भुखमरी का सामना कर रहे त्रिपुरा के ग्रामीण : माकपा सांसद

लोकसभा में सड़े चावल और आटे का नमूना दिखाते हुए त्रिपुरा से माकपा के सांसद शंकर प्रसाद दत्ता ने कहा कि अगर केंद्र और राज्य सरकार मनरेगा योजना के लिए पर्याप्त फंड मुहैया कराने में विफल रहती है

Update: 2018-07-25 23:02 GMT

नई दिल्ली। लोकसभा में सड़े चावल और आटे का नमूना दिखाते हुए त्रिपुरा से मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सांसद शंकर प्रसाद दत्ता ने बुधवार को कहा कि अगर केंद्र और राज्य सरकार मनरेगा योजना के लिए पर्याप्त फंड मुहैया कराने में विफल रहती है तो भुखमरी राज्य को तबाह कर देगी। पश्चिम त्रिपुरा से सांसद ने निम्न सदन में कहा, "पहाड़ी या गांवों के लोगों के पास पैसा नहीं है, जिसके कारण उचित दर दुकानदार सड़े हुए चावल और आटा बेच रहे हैं। मैंने एक दुकान से सड़ा आटा लिया, जिसमें कीड़े दिखाई दे रहे हैं। कृपया देखें क्या यह खाने योग्य है।"

दत्ता ने राज्य में लोगों के प्रति कथित उदासीनता के लिए सत्तारूढ़ भाजपा-आईपीएफटी गठबंधन वाली सरकार को जिम्मेदार ठहराया और कहा, "आज त्रिपुरा में अधिकतर लोगों के पास करने को कुछ नहीं है..यहां तक कि कृषि क्षेत्र का भी यही हाल है। इससे पहले वाम दल शासन के दौरान मनरेगा योजना के तहत लोग 600 से 800 रुपये रोजाना कमा रहे थे क्योंकि यहां बहुत सारा काम होता था।"

उन्होंने कहा कि इस सरकार के अंतर्गत प्रति व्यक्ति आय 300 रुपये रोजाना पर आ गई है, जिसके कारण लोग कठनाईयों भरा जीवन जी रहे हैं। वे न तो काम करने और न ही दैनिक आय के लिए अपनी वस्तुओं को बेचने की स्थिति में हैं।

सांसद ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह मनरेगा योजना के फंड मुहैया कराए और राज्य में खाद्य की अच्छी आपूर्ति सुनिश्चित करे।
 

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