दिल्ली विश्‍वविद़यालय की प्रोफेसर मर्डर केसः पति-पत्नी ने की हत्या, लूटपाट नहीं ये थी वजह

इस हाई-प्रोफाइल मामले को सुलझाने के लिए ईस्ट जिला पुलिस की सात विशेष टीमें बनाई गई थीं। जांच के दौरान पुलिस ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पश्चिम बंगाल में लगातार छापेमारी की।;

Update: 2026-06-07 07:53 GMT

नई दिल्ली: Delhi Professor Murder Case: राजधानी के न्यू अशोक नगर इलाके में हुई असिस्टेंट प्रोफेसर देवस्मिता पॉल की हत्या के मामले में ईस्ट जिला पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। इस सनसनीखेज हत्याकांड में शामिल दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जिनमें एक पुरुष और एक महिला शामिल हैं। दोनों आरोपी पति-पत्नी हैं और उन्हें पश्चिम बंगाल के वर्धमान जिले से पकड़ा गया है। पुलिस के अनुसार, यह मामला पहले एक ब्लाइंड मर्डर केस के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन गहन जांच के बाद पूरी साजिश का पर्दाफाश हो गया।

संपत्ति विवाद बना हत्या की वजह

जांच में सामने आया है कि इस हत्या के पीछे कोई लूटपाट या पुरानी रंजिश नहीं थी, बल्कि करोड़ों रुपये की संपत्ति को लेकर चल रहा विवाद इसका मुख्य कारण था। मृतक प्रोफेसर के नाना की पश्चिम बंगाल में एक संपत्ति थी, जहां आरोपी पति-पत्नी किराएदार के रूप में रह रहे थे। बताया जा रहा है कि आरोपी उस संपत्ति पर कब्जा करना चाहते थे, जबकि प्रोफेसर लगातार उन्हें संपत्ति खाली करने के लिए दबाव बना रही थीं। यही विवाद धीरे-धीरे बढ़ता गया और अंततः हत्या की साजिश में बदल गया।

सात पुलिस टीमों ने की कार्रवाई

इस हाई-प्रोफाइल मामले को सुलझाने के लिए ईस्ट जिला पुलिस की सात विशेष टीमें बनाई गई थीं। जांच के दौरान पुलिस ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पश्चिम बंगाल में लगातार छापेमारी की। करीब 200 लोगों को जांच के दायरे में लिया गया, जिनकी घटना के दिन सोसायटी में मौजूदगी या गतिविधियां संदिग्ध पाई गई थीं। तकनीकी सर्विलांस, सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल डेटा की मदद से पुलिस धीरे-धीरे आरोपियों तक पहुंचने में सफल रही।

1400 किलोमीटर दूर से पहुंचे थे दिल्ली

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी पति-पत्नी करीब 1400 किलोमीटर दूर पश्चिम बंगाल से दिल्ली आए थे। दोनों ने पूरी योजना पहले से तैयार कर रखी थी और इसी के तहत वे न्यू अशोक नगर स्थित सोसायटी पहुंचे। पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने पहले से तय रणनीति के तहत सामान्य व्यवहार बनाए रखा ताकि किसी को उन पर शक न हो।

बच्चे को साथ लाकर गुमराह करने की कोशिश

जांच में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि आरोपी अपने छोटे बच्चे को भी साथ लेकर आए थे। पुलिस के अनुसार, उन्होंने ऐसा इसलिए किया ताकि वे एक सामान्य परिवार की तरह दिखें और किसी को उन पर शक न हो। यह भी माना जा रहा है कि यह कदम पूरी तरह से सोच-समझकर उठाया गया था, ताकि सुरक्षा जांच और सोसायटी में प्रवेश के दौरान कोई संदेह न पैदा हो।

पहचान छिपाकर किया हमला

पुलिस के मुताबिक, आरोपी पहले से मृतक प्रोफेसर के संपर्क में थे और परिचित होने के कारण उन्हें सोसायटी में प्रवेश मिल गया। आरोपियों ने पहले सामान्य बातचीत की और भरोसा कायम किया, जिसके बाद अचानक हमला कर दिया गया। वारदात के बाद दोनों आरोपी मौके से फरार हो गए और वापस पश्चिम बंगाल लौट गए। हत्या के बाद वे लगातार अपना ठिकाना बदलते रहे ताकि पुलिस की गिरफ्त से बच सकें।

तकनीकी जांच से खुला पूरा मामला

पुलिस की जांच में सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और डिजिटल साक्ष्यों की अहम भूमिका रही। इन्हीं सुरागों के आधार पर पुलिस ने आरोपियों की पहचान की और अंततः उन्हें गिरफ्तार कर लिया। ईस्ट जिला पुलिस का कहना है कि यह मामला बेहद चुनौतीपूर्ण था क्योंकि आरोपी वारदात के बाद राज्य से बाहर भाग गए थे। लेकिन लगातार निगरानी और कई राज्यों में छापेमारी के चलते मामला सुलझा लिया गया।

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