नई दिल्ली: Air Quality Index: राजधानी की हवा में अचानक आई गिरावट ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। कुछ दिन पहले तक राजधानी का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 48 दर्ज किया गया था, जो 'अच्छी' श्रेणी में आता है। लेकिन महज पांच दिनों के भीतर यही AQI बढ़कर 294 तक पहुंच गया, जिससे हवा 'खराब' श्रेणी में पहुंच गई। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार प्रदूषण बढ़ने की बड़ी वजह स्थानीय स्रोतों के साथ-साथ पश्चिम एशिया और पड़ोसी देशों से आने वाली धूल भरी हवाएं भी हैं।
पश्चिम एशिया से दिल्ली तक पहुंची धूल
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के शुष्क एवं रेगिस्तानी क्षेत्रों से उठने वाली धूल पश्चिमी हवाओं के साथ लंबी दूरी तय करते हुए उत्तर भारत तक पहुंचती है। इन हवाओं के प्रभाव से धूल के महीन कण पंजाब, हरियाणा और राजस्थान से गुजरते हुए दिल्ली-एनसीआर के वातावरण में प्रवेश कर जाते हैं। इससे हवा में धूलकणों की मात्रा बढ़ जाती है और वायु गुणवत्ता तेजी से खराब होती है।
हजारों किमी का सफर तय करती हैं धूल भरी हवाएं
दिल्ली से ईरान की दूरी लगभग 2,555 किलोमीटर, अफगानिस्तान की करीब 1,005 किलोमीटर और पाकिस्तान की लगभग 450 किलोमीटर मानी जाती है। इन क्षेत्रों में गर्म और शुष्क मौसम के दौरान तेज धूल भरी आंधियां उठती हैं। ये धूल ऊंचाई पर पहुंचकर पश्चिमी हवाओं के साथ लंबी दूरी तय करती है और भारत के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों से होते हुए दिल्ली तक पहुंच जाती है।
कैसे बिगड़ती है दिल्ली की हवा?
विशेषज्ञ बताते हैं कि धूल के कण वातावरण में पहुंचने के बाद हवा में मौजूद PM10 जैसे बड़े कणों की मात्रा बढ़ा देते हैं। जब हवा की रफ्तार कम हो जाती है, तो ये कण वातावरण में ही ठहर जाते हैं और प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगता है। इसके कारण आसमान धुंधला दिखाई देता है, दृश्यता प्रभावित होती है और लोगों को सांस लेने में परेशानी, आंखों में जलन तथा एलर्जी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, दिल्ली के प्रदूषण में स्थानीय स्रोत जैसे वाहनों का धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन और निर्माण गतिविधियां भी योगदान देते हैं। लेकिन इस समय धूल भरी पश्चिमी हवाओं ने वायु गुणवत्ता को और अधिक प्रभावित किया है।
बारिश नहीं होने से राहत की उम्मीद कम
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में अगले सात दिनों तक व्यापक बारिश की संभावना नहीं है। साथ ही तापमान सामान्य से ऊपर बना रहने का अनुमान है। ऐसे मौसम में हवा में मौजूद धूल और प्रदूषक कण आसानी से साफ नहीं हो पाते, जिससे AQI लंबे समय तक खराब बना रह सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अच्छी बारिश या तेज स्थानीय हवाएं ही वातावरण में मौजूद धूल को कम करने में प्रभावी भूमिका निभाती हैं। फिलहाल ऐसे संकेत नहीं मिलने से प्रदूषण में तत्काल राहत की संभावना सीमित दिखाई दे रही है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह
वायु गुणवत्ता खराब होने के दौरान डॉक्टर बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और सांस या हृदय संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह देते हैं। लोगों को अनावश्यक रूप से लंबे समय तक बाहर रहने से बचना चाहिए और यदि AQI लगातार खराब बना रहे तो बाहर निकलते समय उपयुक्त मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए। पर्याप्त पानी पीना और घर के भीतर स्वच्छ वायु बनाए रखना भी फायदेमंद हो सकता है।
प्राकृतिक और स्थानीय कारणों का मिला-जुला असर
विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली की वायु गुणवत्ता पर केवल स्थानीय प्रदूषण का ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मौसमीय परिस्थितियों का भी प्रभाव पड़ता है। पश्चिम एशिया और पड़ोसी देशों से आने वाली धूल भरी हवाएं समय-समय पर AQI में अचानक वृद्धि का कारण बन सकती हैं। ऐसे में मौसम की निगरानी, स्थानीय प्रदूषण नियंत्रण और लोगों की सतर्कता—तीनों ही राजधानी की हवा को बेहतर बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं।