कठपुतली कॉलोनी वासियों के पुनर्वासन में तेजी लाएगा डीडीए
नई दिल्ली ! अरसे से अपना आशियाना दोबारा पाने की बाट जोह रहे कठपुतली कॉलोनी के निवासियों को अब उनका आशियाना जल्द ही मिल सकेगा,;
दो साल के अंदर बनाए जाएंगे 2800 बहुमंजिले आवास
नई दिल्ली ! अरसे से अपना आशियाना दोबारा पाने की बाट जोह रहे कठपुतली कॉलोनी के निवासियों को अब उनका आशियाना जल्द ही मिल सकेगा, वो भी उसी स्थान पर जहां से उन्हें हटाया गया था। बुधवार को दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने एक संवाददाता सम्मलेन में बताया कि अगले दो वर्ष के अंदर शादीपुर बस डिपो के पास स्थित कालोनी की भूमि पर बहुमंजिला आवास बनाकर 2800 परिवारों को न सिर्फ पुर्नस्थापित कर दिया जाएगा।
बल्कि उनकी आजीविका के लिए दो थियेटर भी बनाए जाएंगे, जिनमें कठपुतली का नृत्य दिखाया का सकेगा। डीडीए के भूमि निपटान विभाग के प्रधान आयुक्त जयप्रकाश अग्रवाल ने बताया कि डीडीए ने कठपुतली कालोनी के लोगों को आनंद पर्वत में ट्रांजिट कैंप में अस्थायी रुप से घर दिए हैं लेकिन अभी तक मात्र 1125 परिवार ही इस ट्रांजिट कैंप में स्थापित किए जा सके हैं। वहीं, 1655 परिवार अभी भी कठपुतली कालोनी में ही रह रहे हैं। अग्रवाल ने बताया कि डीडीए ने कई बार स्थानांतरण करने की कोशिश की है लेकिन स्थानीय नेताओं के कारण अड़चने आती रही। उन्होंने बताया कि अब अगर कोई अड़चन सामने नहीं आई तो 2 महीने के अंदर सभी लोगों को कालोनी से स्थानांतरित कर दिया जायेगा और परियोजना पर काम शुरू कर दिया जायेगा। उधर, कालोनी में रह रहे लोग ट्रांजिट कैंप जाने को तैयार नहीं है। उनका कहना है कि ट्रांजिट कैंप का हाल बेहाल है तथा डीडीए के रवैये से लगता नहीं है कि उन्हें बाद में अपना घर मिलेगा। गौरतलब है कि डीडीए ने शादीपुर बस डिपो के पास स्थित कठपुतली कालोनी के लोगों को उसी भूमि पर बहुमंजिले भवनों में पुर्नस्थापित करने की परियोजना बनाई थी जो पिछले सात साल से अटकी हुई है। हालांकि यह मामला न्यायालय में लंबित है लेकिन डीडीए ने इस काम में तेजी लाने की घोषणा कर दी है। डीडीए के मुताबिक इस योजना की सभी अड़चने लगभग समाप्त हो गई है।
आधुनिक सुविधायुक्त थियेटर में दिखा सकेंगे कठपुतली का नाच
डीडीए के मुताबिक कठपुतली का नृत्य दिखाकर अपनी रोटी-रोटी चलाने वाले कठपुतली कालोनी के लोग अपने कार्यक्रमों का आयोजन इन थियेटरों में कर सकेंगे। दोनों में थियेटरों में तमाम आधुनिक सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी ताकि देश-विदेश के पर्यटक भी यहां कठपुतली का नृत्य देख सकें। इससे स्थानीय लोगों को अपना व्यवसाय चलाने में आसानी होगी और उनकी आय भी बढ़ सकेगी।