ग्रामीण इलाकों में अप्रैल से महंगी होगी बिजली
उत्तर प्रदेश के 50 लाख अनमीटर्ड ग्रामीण उपभोक्ताओं को एक अप्रैल से बिजली के लिये और जेब ढीली करनी होगी।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के 50 लाख अनमीटर्ड ग्रामीण उपभोक्ताओं को एक अप्रैल से बिजली के लिये और जेब ढीली करनी होगी।
सूबे का बिजली विभाग एक अप्रैल से अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं की बिजली दरों को 300 रूपये प्रति किलोवाट की जगह में 400 रूपये प्रति किलोवाट प्रतिमाह करने जा रहा है। पांच महीने के अंतराल में अनमीटर्ड उपभोक्ताओं के लिये बिजली की बढी दरों का यह दूसरा झटका होगा। इससे पहले पिछली 30 नवम्बर को ग्रामीण अनमीटर्ड बिजली उपभोक्ताओं के लिये बिजली दरें 180 रूपये प्रति किलोवाट से बढाकर 300 रूपये प्रति किलोवाट की गयी थी।
इस बीच उपभोक्ता परिषद ने उ0प्र0 सरकार विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 108 के तहत नियामक आयोग को अनुरोध पत्र भेजकर बढ़ी दरों में रोक लगाने की मांग की है। परिषद की दलील है कि इस बारे में उसने एक याचिका आयोग के समक्ष प्रस्तुत की है। याचिका पर विचार किये बिना बिजली दरों में बढोत्तरी करना असंवैधानिक है।
परिषद ने मुख्यमंत्री आदित्य नाथ योगी से इस मामले पर हस्तक्षेप करने की मांग की है और यह निवेदन किया है कि जब तक उपभोक्ता परिषद की पुनर्विचार याचिका पर आयोग कोई निर्णय न दे दे तब तक सरकार विद्युत अधिनियम की धारा 108 के तहत एक अप्रैल से बढ़ रही बिजली दरों पर रोक लगाने के लिये नियामक आयोग से मांग करे।
परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने कहा कि एक अप्रैल से 50 लाख अनमीटर्ड ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में जो बढ़ोत्तरी हो रही है, वह असंवैधानिक है क्योंकि उ0प्र0 पावर कार्पोरेशन व बिजली कम्पनियों द्वारा मल्टीईयर टैरिफ प्रस्ताव के तहत केवल वर्ष 2017-18 का टैरिफ प्रस्ताव आयोग में दाखिल किया गया था और एक ही वित्तीय वर्ष पर सार्वजनिक सुनवाई हुई थी।
ऐसे में जब तक नया टैरिफ पुनः आयोग द्वारा न जारी किया जाये, तब तक वर्ष 2017-18 की ही टैरिफ नियमानुसार लागू रहना चाहिए, लेकिन पावर कार्पोरेशन व उ0प्र0 सरकार ने एकल मेम्बर कमीशन पर दबाव डालकर अप्रैल से ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में रू0 300 प्रति किलोवाट प्रतिमाह की जगह रू0 400 प्रति किलोवाट प्रतिमाह जारी करा लिया था। सवाल यह उठता है कि अप्रैल के बाद वित्तीय वर्ष 2018-19 शुरू हो जायेगा और टैरिफ आदेश वर्ष 2017-18 का जारी है, ऐसे में 1 अप्रैल,2018 से बढ़ रही दरें पूरी तरह असंवैधानिक है, क्योंकि एक ही श्रेणी के विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में बढ़ोत्तरी नहीं की जा सकती।
इस पूरे मामले पर उपभोक्ता परिषद द्वारा आयोग में पुनर्विचार याचिका दाखिल की गयी थी, जिस पर आयोग के चेयरमैन एस के अग्रवाल ने पूरे मामले पर परीक्षण कराने के बाद उ0प्र0 पावर कार्पोरेशन से रिर्पोट तलब की थी। जिस पर पावर कार्पोरेशन द्वारा अपना जवाब आयोग में बहुत पहले दाखिल कर सरकार के माध्यम से आयोग पर यह दबाव बनाया गया कि मामले पर आगे कार्यवाही न की जाये और अन्ततः मामला आज भी विचाराधीन है।