डिंपल यादव का सरकार पर हमला, बोलीं- छात्रों की आवाज दबाई गई, शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय हो

डिंपल यादव ने लोकसभा में कहा कि सामाजिक एवं पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से गैरकानूनी तरीके से हटाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने पहले प्रदर्शनकारियों को बैरिकेडिंग के जरिए घेरा और उसके बाद उनके खिलाफ बल प्रयोग किया।;

Update: 2026-07-28 13:41 GMT

नई दिल्ली: लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने छात्र आंदोलन, पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था और प्रदर्शनकारियों के साथ हुई कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाब मांगा। डिंपल यादव ने कहा कि परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों ने देश के लाखों युवाओं का विश्वास कमजोर किया है और सरकार को केवल कानून बनाने के बजाय व्यवस्था में व्यापक सुधार करने की जरूरत है। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर लंबे समय तक शांतिपूर्ण ढंग से चल रहे आंदोलन के दौरान छात्रों की मांगों को गंभीरता से नहीं सुना गया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के साथ सख्ती बरती गई, जबकि वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने आए थे।

जंतर-मंतर की कार्रवाई पर उठाए सवाल

डिंपल यादव ने लोकसभा में कहा कि सामाजिक एवं पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से गैरकानूनी तरीके से हटाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने पहले प्रदर्शनकारियों को बैरिकेडिंग के जरिए घेरा और उसके बाद उनके खिलाफ बल प्रयोग किया। उन्होंने सरकार से पूछा कि यदि प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, तो ऐसी कार्रवाई की आवश्यकता क्यों पड़ी। उनके अनुसार, लोकतंत्र में नागरिकों को शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराने का अधिकार है और सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए।

पेपर लीक कानून की प्रभावशीलता पर सवाल

सपा सांसद ने कहा कि सरकार पहले भी पेपर लीक रोकने के लिए कानून ला चुकी है, लेकिन इसके बावजूद परीक्षा से जुड़ी अनियमितताएं सामने आती रहीं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पहले का कानून प्रभावी था, तो फिर पेपर लीक की घटनाएं क्यों नहीं रुकीं। उन्होंने कहा कि केवल नए कानून बनाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं की जवाबदेही भी तय करनी होगी। उनके अनुसार, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बहाल करना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से लेने की मांग

डिंपल यादव ने अपने भाषण में कहा कि हाल के दिनों में कई छात्र मानसिक तनाव और परीक्षा संबंधी विवादों से प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं की समस्याओं को केवल प्रशासनिक विषय नहीं माना जा सकता, बल्कि यह सामाजिक और मानवीय मुद्दा भी है। उन्होंने सरकार से अपील की कि छात्रों की शिकायतों के समाधान के लिए संवाद का रास्ता अपनाया जाए और ऐसी परिस्थितियां बनाई जाएं, जिससे युवाओं का शिक्षा प्रणाली पर भरोसा कायम रहे।

'शांतिपूर्ण आंदोलन लोकतंत्र की ताकत'

लोकसभा में बोलते हुए डिंपल यादव ने कहा कि छात्र आंदोलन लंबे समय तक शांतिपूर्ण ढंग से चलता रहा और देश के विभिन्न राज्यों से आए युवाओं ने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें रखीं। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के सांसद और विधायक भी आंदोलन स्थल पर छात्रों के समर्थन में पहुंचे थे। उनके अनुसार, यह किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं बल्कि छात्रों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए था। डिंपल यादव ने यह भी बताया कि वह स्वयं आंदोलन के दौरान जंतर-मंतर गई थीं और वहां सोनम वांगचुक से मुलाकात की थी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अहिंसक आंदोलनों का सम्मान किया जाना चाहिए।

सरकार की नीतियों पर साधा निशाना

अपने संबोधन में उन्होंने केंद्र सरकार की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार को अधिक संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महत्वपूर्ण नीतिगत विषयों पर राजनीतिक प्राथमिकताओं को अधिक महत्व दे रही है, जबकि छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर अपेक्षित गंभीरता दिखाई नहीं दे रही।

शिक्षा सुधार और संवाद की जरूरत पर जोर

डिंपल यादव ने कहा कि देश के युवाओं का भविष्य सुरक्षित करने के लिए केवल कठोर कानून पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था, समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया और छात्रों के साथ नियमित संवाद की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति नागरिकों की आवाज होती है और सरकार को उसे सुनने तथा उसका सम्मान करने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

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