Delhi EV Policy: इलेक्ट्रिक दोपहिया, तिपहिया तथा छोटे व्यावसायिक वाहनों को खरीदने पर मिलेगी कितनी सब्सिडी

30 लाख रुपये से अधिक कीमत वाली कारों को छोड़कर सभी इलेक्ट्रिक वाहनों के पंजीकरण पर 100 प्रतिशत रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क माफ रहेगा। इससे इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने की कुल लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी और अधिक लोग ईवी अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।;

Update: 2026-06-30 09:02 GMT

नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने राजधानी को प्रदूषण मुक्त और स्वच्छ परिवहन व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ईवी नीति-2026 को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस नीति को स्वीकृति दी गई। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक दिल्ली को देश का अग्रणी इलेक्ट्रिक मोबिलिटी हब बनाना है। प्रस्ताव है कि यह नीति एक जुलाई 2026 से 31 मार्च 2030 तक लागू रहेगी। इसके तहत अगले चार वर्षों में सरकार 7,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करेगी, ताकि इलेक्ट्रिक वाहनों को आम लोगों के लिए अधिक किफायती बनाया जा सके।

दोपहिया, तिपहिया और व्यावसायिक वाहनों पर मिलेगी सब्सिडी

नई नीति के तहत इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वालों को आकर्षक वित्तीय सहायता दी जाएगी। पहले वर्ष में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन खरीदने पर 30 हजार रुपये, तिपहिया वाहन पर 50 हजार रुपये तथा छोटे व्यावसायिक इलेक्ट्रिक वाहनों (एन-1 श्रेणी) पर एक लाख रुपये तक की सब्सिडी मिलेगी। दूसरे और तीसरे वर्ष में भी चरणबद्ध तरीके से सब्सिडी जारी रहेगी, हालांकि इसकी राशि क्रमशः कम होती जाएगी।

रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस पूरी तरह माफ

सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए एक और महत्वपूर्ण राहत दी है। 30 लाख रुपये से अधिक कीमत वाली कारों को छोड़कर सभी इलेक्ट्रिक वाहनों के पंजीकरण पर 100 प्रतिशत रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क माफ रहेगा। इससे इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने की कुल लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी और अधिक लोग ईवी अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।

पुराने वाहन स्क्रैप कराने पर मिलेगा इंसेंटिव

नई ईवी नीति में पुराने प्रदूषणकारी वाहनों को हटाने के लिए विशेष प्रोत्साहन भी शामिल किया गया है। यदि वाहन मालिक अपना पुराना वाहन स्क्रैप कराते हैं तो उन्हें दोपहिया पर 10 हजार रुपये, तिपहिया पर 25 हजार रुपये, चारपहिया पर एक लाख रुपये, एन-1 ट्रक पर 50 हजार रुपये तथा ग्रामीण सेवा वाहनों पर 15 हजार रुपये का इंसेंटिव दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे पुराने प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की संख्या तेजी से घटेगी।

चरणबद्ध तरीके से केवल इलेक्ट्रिक वाहनों का होगा पंजीकरण

दिल्ली सरकार ने भविष्य की परिवहन व्यवस्था को पूरी तरह इलेक्ट्रिक बनाने की दिशा में समयसीमा भी तय कर दी है। एक जनवरी 2027 से केवल इलेक्ट्रिक यात्री और मालवाहक ऑटो के नए पंजीकरण किए जाएंगे। इसी तारीख से छोटे मालवाहक वाहनों का भी केवल इलेक्ट्रिक संस्करण ही पंजीकृत होगा। वहीं एक अप्रैल 2028 से राजधानी में नए दोपहिया वाहनों का पंजीकरण भी केवल इलेक्ट्रिक मॉडल के लिए किया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि हाइब्रिड वाहनों को इस नीति के तहत किसी प्रकार की छूट या विशेष सुविधा नहीं मिलेगी।

चार्जिंग नेटवर्क का होगा बड़ा विस्तार

ईवी नीति के तहत राजधानी में चार्जिंग सुविधाओं का व्यापक विस्तार किया जाएगा। सरकार ने 30 हजार नए इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग पॉइंट विकसित करने का लक्ष्य रखा है। इससे ईवी उपयोगकर्ताओं को चार्जिंग संबंधी परेशानियों से राहत मिलेगी और इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग अधिक सुविधाजनक बनेगा।

इलेक्ट्रिक ट्रकों को मिलेगी विशेष छूट

भारी वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए सरकार ने विशेष प्रावधान किया है। नीति की अधिसूचना जारी होने के तीन महीने के भीतर खरीदे जाने वाले पहले 1,000 एन-2 श्रेणी के बड़े इलेक्ट्रिक ट्रकों को 10 वर्षों तक 'नो एंट्री' समय में भी प्रवेश की अनुमति मिलेगी। इस फैसले का उद्देश्य माल परिवहन क्षेत्र में इलेक्ट्रिक ट्रकों को बढ़ावा देना और डीजल आधारित भारी वाहनों पर निर्भरता कम करना है।

मुख्यमंत्री ने बताया देश की सबसे उदार ईवी नीति

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि नई ईवी नीति पूरी तरह शून्य-उत्सर्जन (Zero Emission) वाले वाहनों को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। इसमें खरीद पर सब्सिडी, स्क्रैपिंग इंसेंटिव, रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में छूट तथा चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार जैसे कई प्रावधान शामिल किए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली देश का ऐसा पहला राज्य बनने जा रहा है, जहां इलेक्ट्रिक वाहनों पर सबसे अधिक सब्सिडी और व्यापक प्रोत्साहन उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस नीति से प्रदूषण में कमी आने के साथ-साथ स्वच्छ, टिकाऊ और आधुनिक परिवहन व्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।

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