मुंबई। अक्सर कहा जाता है कि इंसान भले ही अपनी जिंदगी की योजनाएं बनाए, लेकिन अंतिम फैसला किस्मत ही करती है। 53 वर्षीय अभिनेत्री अश्विनी कालसेकर की कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है। ‘गोलमाल 3’ और ‘भूल भुलैया 2’ जैसी फिल्मों में अपनी प्रभावशाली मौजूदगी से पहचान बनाने वाली अश्विनी ने कभी सोचा भी नहीं था कि वह अभिनय की दुनिया में कदम रखेंगी। उनका सपना कुछ और था, मंज़िल कुछ और निकली। अश्विनी खुद मानती हैं कि उन्होंने जीवन में कभी बहुत योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ने की कोशिश नहीं की। उनके करियर का हर मोड़ जैसे अपने आप खुलता चला गया। उन्होंने 2009 में मुरली शर्मा से शादी की और यह जोड़ी अपने पसंदीदा किरदारों के लिए जानी जाती है।
सपना था कथक की दुनिया में नाम कमाने का
अश्विनी कालसेकर का पहला प्यार अभिनय नहीं, बल्कि कथक था। उन्होंने बचपन से ही कथक की विधिवत ट्रेनिंग ली थी और उनका सपना था कि वह आगे चलकर अपनी कथक डांस क्लास शुरू करें। वह बताती हैं, “मैंने कभी प्लान बनाकर जिंदगी नहीं जी। मेरा सपना था कि मैं कथक की क्लासेज खोलूं। मैंने कथक सीखा और उसी दिशा में आगे बढ़ रही थी।” उनकी प्रतिभा ने जल्द ही उन्हें एक बड़ा अवसर दिलाया। प्रसिद्ध अभिनेत्री और शास्त्रीय नृत्यांगना हेमा मालिनी को कथक डांसर्स की जरूरत थी। अश्विनी का चयन हुआ और कम उम्र में ही उन्हें हेमा मालिनी के साथ मंच साझा करने का मौका मिला।
हेमा मालिनी के साथ दुनिया का सफर
महज 15-16 साल की उम्र में अश्विनी ने हेमा मालिनी के साथ देश-विदेश में कई कार्यक्रम किए। यह अनुभव उनके लिए बेहद खास रहा। कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रस्तुति देने से उन्हें आत्मविश्वास मिला और कला की समझ भी गहरी हुई। हालांकि उस समय भी उन्होंने अभिनय को करियर के रूप में नहीं सोचा था। उनका ध्यान पूरी तरह नृत्य पर ही केंद्रित था।
कॉलेज के दिनों में एयरलाइंस की नौकरी
कथक के साथ-साथ पढ़ाई भी जारी रही। कॉलेज के दौरान अश्विनी ने एयरलाइंस का फॉर्म भरा और चयनित होकर केबिन क्रू की नौकरी हासिल कर ली। वह याद करती हैं, “कॉलेज में मैंने एयरलाइंस का फॉर्म भरा था और मुझे केबिन क्रू की नौकरी मिल गई। मैं अपनी जिंदगी से खुश थी और उसी दिशा में आगे बढ़ रही थी।” उनके लिए यह एक स्थिर और सम्मानजनक करियर था। अभिनय से उनका कोई सीधा संबंध नहीं था, न ही उन्होंने इसके लिए कभी प्रयास किया था।
एक ऑडिशन, जिसने बदल दी जिंदगी
जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ एक संयोग से आया। अश्विनी अपनी एक दोस्त के साथ उसके ऑडिशन पर गई थीं। वहां उनकी मुलाकात निर्देशक कबीर भाटिया से हुई। कबीर भाटिया ने उनकी आवाज सुनी और पूछा कि क्या वह अभिनय करना चाहेंगी। अश्विनी ने साफ तौर पर मना कर दिया। वह बताती हैं, “मैंने पूरे एट्टीट्यूड के साथ कहा कि मैं केबिन क्रू हूं, मेरे पास इसके लिए समय नहीं है।” लेकिन निर्देशक ने हार नहीं मानी। उन्होंने फिर पूछा कि क्या वह ऑडिशन देना चाहेंगी। अश्विनी ने अनमने ढंग से शुक्रवार का दिन तय कर दिया।
राजकमल स्टूडियो से शुरुआत
निर्धारित दिन अश्विनी राजकमल स्टूडियो पहुंचीं। वहां पार्थो मित्रा ने उन्हें एक पन्ने पर कुछ संवाद लिखकर दिए और पढ़ने को कहा। अश्विनी ने बिना किसी विशेष तैयारी के वे पंक्तियां पढ़ीं। शायद उनकी आवाज, आत्मविश्वास और व्यक्तित्व में कुछ खास था, जिसने निर्माताओं का ध्यान खींच लिया। उन्हें चयनित कर लिया गया। उनका पहला धारावाहिक था ‘शांति’। यही वह परियोजना थी, जिसने उनके अभिनय करियर की नींव रखी।
टेलीविजन से फिल्मों तक
‘शांति’ के बाद अश्विनी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। धीरे-धीरे निजी चैनलों का दौर शुरू हुआ और टेलीविजन इंडस्ट्री का विस्तार होने लगा। उसी दौरान उन्होंने एयरलाइन की नौकरी छोड़ने का फैसला किया और पूरी तरह अभिनय को अपनाया। यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने जोखिम उठाया और खुद को नए क्षेत्र में साबित किया। समय के साथ उन्होंने टीवी और फिल्मों दोनों में अपनी अलग पहचान बनाई। 'जॉनी गद्दार', 'बदलापुर', 'सिंघम रिटर्न्स', ‘गोलमाल 3’ और ‘भूल भुलैया 2’ जैसी फिल्मों में उनके किरदारों ने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी। उनकी खास आवाज और दमदार स्क्रीन प्रेजेंस उनकी पहचान बन गई।
बिना योजना, लेकिन पूरे समर्पण के साथ
अश्विनी की कहानी इस बात का उदाहरण है कि जीवन में हर चीज पूर्व निर्धारित नहीं होती। कई बार मौके अचानक सामने आते हैं और उन्हें पहचानने की जरूरत होती है। उन्होंने कभी अभिनेत्री बनने की योजना नहीं बनाई थी, लेकिन जब अवसर मिला तो उसे पूरे समर्पण के साथ अपनाया। आज वह इंडस्ट्री में एक मजबूत सहायक अभिनेत्री के रूप में जानी जाती हैं। उनका सफर यह भी दिखाता है कि कला का कोई एक रास्ता नहीं होता। कथक से शुरू हुआ सफर अभिनय तक पहुंचा और उन्होंने दोनों क्षेत्रों में अपनी छाप छोड़ी।
किस्मत और मेहनत का संगम
अश्विनी कालसेकर की यात्रा यह साबित करती है कि किस्मत दरवाजा जरूर खोलती है, लेकिन उस दरवाजे से आगे बढ़ने के लिए मेहनत और साहस जरूरी होता है। एक कथक डांसर से केबिन क्रू और फिर सफल अभिनेत्री बनने तक का उनका सफर प्रेरणादायक है। उन्होंने यह दिखाया कि जीवन में योजनाएं भले न हों, लेकिन आत्मविश्वास और मेहनत हो तो हर मोड़ पर नई दिशा मिल सकती है। आज भी जब वह अपने सफर को याद करती हैं, तो मुस्कुराकर कहती हैं— “मैंने कभी प्लान नहीं किया, बस जो सामने आया, उसे अपनाती चली गई।”