नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने छात्र आंदोलन से जुड़े मामलों में दर्ज एफआईआर वापस लेने और गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों की रिहाई को लेकर केंद्र सरकार से लिखित आश्वासन की मांग की है। CJP प्रवक्ता सौरव दास ने मंगलवार को कहा कि संगठन को उम्मीद है कि सरकार की ओर से आज इस संबंध में स्पष्ट गारंटी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस लेना और किसी भी तरह की प्रतिशोधात्मक कार्रवाई नहीं करना आंदोलन की प्रमुख मांगों में शामिल था। दास ने कहा कि सरकार की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस दिशा में सहमति जताई गई थी, लेकिन अब इसे लिखित रूप में सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर CJP ने जताई प्रतिक्रिया
नीट-यूजी 2026 पेपर लीक के विरोध में हुए छात्र प्रदर्शनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को निर्देश दिया था कि 18 वर्ष से कम उम्र के उन छात्रों को रिहा किया जाए, जिन्हें प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार या हिरासत में लिया गया है और जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। सौरव दास ने कहा कि यदि सुप्रीम कोर्ट युवाओं के हित में कोई कदम उठाता है तो CJP उसका स्वागत करता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अदालत के निर्देश उनकी मूल मांगों के अतिरिक्त होने चाहिए। उन्होंने कहा, “हमारी मांग थी कि सभी प्रदर्शनकारियों को छोड़ा जाए। अगर पहले से दर्ज एफआईआर वाले लोगों को रिहा नहीं किया जाता है तो यह हमें स्वीकार नहीं होगा।”
FIR वापसी के लिए तय की थी समयसीमा
CJP ने देशभर में छात्र आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों को वापस लेने के लिए सरकार को मंगलवार तक का समय दिया था। संगठन का कहना है कि यदि सरकार इस दिशा में कदम नहीं उठाती है तो युवाओं को दोबारा आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। सौरव दास ने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में किसी भी प्रदर्शनकारी के खिलाफ बदले की भावना से कार्रवाई न की जाए। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन करना लोकतांत्रिक अधिकार है और छात्रों को डराने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
37 दिन के आंदोलन के बाद बनी थी सहमति
CJP ने नीट पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर 37 दिनों तक प्रदर्शन किया था। आंदोलन के बाद केंद्र सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत हुई थी। CJP की प्रमुख मांगों में तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामले वापस लेना और पेपर लीक से प्रभावित छात्रों के परिवारों को मुआवजा देना शामिल था। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी नए मंत्री को सौंपी गई।
सुप्रीम कोर्ट ने जांच जारी रखने की दी अनुमति
छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मामलों की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि प्रथम दृष्टया लगाए गए आरोप स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग करते हैं। अदालत ने प्रदर्शन से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का निर्देश भी दिया। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि जिन छात्रों या प्रदर्शनकारियों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें राहत दी जा सकती है। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून के अनुसार जांच प्रक्रिया जारी रहेगी। ये निर्देश उन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिए गए थे, जिनमें दिल्ली समेत कई राज्यों में हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए गए थे।
कंगना रनौत के बयान पर भी साधा निशाना
CJP प्रवक्ता सौरव दास ने भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत की छात्र प्रदर्शनकारियों पर की गई टिप्पणी पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी और जेन-जी कंगना की बातों को गंभीरता से नहीं लेती। दास ने कहा कि कंगना अब एक राजनेता हैं और उन्हें अपनी राजनीतिक जिम्मेदारियों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि युवा आंदोलन को लेकर की गई टिप्पणियों से छात्रों की वास्तविक समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।