जेएनयू में देशविरोधी नारे: आशीष सूद की कड़ी निंदा
शरजील इमाम और उमर खालिद की जमानत खारिज होने के बाद जेएनयू परिसर में देशविरोधी नारे लगाना अत्यंत निंदनीय है
लोकतंत्र में असहमति स्वीकार्य, हिंसा नहीं: सूद
- शरजील इमाम और उमर खालिद पर गंभीर आरोप
- राजनीतिक संरक्षण से बढ़ते राष्ट्रविरोधी तत्व
- देशद्रोह की श्रेणी में आती ऐसी गतिविधियां: गृह मंत्री
नई दिल्ली। शरजील इमाम और उमर खालिद की जमानत खारिज होने के बाद जेएनयू परिसर में देशविरोधी नारे लगाना अत्यंत निंदनीय है। लोकतंत्र में असहमति का अधिकार है, लेकिन हिंसा, उकसावे और व्यक्तिगत या वैचारिक हिंसा की राजनीति के लिए कोई स्थान नहीं हो सकता। यह बयान दिल्ली सरकार के गृह मंत्री आशीष सूद ने दिया है।
आशीष सूद ने कहा कि हम लोकतंत्र में असहमति पर सहमत हो सकते हैं। आप शिक्षा नीति पर चर्चा कीजिए, वित्तीय नीतियों पर बहस कीजिए, अन्य जनहित के मुद्दों पर संवाद कीजिए, लेकिन जो लोग देश को तोड़ने की साजिश करते हैं, उनके प्रति कोई सहानुभूति नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि शरजील इमाम वही व्यक्ति है जिसने ‘चिकन नेक’ काटकर पूर्वोत्तर भारत को देश से अलग करने की बात कही थी। देशविरोधी नारे लगाने वालों में उमर खालिद का नाम सामने आया है। 2020 के दंगों में भी उसकी भूमिका पाई गई है।
दुर्भाग्य यह है कि ऐसे तत्वों को राजनीतिक संरक्षण इसलिए मिलता है क्योंकि इस विधानसभा में ऐसे लोग मौजूद हैं जिन्होंने शरजील इमाम के साथ मंच साझा किया है। इंडी अलायंस में शामिल कई नेताओं ने कन्हैया कुमार के साथ मिलकर चुनाव लड़ा है।
जब इस प्रकार के लोगों को संरक्षण और वैचारिक समर्थन दिया जाता है, तब जेएनयू जैसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में गैर-जिम्मेदार और राष्ट्रविरोधी तत्व सिर उठाते हैं। जेएनयू में जो कुछ हुआ, शरजील इमाम और उमर खालिद के समर्थन में नारे लगाना, यह न केवल निंदनीय है, बल्कि देश के खिलाफ है।
उन्होंने कहा कि मैं इसे स्पष्ट शब्दों में कहना चाहता हूं कि इस प्रकार की गतिविधियां देशद्रोह की श्रेणी में आती हैं और इसकी मैं कड़े शब्दों में निंदा करता हूं।