जाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज का शताब्दी उत्सव: 100 वर्षों की विरासत का भव्य जश्न, पूर्व छात्रों का हुआ संगम
अपने स्वागत भाषण में प्राचार्य प्रो. नरेंद्र सिंह ने कॉलेज के गौरवशाली इतिहास को रेखांकित किया और पूर्व छात्रों से इसकी समृद्ध विरासत को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह संस्थान केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक और बौद्धिक विकास का महत्वपूर्ण मंच रहा है।
नई दिल्ली: दिल्ली के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में शामिल जाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ऐतिहासिक संबद्धता के 100 वर्ष पूरे होने का भव्य उत्सव मनाया। इस खास मौके पर शनिवार, 11 अप्रैल 2026 को कॉलेज सभागार में एक विशेष एल्यूमनी मीट और सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें देश-विदेश से आए पूर्व छात्रों और गणमान्य अतिथियों ने हिस्सा लिया।
भव्य आयोजन, शानदार समन्वय
इस ऐतिहासिक कार्यक्रम को सफल बनाने में आयोजन समिति की अहम भूमिका रही। कॉलेज के प्राचार्य प्रो. नरेंद्र सिंह के नेतृत्व में पूरी टीम ने इस आयोजन को भव्य और यादगार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कार्यक्रम के संयोजक प्रो. संजीव कुमार ने सूक्ष्म योजना और बेहतर समन्वय के जरिए पूरे आयोजन को सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराया।
इतिहास और विरासत को किया याद
अपने स्वागत भाषण में प्राचार्य प्रो. नरेंद्र सिंह ने कॉलेज के गौरवशाली इतिहास को रेखांकित किया और पूर्व छात्रों से इसकी समृद्ध विरासत को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह संस्थान केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक और बौद्धिक विकास का महत्वपूर्ण मंच रहा है।
वहीं, प्रो. संजीव कुमार ने कॉलेज की ऐतिहासिक यात्रा को याद करते हुए बताया कि यह संस्थान तीन शताब्दियों पहले ‘मदरसा ग़ाज़ीउद्दीन’ के रूप में स्थापित हुआ था। समय के साथ यह संस्थान एक आधुनिक शैक्षणिक केंद्र में विकसित हुआ, जो आज भी सुधार, संवाद और ज्ञान का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
महान पूर्व छात्रों को श्रद्धांजलि
इस अवसर पर उन महान विभूतियों को भी श्रद्धांजलि दी गई, जिन्होंने इस संस्थान की पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। इनमें मास्टर रामचंद्र, अली सरदार जाफरी, भीष्म साहनी, जकाउल्लाह देहलवी, सिकंदर बख़्त, जे.एन. दीक्षित, चौधरी प्रेम सिंह और प्रो. गोपीचंद नारंग जैसे नाम शामिल रहे। इन सभी महान हस्तियों के योगदान को याद करते हुए आयोजकों और उपस्थित लोगों ने उनके प्रति सम्मान प्रकट किया।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां
कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय कुलगीत की गरिमामयी प्रस्तुति से हुई, जिसने पूरे माहौल को औपचारिक और भावनात्मक बना दिया। इसके बाद विशिष्ट पूर्व छात्रों का सम्मान समारोह आयोजित किया गया, जहां विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले पूर्व छात्रों को सम्मानित किया गया। सांस्कृतिक संध्या में छात्रों ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। मोहिनीयट्टम नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति और संगीत कार्यक्रमों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। युवा ऊर्जा और कला के इस संगम ने समारोह को और भी खास बना दिया।
यादों और अनुभवों का साझा मंच
एल्यूमनी मीट का सबसे भावुक और खास हिस्सा रहा पूर्व छात्रों का अपने अनुभव साझा करना। उन्होंने अपने कॉलेज जीवन की यादों को ताजा किया और बताया कि किस तरह इस संस्थान ने उनके जीवन और करियर को आकार दिया। इन अनुभवों में अपनापन, गर्व और कृतज्ञता की भावना साफ झलक रही थी। यह मिलन केवल यादों का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि एक मजबूत नेटवर्क को फिर से जीवित करने का अवसर भी बना।
विभिन्न क्षेत्रों के दिग्गज एक मंच पर
इस कार्यक्रम में राजनीति, कूटनीति, साहित्य, पत्रकारिता और अकादमिक जगत से जुड़े कई प्रतिष्ठित पूर्व छात्र शामिल हुए। इसने कॉलेज की उस परंपरा को फिर से उजागर किया, जिसमें यह संस्थान समाज के हर क्षेत्र में योगदान देने वाले व्यक्तित्व तैयार करता रहा है।
मीडिया कवरेज और समापन
इस आयोजन को व्यापक मीडिया कवरेज भी मिला, जिसमें ‘ज़ भारत’ आधिकारिक मीडिया साझेदार के रूप में शामिल रहा। कार्यक्रम का समापन सामूहिक रात्रिभोज के साथ हुआ, जिसने पूर्व छात्रों के बीच आपसी संबंधों को और मजबूत किया।
एक सदी की प्रेरणादायक यात्रा
जाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज का यह शताब्दी उत्सव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक गौरवशाली यात्रा का उत्सव था। इसने न सिर्फ संस्थान की ऐतिहासिक विरासत को सम्मानित किया, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बना। एक सदी के इस पड़ाव पर कॉलेज ने यह साबित कर दिया कि वह केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि विचार, संस्कृति और समाज निर्माण का एक सशक्त मंच है, जो आने वाले वर्षों में भी अपनी रोशनी फैलाता रहेगा।