संविधान संशोधन विधेयक खारिज, कांग्रेस बोली- ‘महिला आरक्षण पर समर्थन अटूट’
लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के खारिज होने के बाद कांग्रेस ने सरकार पर हमला बोलते हुए इसे अपनी बड़ी जीत बताया;
कार्ति चिदंबरम का बयान- ‘महिला आरक्षण लागू है, परिसीमन का विरोध किया’
- इमरान प्रतापगढ़ी का आरोप- ‘सरकार ने महिलाओं के नाम पर उत्तर-दक्षिण असमानता बढ़ाने की कोशिश की’
- ‘परिसीमन से जोड़ना गलत’, कांग्रेस सांसदों ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल
- कोडिकुन्निल सुरेश बोले- ‘यह विपक्ष की बड़ी जीत, आगे भी एकजुट रहेंगे’
नई दिल्ली। लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के खारिज होने के बाद कांग्रेस ने सरकार पर हमला बोलते हुए इसे अपनी बड़ी जीत बताया। कांग्रेस सांसदों ने स्पष्ट किया कि उनका महिला आरक्षण के प्रति समर्थन पूर्ण और अटूट है, लेकिन वे परिसीमन और जनगणना की शर्तों के साथ इसे जोड़ने का विरोध कर रहे थे।
कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा, "महिला आरक्षण विधेयक 2023 में पारित हुआ था और कल से इसे अधिसूचित भी कर दिया गया है। वह विधेयक अभी भी प्रभावी है। जो बात खारिज हुई है, वह है इसे नए परिसीमन अभ्यास से जोड़ना, जिसे अस्वीकार कर दिया गया है। हमने केवल परिसीमन का विरोध किया है। महिला आरक्षण के प्रति हमारा समर्थन पूर्ण और पूरी तरह से समर्पित है।"
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा, "महिलाओं के मुद्दों की आड़ में, देश को उत्तर और दक्षिण के बीच असमानता की खाई में फंसाने की सरकार की कोशिश पूरी तरह नाकाम हो गई है।"
कांग्रेस सांसद मल्लू रवि ने कहा कि विधेयक इसलिए संभव नहीं हो पाया क्योंकि इसमें महिला आरक्षण को जान-बूझकर परिसीमन के साथ जोड़ दिया गया था। उन्होंने कहा, "अगर महिला आरक्षण विधेयक को अलग से लाया जाता है, जैसा कि कल और आज सभी विपक्षी सदस्यों ने कहा है, तो हम इसे सर्वसम्मति से पारित कर देंगे, बशर्ते इसे अलग रखा जाए।"
मुंबई में कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता चरण सिंह सप्रा ने कहा, "भाजपा को सबसे पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह महिला आरक्षण विधेयक के साथ परिसीमन विधेयक क्यों ला रही थी और वह 2011 की जनगणना पर क्यों निर्भर थी। कांग्रेस चाहती है कि महिलाओं को उनके अधिकार मिलें, लेकिन महिला आरक्षण विधेयक के तहत अगर कोई जाति जनगणना से बचने का रास्ता निकालने की कोशिश करेगा तो उसे रोक दिया जाएगा।"
कांग्रेस सांसद कोडिकुन्निल सुरेश ने इसे विपक्ष की बड़ी जीत बताया। उन्होंने कहा, "यह विपक्ष की एक बड़ी जीत है। हमने सरकार से कहा था कि यह कानून सही नहीं है, यह गलत है। इसलिए आपको पूरे विपक्ष के साथ चर्चा करनी चाहिए और विपक्ष को विश्वास में लेना चाहिए। वरना, यह संशोधन विधेयक सदन में गिर जाएगा, क्योंकि इस सरकार के पास दो-तिहाई बहुमत नहीं है।"
सुरेश ने आगे कहा, "हां, पूरा विपक्ष एकजुट हुआ और इस विधेयक को हरा दिया। भविष्य में भी पूरा विपक्ष एकजुट रहेगा और भाजपा के साथ-साथ सांप्रदायिक ताकतों को भी हराएगा।"
कांग्रेस का स्पष्ट रुख है कि 2023 का महिला आरक्षण विधेयक पहले से ही लागू है और उसे तुरंत प्रभावी बनाया जाना चाहिए। पार्टी ने परिसीमन की शर्त को अनावश्यक और राजनीतिक मंशा वाला बताया। कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि विपक्ष की एकजुटता के कारण सरकार का प्रयास असफल रहा।