Delhi: सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में हॉस्टल पर जोर, 10 हजार छात्रों के लिए बनेंगे नए छात्रावास

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार दिल्ली देश के प्रमुख शिक्षा केंद्रों में शामिल है और अलग-अलग राज्यों से बड़ी संख्या में विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिए राजधानी आते हैं। कॉलेज या विश्वविद्यालय में दाखिला मिलने के बाद विद्यार्थियों के सामने सुरक्षित और उचित दर पर रहने की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती बन जाती है।;

Update: 2026-09-16 05:59 GMT

नई दिल्लीः सत्य निकेतन में पीजी भवन हादसे के बाद दिल्ली में विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित और किफायती आवास की व्यवस्था को लेकर सरकार ने कदम तेज कर दिए हैं। विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्रावास निर्माण की योजनाओं को गति देने के निर्देश दिए गए हैं। इसी कड़ी में दिल्ली सरकार ने करीब 10 हजार विद्यार्थियों की क्षमता वाले छात्रावास बनाने का निर्णय लिया है। इन छात्रावासों का निर्माण सरकारी-निजी भागीदारी यानी पीपीपी मॉडल के तहत भी कराया जाएगा।

कॉलेजों में उपलब्ध जमीन का होगा सर्वे

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार दिल्ली देश के प्रमुख शिक्षा केंद्रों में शामिल है और अलग-अलग राज्यों से बड़ी संख्या में विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिए राजधानी आते हैं। कॉलेज या विश्वविद्यालय में दाखिला मिलने के बाद विद्यार्थियों के सामने सुरक्षित और उचित दर पर रहने की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती बन जाती है। सरकार अब इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए उन कॉलेजों और संस्थानों का सर्वे कराने की तैयारी कर रही है, जहां छात्रावास बनाने के लिए पर्याप्त जमीन उपलब्ध है। उपलब्ध स्थान, विद्यार्थियों की जरूरत और संस्थानों की क्षमता को ध्यान में रखते हुए नए हॉस्टल की योजनाएं तैयार की जाएंगी।

पीपीपी मॉडल से निर्माण में तेजी की तैयारी

सरकार छात्रावास निर्माण के लिए पीपीपी मॉडल का इस्तेमाल करने की योजना बना रही है। इसके पीछे उद्देश्य निर्माण प्रक्रिया को गति देने के साथ-साथ हॉस्टल के रखरखाव और विद्यार्थियों को लगातार सुविधाएं उपलब्ध कराना है। सरकार के मुताबिक छात्रावास केवल रहने के लिए भवन नहीं होंगे। इनमें विद्यार्थियों की सुरक्षा, सुविधाओं और रोजमर्रा की आवश्यकताओं को भी ध्यान में रखा जाएगा। हॉस्टल में रहने वाले छात्रों के लिए ऐसा वातावरण तैयार करने पर जोर होगा, जिससे वे अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकें।

कई संस्थानों में पहले से चल रहा काम

मुख्यमंत्री ने बताया कि राजधानी के कई शिक्षण और चिकित्सा संस्थानों में छात्रावास निर्माण का काम पहले से चल रहा है या इसकी योजना तैयार की गई है। इनमें अंबेडकर विश्वविद्यालय का धीरपुर परिसर, जीबी पंत इंजीनियरिंग कॉलेज एवं पॉलिटेक्निक, इंदिरा गांधी अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज और दिल्ली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी सहित अन्य संस्थान शामिल हैं। इन परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के साथ सरकार नए संभावित स्थलों की भी पहचान कर रही है, ताकि अधिक संख्या में विद्यार्थियों को संस्थानों के आसपास ही आवास उपलब्ध कराया जा सके।

कई विभागों को अभियान से जोड़ा जाएगा

छात्रावास निर्माण की योजना को केवल शिक्षा विभाग तक सीमित नहीं रखा जाएगा। स्वास्थ्य विभाग, उच्च शिक्षा विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग समेत संबंधित विभागों को भी इस प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा। सरकार की ओर से उपयुक्त स्थानों की पहचान का काम किया जा रहा है। इसके साथ ही छात्रावासों के निर्माण, संचालन और सुविधाओं को लेकर एक व्यापक नीति का प्रारूप तैयार किया जा रहा है। इसमें सुरक्षा और विद्यार्थियों की मूलभूत जरूरतों को प्रमुखता देने की बात कही गई है।

माता-पिता की चिंता कम करने पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ऐसे छात्रावास विकसित करना चाहती है जहां देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले विद्यार्थी सुरक्षित माहौल में रह सकें और उनके माता-पिता भी बच्चों को लेकर आश्वस्त रहें। विद्यार्थियों को कॉलेज में प्रवेश लेने के बाद रहने की जगह, वहां के माहौल और भोजन जैसी बुनियादी जरूरतों को लेकर परेशान न होना पड़े, इसके लिए व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य ऐसा सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराना है, जिसमें विद्यार्थी आवास से जुड़ी चिंताओं से अलग होकर अपनी पढ़ाई और भविष्य की तैयारी पर ध्यान दे सकें।

सत्य निकेतन हादसे के बाद आवास सुरक्षा पर फोकस

सत्य निकेतन पीजी हादसे के बाद राजधानी में विद्यार्थियों के निजी आवास और पीजी की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठे हैं। ऐसे में सरकारी संस्थानों में हॉस्टल क्षमता बढ़ाने की पहल को छात्रों के लिए सुरक्षित आवास के विकल्प विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है। 10 हजार विद्यार्थियों के लिए प्रस्तावित छात्रावासों के अलावा मौजूदा और प्रस्तावित परियोजनाओं को गति देने की योजना से राजधानी में उच्च शिक्षा हासिल करने वाले छात्रों के लिए संस्थान-आधारित आवास की उपलब्धता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

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