा था, तब खेलों ने मुझे बहुत कुछ सिखाया। खेलों ने मुझे कठिन परिश्रम करना सिखाया, मेरे अंदर जुनून पैदा किया, हार को विनम्रता से स्वीकार करना और जीत को संभालना सिखाया। इसके अलावा टीमवर्क का महत्व भी खेलों से ही समझ में आया। उनके अनुसार खेल न केवल शारीरिक रूप से मजबूत बनाते हैं, बल्कि व्यक्तित्व के विकास में भी बड़ी भूमिका निभाते हैं।
पाठ्यक्रम में खेल को मिले प्राथमिकता
आमिर खान ने सुझाव दिया कि स्कूलों के पाठ्यक्रम में खेलों को केवल सह-पाठ्यक्रम गतिविधि के रूप में नहीं, बल्कि मुख्य विषय के रूप में शामिल किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि इससे बच्चों के समग्र विकास को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा दौर में शिक्षा प्रणाली को बदलते समय के साथ तालमेल बिठाने की जरूरत है। तकनीक के तेजी से विकास के कारण पारंपरिक पढ़ाई के कई पहलुओं का स्वरूप बदल रहा है।
एआई के दौर में बदल रही शिक्षा
आमिर खान ने चर्चा के दौरान यह भी कहा कि आज के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के कारण जानकारी हासिल करना बेहद आसान हो गया है। उन्होंने कहा, आज हम स्कूलों में जो गणित और विज्ञान पढ़ाते हैं, उसका महत्व पहले जैसा नहीं रह गया है। अब कई सवालों के जवाब हम सीधे एआई से पूछ सकते हैं। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य पढ़ाई के महत्व को कम करना नहीं है, बल्कि शिक्षा को अधिक व्यावहारिक और जीवन से जुड़ा बनाना है।
मानसिक और सामाजिक विकास में खेलों की भूमिका
आमिर के अनुसार खेल बच्चों के मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। खेलों के माध्यम से बच्चे अनुशासन, सहयोग, नेतृत्व और आत्मविश्वास जैसे गुण सीखते हैं। उन्होंने कहा कि यदि स्कूलों में खेलों को अधिक महत्व दिया जाए, तो यह बच्चों को मोबाइल और इंटरनेट की दुनिया से बाहर निकालकर वास्तविक जीवन के अनुभवों से जोड़ सकता है।
सरकार की योजनाओं पर बोले फडणवीस
इस चर्चा के दौरान महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी राज्य सरकार द्वारा खेलों के विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों और योजनाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार युवाओं को खेलों की ओर प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम और सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। इसका उद्देश्य राज्य में खेल संस्कृति को मजबूत बनाना और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के अवसर देना है।
रचनात्मक समुदाय की भूमिका पर भी चर्चा
कार्यक्रम के दौरान आमिर खान ने एक आदर्श समाज के निर्माण में रचनात्मक समुदाय की भूमिका पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि कलाकार, लेखक, फिल्मकार और अन्य रचनात्मक लोग समाज को सकारात्मक दिशा देने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि समाज के विभिन्न क्षेत्र मिलकर काम करें, तो युवाओं को बेहतर वातावरण और सही दिशा मिल सकती है। आमिर खान का मानना है कि शिक्षा प्रणाली में खेलों को अधिक महत्व देकर और युवाओं को सक्रिय जीवनशैली के लिए प्रेरित कर मोबाइल और इंटरनेट की बढ़ती लत जैसी समस्याओं से काफी हद तक निपटा जा सकता है।