जल को संविधान की समवर्ती सूची में शामिल करने की मांग
देश मे जल संकट और राष्ट्रीय सिंचाई परियोजनाओं को पूरा होने में हो रहे विलम्ब को देखते हुए राज्यसभा में जल को संविधान की समवर्ती सूची में शामिल करने की मांग की गई।
नयी दिल्ली। देश मे जल संकट और राष्ट्रीय सिंचाई परियोजनाओं को पूरा होने में हो रहे विलम्ब को देखते हुए राज्यसभा में जल को संविधान की समवर्ती सूची में शामिल करने की मांग की गई।
केंद्रीय जल संसाधन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कांग्रेस के के वी पी एस राव के ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चली चर्चा का जवाब देते हुए सदस्यों की इस मांग को नामंजूर कर दिया और राज्य सरकारों को जल संरक्षण तथा परियोजनाओं को पूरा करने की जिम्मेदारी निभाने को कहा।
श्री राव ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव में कहा कि जल के महत्व को देखते हुए सरकार ने 16 सिंचाई परियोजनाओं को राष्ट्रीय सिंचाई परियोजनाएं घोषित की हैं लेकिन अंतर राज्जीय मुद्दे विधायी मुद्दे भूमि अधिग्रहण और फण्ड के कारण ये परियोजनाएं पूरी नहीं हो रही है इसलिए जल को समवर्ती सूची में शामिल किया जाए।
श्री शेखावत ने कहा कि सरकारिया आयोग और पूंच आयोग ने जल को समवर्ती सूची में शामिल करने के प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया था। संविधान सभा मे इस पर चर्चा हुई थी और अम्बेडकर भी इसे राज्यों की सूची में शामिल करने के समर्थक थे और इसे समवर्ती सूची में नही बल्कि राज्यों की सूची में शामिल किया गया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जल संरक्षण की जिम्मेदारी निभाये। राजस्थान ने यह जिम्मेदारी निभाई तो प्रतिवर्ष भूमिगत जल स्तर पांच फीट बढ़ रहा है। उन्होंने पोलावरम परियोजना में विलंब के लिए राज्य सरकार को दोषी ठहराया क्योंकि गत छह माह से उसने इस परियोजना के संशोधित बजट के कागजात वित्त मंत्रालय को नही दिया। पश्चिम बंगाल की सरकार ने तीस्ता बैराज परियोजना के लिए जमीन का अधिग्रहण तक नही किया इसलिए केंद्र पर आरोप लगाकर राजनीति न करे। इसके लिए उन्होंने सदस्यों की खिंचाई भी की ।
चर्चा में भाजपा के सी आर रमेश ,कांग्रेस के मधुसूदन मिस्त्री , माकपा के के के राजेश , बसपा के अधोक सिद्धार्थ , जदयू के रामचन्द्र प्रसाद , बीजद के प्रशान्त नंदा , मनोनीत नरेंद्र जाधव , अन्नाद्रमुक के नवनीत रेड्डी , राजद के मनोज कुमार झा आदि ने भाग लिया।