कांग्रेस 8 फरवरी से मनरेगा बचाओ संग्राम की करेगी शुरुआत, 45 दिन तक चलेगा अभियान
कांग्रेस ने एक प्रेस कांफ्रेंस कर बताया पार्टी 45 दिनों तक 'मनरेगा बचाओ राष्ट्रव्यापी अभियान' चलाएगी। ये जानकारी पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल और सांसद जयराम रमेश ने दी..पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार एक नई साजिश के तहत मनरेगा को कमजोर कर रही है। 'मनरेगा बचाओ राष्ट्रव्यापी अभियान' को लेकर जयराम रमेश ने कहा ये सिर्फ एक अभियान नहीं बल्कि संग्राम है
मनरेगा बचाओ संग्राम
दिल्ली में कांग्रेस ने की प्रेस कांफ्रेंस
45 दिन तक चलेगा मनरेगा बचाओ संग्राम
8 फरवरी से होगी शुरुआत
राहुल-खरगे ग्राम प्रधानों को लिखेंगे चिट्ठी
नई दिल्ली: मनरेगा को लेकर अब कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ आर पार की तैयारी कर ली है। पार्टी देशव्यापी मनरेगा बचाओ संग्राम शुरू करने जा रही है जो 45 दिनों तक चलेगा। इस दौरान न सिर्फ सभी राज्यों में प्रदेश स्तरीय बैठकें आयोजित होंगी बल्कि मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी हर एक ग्राम प्रधान को चिट्टी भी लिखेंगे। पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल और प्रवक्ता जयराम रमेश ने एक प्रेस कांफ्रेंस कर इस अभियान का रोडमैप शेयर किया।
कांग्रेस ने एक प्रेस कांफ्रेंस कर बताया पार्टी 45 दिनों तक 'मनरेगा बचाओ राष्ट्रव्यापी अभियान' चलाएगी। ये जानकारी पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल और सांसद जयराम रमेश ने दी..पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार एक नई साजिश के तहत मनरेगा को कमजोर कर रही है। 'मनरेगा बचाओ राष्ट्रव्यापी अभियान' को लेकर जयराम रमेश ने कहा ये सिर्फ एक अभियान नहीं बल्कि संग्राम है।
इस अभियान के रोडमैप की बात करें तो आंदोलन का रोडमैप (8 जनवरी से 25 फरवरी)
• 8 जनवरी: सभी राज्यों में प्रदेश स्तरीय बड़ी बैठकें, जिसमें प्रभारी और दिग्गज नेता शामिल होंगे।
• 10 जनवरी: देश के सभी जिलों में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर 'पंचायती राज खत्म करने की साजिश' का पर्दाफाश किया जाएगा।
• 11 जनवरी: गांधी या अंबेडकर प्रतिमा के समक्ष जिला स्तर पर एक दिवसीय उपवास।
• 12 - 29 जनवरी: 'पंचायत चौपाल' का आयोजन कर ग्रामीणों को जागरूक किया जाएगा। इसी दौरान अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ग्राम प्रधानों को पत्र लिखेंगे।
• 30 जनवरी - 6 फरवरी: वार्ड और ब्लॉक स्तर पर कार्यक्रम के बाद जिला कलेक्टर कार्यालयों का घेराव।
• 7 - 25 फरवरी: विधानसभा और राजभवन के घेराव से लेकर विशाल रैलियों के साथ आंदोलन का समापन होगा।
दरअसल कांग्रेस का आरोप है कि
• पहले मनरेगा 'डिमांड ड्रिवन' था (काम मांगने पर रोजगार की गारंटी), लेकिन अब इसे फंड आधारित बनाया जा रहा है। फंड खत्म होते ही काम बंद कर दिया जाएगा।
• नया कानून पंचायतों की शक्ति छीनकर सारी कमान दिल्ली (केंद्र) के हाथ में सौंपने की साजिश है।
• योजना से 'महात्मा गांधी' का नाम हटाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और विचारधारा पर हमला है।
कांग्रेस का कहना है कि ये अभियान राइट टू वर्क यानी काम के अधिकार को बचाने और किसानों, पिछड़ों व दलितों के सम्मान की रक्षा के लिए है। पार्टी ने साफ कर दिया है वो इस मुद्दे पर पीछे नहीं हटेगी और सड़क से सदन तक सरकार को घेरने का काम करेगी। अब जानकारों का मानना है कि अगर कांग्रेस के इस अभियान का असर हुआ तो मुमकिन है कि मोदी सरकार को ये कानून वापस लेना पड़े। ठीक उसी तरह जैसे सरकार ने तीन कृषि कानून वापिस लिए थे। अब कांग्रेस पार्टी अपने इस अभियान में कितनी सफल हो पाती है।