कांग्रेस संगठन सृजन अभियान में तेजी : 8 राज्यों के 286 नए डीसीसी प्रेसिडेंट को खड़गे-राहुल गांधी ने दी ट्रेनिंग

कांग्रेस पार्टी ने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए चलाए जा रहे 'संगठन सृजन अभियान' में तेजी ला दी है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने अभियान की प्रगति साझा करते हुए बताया कि 8 राज्यों के नए नियुक्त डिस्ट्रिक्ट कांग्रेस कमेटी (डीसीसी) अध्यक्षों के लिए एक दिवसीय ट्रेनिंग सेशन बेहद सफल रहा।

Update: 2026-02-11 01:49 GMT

नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी ने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए चलाए जा रहे 'संगठन सृजन अभियान' में तेजी ला दी है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने अभियान की प्रगति साझा करते हुए बताया कि 8 राज्यों के नए नियुक्त डिस्ट्रिक्ट कांग्रेस कमेटी (डीसीसी) अध्यक्षों के लिए एक दिवसीय ट्रेनिंग सेशन बेहद सफल रहा।

केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर बैठक की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, "संगठन सृजन अभियान के तहत 8 राज्यों के नए बने डीसीसी प्रेसिडेंट के लिए एक दिन का ट्रेनिंग सेशन बहुत अच्छा रहा। 286 डीसीसी प्रेसिडेंट इस इंटेंसिव प्रोग्राम में शामिल हुए, जिसमें कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अपने कीमती गाइडेंस से इसे और बेहतर बनाया।"

उन्होंने जोर दिया कि यह अभियान पार्टी के संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने का अहम मिशन है। अब तक 14 राज्यों में अभियान के 5 फेज पूरे हो चुके हैं, जिसमें कुल 531 डीसीसी प्रेसिडेंट नियुक्त किए जा चुके हैं। अगले फेज में 6 और राज्यों के 218 जिलों में यह प्रक्रिया जारी है।

पारदर्शिता और समर्पण सुनिश्चित करने के लिए सीडब्ल्यूसी सदस्य, पूर्व पीसीसी प्रेसिडेंट, सांसद और विधायकों सहित 284 एआईसीसी पर्यवेक्षकों ने कुल 2,604 दिन फील्ड में बिताए। यह प्रयास संगठन की मजबूती और जवाबदेही को मजबूत करता है।

केसी वेणुगोपाल ने आगे बताया कि अभियान की घोषणा के बाद 4 राज्यों के 172 डीसीसी के लिए 10-दिन के ट्रेनिंग कैंप सफलतापूर्वक पूरे किए जा चुके हैं। ट्रेनिंग का अगला फेज 21 फरवरी से तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में शुरू होगा।

यह सामूहिक प्रयास पार्टी के मजबूत संगठन निर्माण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि जिला, ब्लॉक, मंडल, ग्राम पंचायत और बूथ स्तर तक मजबूत संगठन ही आगामी चुनावों में सफलता की कुंजी है। अभियान में एससी, एसटी, ओबीसी, अल्पसंख्यक और युवा कार्यकर्ताओं की समावेशी भागीदारी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

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