चुनाव आयोग से लेकर मोदी सरकार में फ्रॉड भरे पड़े हैं : सुप्रिया श्रीनेत
देश के लोकतंत्र में EVM और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर छिड़ी बहस अब एक नए मोड़ पर आ गई है। अंग्रेजी अखबार डेक्कन हेराल्ड में लीड स्टोरी छपी है। जिसमें बताया गया है कि हाल ही में एक सर्वे करवाया गया जिसको लेकर दावा किया जा रहा है कि देश के अधिकांश नागरिकों को ईवीएम पर पूरा भरोसा है और वो मानते हैं कि देश में निष्पक्ष चुनाव होते हैं
बीजेपी-चुनाव आयोग को राहुल गांधी का इतना डर? ईवीएम के नाम पर जनता से बड़ा धोखा!
नई दिल्ली : देश के लोकतंत्र में EVM और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर छिड़ी बहस अब एक नए मोड़ पर आ गई है। अंग्रेजी अखबार डेक्कन हेराल्ड में लीड स्टोरी छपी है। जिसमें बताया गया है कि हाल ही में एक सर्वे करवाया गया जिसको लेकर दावा किया जा रहा है कि देश के अधिकांश नागरिकों को ईवीएम पर पूरा भरोसा है और वो मानते हैं कि देश में निष्पक्ष चुनाव होते हैं। अब कांग्रेस की तरफ से चुनाव आयोग के इस ताज़ा सर्वे पर सवाल उठाए गए हैं, लेकिन इस सर्वे की 'क्रोनोलॉजी' और इसके पीछे के किरदारों को देखें, तो दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली नज़र आती है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, चुनाव आयोग ने ये सर्वे NGO GRAAM से करवाया है.. अब सवाल ये उठता है कि ये एनजीओ किसका है और क्या ये एनजीओ वाकई स्वतंत्र है? दरअसल इस एनजीओ के संस्थापक डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम न सिर्फ PMO में कार्यरत हैं, बल्कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धुर समर्थक भी माना जाता है। इतना ही नहीं, उन्होंने 2024 में पीएम मोदी के नेतृत्व पर पावर विदिन नाम की किताब भी लिखी। ऐसे में एक ऐसे व्यक्ति की संस्था से निष्पक्ष सर्वे की उम्मीद करना, जो खुद सरकार का हिस्सा हो, हास्यास्पद लगता है।
इस रिपोर्ट को लेकर कांग्रेस ने एक्स पर लिखा -चुनाव आयोग और नरेंद्र मोदी ने 'वोट चोरी' में खुद को क्लीन चिट देने के लिए एक सर्वे कराया। इस सर्वे में बताया गया कि जनका को EVM पर भरोसा है और लोग मानते हैं कि भारत में निष्पक्ष चुनाव होते हैं..रोचक बात है ये सर्वे जिस NGO GRAAM ने किया, वह नरेंद्र मोदी के करीबी आर. बालासुब्रमण्यम का है। इतना ही नहीं। बालासुब्रमण्यम ने नरेंद्र मोदी की चापलूसी में किताब भी लिखी है। चुनाव आयोग और नरेंद्र मोदी समझ चुके हैं कि उनका वोट चोरी का खेल जनता के सामने आ गया है। इसलिए अपने करीबियों से ऐसे फर्जी सर्वे करा कर जनता का ध्यान भटकाना चाहते हैं, लेकिन देश की जनता 'वोट चोरी' का सच जान चुकी है। नरेंद्र मोदी जी, इस तरह के फर्जी सर्वे से कुछ होने वाला नहीं है, उल्टा आपकी घबराहट ही नजर आती है।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा पेंच टाइमिंग का माना जा रहा है..जैसा कि कांग्रेस ने बताया.. कि ये सर्वे मई 2025 में करवाया गया था. और राहुल गांधी ने चुनाव में वोट चोरी का बड़ा खुलासा अगस्त 2025 में किया.. यानी जब जनता के बीच ईवीएम को लेकर संशय और आक्रोश की नई लहर पैदा हुई, उससे पहले ही एक पॉजिटिव रिपोर्ट तैयार कर ली गई ताकि बाद में उठने वाले सवालों को दबाया जा सके। इस मामले पर कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने एक्स पर लिखा-अख़बारों ने कर्नाटक में हुए एक सर्वे पर ख़बर छापी: “अधिकांश नागरिक चुनाव और EVM पर भरोसा करते हैं”
पर यह नहीं बताया कि
• सर्वे चुनाव आयोग ने GRAAM नाम के NGO से करवाया
• जिसके संस्थापक बालासुब्रमण्यम PMO में काम करते हैं
• उन्होंने 2024 में नरेंद्र मोदी की चापलूसी में उनके “नेतृत्व” पर एक किताब भी लिखी
यह सर्वे छापने वालों ने भी यह नहीं बताया कि सर्वे मोदी के करीबी ने किया है
फ्रॉड भरे पड़े हैं चुनाव आयोग से लेकर मोदी सरकार में
विपक्ष का साफ कहना है कि अगर सर्वे करने वाली एजेंसी का मुखिया खुद सरकार के वेतन पर हो और पीएम की तारीफों के कसीदे पढ़ता हो, तो उस सर्वे के नतीजे वही होंगे जो सरकार सुनना चाहती है और ऊपर से इस रिपोर्ट में ये लिखकर जनता को गुमराह करने की कोशिश की गई है कि ये सर्वे कर्नाटक में हुआ जहां कांग्रेस की सरकार है। अब सवाल है कि क्या ये सर्वे करोड़ों वोटर्स के भरोसे के साथ खिलवाड़ नहीं है। क्या चुनाव आयोग के पास कोई ऐसी स्वतंत्र एजेंसी नहीं थी जिसका सरकार से सीधा लेना-देना न हो?