धर्मेंद्र प्रधान ने पीएम मोदी के लाल किले से दिए गए संबोधनों के उर्दू संकलन का किया विमोचन

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नई दिल्ली में ‘खुत्बात-ए-मोदी: लाल किले की फसील से’ नामक एक पुस्तक का विमोचन किया

Update: 2026-01-05 17:23 GMT

नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोमवार को नई दिल्ली में ‘खुत्बात-ए-मोदी: लाल किले की फसील से’ नामक एक पुस्तक का विमोचन किया। यह पुस्तक वर्ष 2014 से 2025 तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से दिए गए संबोधनों का उर्दू संकलन है।

इस मौके पर धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि प्रधानमंत्री के भाषणों में अंत्योदय, गरीबों का कल्याण, स्वच्छ भारत, राष्ट्रीय एकता, तथा 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं का स्पष्ट और प्रेरक उल्लेख मिलता है। ये भाषण नए भारत के विजन को सुदृढ़ रूप से सामने रखते हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस पुस्तक को राष्ट्रीय उर्दू भाषा प्रोत्साहन परिषद ने प्रकाशित किया है। यह संस्था शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करती है और देशभर में उर्दू भाषा के संवर्धन, संरक्षण और प्रसार के लिए समर्पित है।

इस पुस्तक विमोचन के अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पुस्तक के प्रकाशन को लेकर प्रसन्नता जताई। उन्होंने इसे भाषाई समावेशन की दिशा में एक सार्थक कदम बताया। प्रधान ने यह भी कहा कि इस प्रकार के प्रकाशन नागरिकों को प्रधानमंत्री के विचारों, प्राथमिकताओं और विकास संबंधी दृष्टिकोण से सीधे जोड़ने का प्रभावी माध्यम बनते हैं।

उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह पुस्तक देशभर के पुस्तकालयों में स्थान पाएगी और विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं एवं पाठकों के बीच विकसित भारत के विजन पर व्यापक विमर्श को बढ़ावा देगी। प्रधान ने जोर दिया कि राष्ट्रीय उर्दू भाषा प्रोत्साहन परिषद को भारत की समृद्ध विरासत, संस्कृति, जीवन शैली तथा ज्ञान-परंपरा से जुड़ी सामग्री का उर्दू में प्रकाशन और अधिक सक्रियता से करना चाहिए। उन्होंने परिषद को इस सार्थक पहल के लिए बधाई दी और भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएं भी दीं।

शिक्षा मंत्रालय का मानना है कि यह पुस्तक, ‘खुत्बात-ए-मोदी,’ न केवल स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक संबोधनों का भाषाई रूपांतरण है, बल्कि यह नए भारत की परिवर्तनकारी यात्रा को भी समेटे हुए है। यह पुस्तक सरकार की भाषाई समावेशिता की प्रतिबद्धता को भी मजबूत बनाती है, क्योंकि इसके माध्यम से देशभर के उर्दू पाठकों को इन राष्ट्रीय संबोधनों तक सहज पहुंच मिल सकेगी।

पुस्तक विमोचन के इस कार्यक्रम में शिक्षा मंत्रालय और विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। इनमें शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा सचिव डॉ. विनीत जोशी, भारतीय भाषा समिति के अध्यक्ष पद्मश्री चामू कृष्ण शास्त्री, राष्ट्रीय उर्दू भाषा प्रोत्साहन परिषद के निदेशक डॉ. शम्स इकबाल, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. नैमा खातून व शिक्षा मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। यह आयोजन न केवल एक पुस्तक विमोचन था, बल्कि बहुभाषी भारत, विकसित भारत और समावेशी संवाद की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा गया।

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